नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। भारत, पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा युवा आबादी वाला देश है और अब ये आत्मनिर्भर लोगों का भी देश बन चुका है। बावजूद यहां वरिष्ठ नागरिकों की स्थिति को लेकर हमेशा सवाल खड़े होते रहते हैं। देश में बुजुर्गों के साथ होने वाले अपराधों की संख्या भी बहुत ज्यादा है। ये एक ऐसी अवस्था है जब तन ही नहीं, व्यक्ति मन से भी बीमार पड़ने लगता है। ऐसे में बुजुर्गों को खास देखभाल की जरूरत होती है। कुछ आसान उपायों से बुजुर्गों को हम जिम्मेदारी की जगह अपनी जमा पूंजी बना सकते हैं। ये आसान उपाय उन्हें सुरक्षित तो रखते ही हैं, साथ ही उन्हें स्वस्थ रखने में भी मददगार साबित होते हैं।

भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की जनसंख्या 104 करोड़ थी। इनमें 51 करोड़ पुरुष और 53 करोड़ महिलाएं थीं। अनुमान है कि इस वक्त भारत में 125 से 150 करोड़ बुजुर्ग नागरिक होंगे। इनकी देखभाल के लिए सरकारी स्तर और स्वंय सेवी संगठनों की तरफ से तमाम योजनाएं चलाई जाती हैं, जिसकी अमूमन बुजुर्गों को जानकारी भी नहीं होती है। आज हम आपको ऐसी ही कुछ योजनाओं के बारे में भी बताएंगे।

1988 में हुई थी इस दिवस की शुरूआत

अंतरराष्ट्रीय वृद्ध नागरिक दिवस प्रत्येक वर्ष एक अक्टूबर को मनाया जाता है। इसकी घोषणा संयुक्त राष्ट्र संगठन (UNO) द्वारा 14 दिसंबर 1990 को की गई थी। अंतरराष्ट्रीय वृद्ध नागरिक दिवस पहली बार एक अक्टूबर 1991 को मनाया गया था। हालांकि, इसका इतिहास 1988 से शुरू हुआ है। आधिकारिक तौर पर इसकी शुरूआत संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा की गई थी। ये दिवस बुजुर्गों को प्रभावित करने वाले कारकों और उनके मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इसमें बढ़ती आयु के साथ सेहत में होने वाली गिरावट और घर में उनके साथ होने वाला दुर्व्यवहार भी शामिल है।

बुजुर्गों का रखें खास ख्याल

समाजशास्त्री प्रोफेसर डा. आरके सिंह के अनुसार एक उम्र के बाद हमारे माता-पिता या दादा-दादी या घर के अन्य बुजुर्ग सदस्य को एक खास तरह के केयर की जरूरत होती है। ऐसा न होने पर बुजुर्ग खुद को घर में उपेक्षित महसूस करने लगते हैं। तनहाई उनका सबसे बड़ा दुश्मन है, जब मन में कई तरह की आशंकाएं घर करने लगती हैं और धीरे-धीरे ये अवस्था मानसिक बीमारी का रूप ले लेती है। शरीर कमजोर होने पर बीमारियां हावी होने लगती हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि हम बुजुर्गों को ये ऐहसास कराएं कि वह हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुभवों की हमें कितनी जरूरत है। इसके लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं...

एक साथ भोजन करना- घर में या घर से बाहर एक साथ भोजन करना हमेशा एक बेहतरीन अनुभव होता है। अवकाश में या किसी स्पेशल डे पर आप बुजुर्गों की पसंद का ख्याल रखते हुए उनकी और बच्चों की मदद से कुछ खास पका सकते हैं। इससे बुजुर्ग शारीरिक व मानसिक रूप से एक्टिव भी रहेंगे और उन्हें कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होगा।

यादों का झरोखा- आप किसी खास दिन पर घर के बुजुर्ग सदस्य को यादों का झरोखा उपहार के तौर पर भी दे सकते हैं। उनकी कुछ पुरानी और यादगार तस्वीरों के साथ तैयार किया गया खास फोटो एल्बम एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

सरप्राइज पार्टी या पिकनिक- सरप्राइज पार्टी या पिकनिक हर किसी को पसंद आती है। बुजुर्ग ही नहीं ये घर के हर सदस्य को आपस में जोड़े रखने का सबसे कारगर उपाय है। अच्छे मौसम या किसी विशेष दिन पर ऐसी सरप्राइज पार्टी बुजुर्गों को ही नहीं आपके बच्चों को भी तरोताजा कर देगी।

साथ में समय बिताएं- स्मार्ट टीवी, स्मार्ट फोन, लैपटॉप और देश-दुनिया के ज्ञान ने हमें इतना समझदार या कहें व्यस्त बना दिया है कि हम अपने बुजुर्गों की छोटी-छोटी समस्याओं को समझ ही नहीं पाते या उनकी तरफ हमारा ध्यान ही नहीं जाता। ऐसे में बेहतर होगा कि नियमित तौर पर थोड़ा समय निकालकर बुजुर्गों के साथ समय बिताएं। उनसे महत्वपूर्ण मसलों पर राय लें। उनकी समस्याओं जैसे तबियत आदि के बारे में बात करें।

इनडोर गेम- छुट्टी वाले दिन कुछ देर के लिए बुजुर्गों के साथ उनकी पसंद के इनडोर गेम खेलने का वक्त निकालें। इसमें पूरे परिवार को या कम से कम बच्चों को भी जरूर शामिल करें। फिर देखें, कैसे खेल में आने वाली छोटी-छोटी चुनौतियां सबके चेहरे पर खुशियां बिखेर देती हैं। इससे बुजुर्गों को मानसिक तौर पर स्वस्थ रखने में भी मदद मिलती है।

टहलना या बागबानी- बुजुर्गों को शारीरिक व मानसिक तौर पर स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि उन्हें एक्टिव रखा जाए। ऐसे में उनके लिए सुबह-शाम की सैर और बागबानी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। अगर आप भी कभी-कभी उनके साथ टहलने या बागबानी का वक्त निकालें तो ये आपके स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर होगा। इससे बुजुर्गों को अकेलापन या उपेक्षित महसूस नहीं होगा।

दोस्तों से कराएं दोस्ती- अक्सर ऐसा होता है कि घर में बेटे-बहु या बच्चों के दोस्त आने पर बुजुर्ग किसी दूसरे कमरे में चले जाते हैं। जब तक वह दोस्त या मेहमान रहता है, बुजुर्ग उसी कमरे में रहते हैं। दरअसल इस उम्र में उनके लिए किसी नए व्यक्ति के साथ घुलना-मिलना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आप उनकी मदद करें और अपने दोस्तों से भी उनकी दोस्ती कराएं। खुद भी उनके साथ हंसी-मजाक और मित्रता का व्यवहार रखें।

तकलीफों का टाले नहीं- बुजुर्ग अवस्था में शारीरिक अस्वस्थता बहुत आम बात है। कई तरह की छोटी-मोटी तकलीफें लगी रहती हैं। ये उम्र का असर हो सकता है, लेकिन ऐसा समझकर उन्हें टालना या नजरअंदाज करना सही नहीं है। ऐसे में बुजुर्ग अपनी तकलीफों को छिपाने लगते हैं। अगर उनकी बीमारी उम्र की वजह से है तो भी उन्हें सकारात्मक तरीके से बिना झुंझलाए समझाएं और जरूरत लगे तो डॉक्टर से परामर्श लें।

सीनियर सिटीजन क्लब- शहरों में सीनियर सिटीजन के लिए कई तरह के क्लब भी होते हैं। हो सकता है आप जिस सोसायटी में रह रहे हैं, उसके आसपास भी ऐसा कोई क्लब हो। जिस दौरान आप ऑफिस गए हैं और बच्चे स्कूल में हैं। सीनियर सिटीजन घर पर अकेले रहने की जगह इन क्लब में जाकर तरह-तरह की एक्टिविटी के जरिए खुद को व्यस्त और स्वस्थ रख सकते हैं। मेट्रो सिटी में इस तरह के क्लब का कल्चर तेजी से बढ़ रहा है। इस तरह के क्लब बुजुर्गों को घर के बाहर भी उनकी अहमियत प्रदान करते हैं। इसमें सोसायटी से जुड़े सामाजिक कार्य भी शामिल होते हैं। इससे रिटायरमेंट के बाद भी बुजुर्गों को एक पहचान मिलती है।

क्रिमिनल के सॉफ्ट टारगेट होते हैं बुजुर्ग

हाल के एक अध्ययन में पता चला है कि देश में 65 फीसद की आयु से ज्यादा के 29 प्रतिशत लोग अकेले रहते हैं। मतलब इनके बच्चे या तो विदेश में रहते हैं या नौकरी की वजह से दूसरे शहरों में रह रहे हैं। इनमें से बहुत से बुजुर्ग ऐसे भी हैं, जिनके आगे-पीछे कोई सगा संबंधी नहीं है। ऐसे में ये बुजुर्ग घर में अकेले रहने के दौरान या अकेले बाहर निकलते वक्त अपराधियों के लिए सॉफ्ट टारगेट (आसान शिकार) होते हैं। बुजुर्गों के साथ तेजी से बढ़ रहे अपराध के मामलों ने भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों को चिंता में डाल दिया है। यही वजह है कि इनकी समाजिक और अपराधियों से सुरक्षा के लिए सरकारी स्तर पर कई तरह के प्रयास किये जाते हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों में बुजुर्गों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। आइये जानते हैं दिल्ली पुलिस द्वारा सुझाए गए बुजुर्गों की सुरक्षा के कुछ खास उपाय...

मैजिक आई- घर के दरवाजे में मैजिक आई लगवाएं, ताकि बाहर कौन घंटी बजा रहा या गेट खटखटा रहा, उसे बंद दरवाजे के पीछे से ही देखा जा सके। कैमरा डिस्प्ले वाले डोर बेल भी बेहतरीन विकल्प हैं।

डोर सेफ्टी चेन - बदमाश अक्सर पार्शल, बिल या कुरियर आदि देने के बहाने दरवाजा खुलवाते हैं और फिर अंदर घुसकर हमला कर देते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए डोर सेफ्टी चेन कारगर उपाय है। इससे दरवाजा थोड़ा सा ही खुलता है।

हाऊस अलार्म- घर के अंदर लगने वाला ये अलार्म किसी आपात स्थिति में आसपास के लोगों को अलर्ट करने और बदमाश को डराने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे एक बटन दबाकर एक्टिव किया जा सकता है। अमूमन बाहर से आने वाले बदमाश को इसकी जानकारी नहीं होगी। ऐसे में अगर वह घर में घुस भी जाता है तब भी आप भागकर उस बटन को दबाकर मदद मांग सकते हैं।

सीसीटीवी- घर पर लगा सीसीटीवी कैमरा भी एक कारगर उपाय हो सकता है। सीसीटीवी कैमरा लगा होने पर बदमाश ऐसे घर को निशाना बनाने से बचते हैं। किसी वारदात के बाद सीसीटीवी कैमरे की मदद से पुलिस को जांच करने में भी आसानी होती है।

लोहे की मजबूत ग्रिल- जिस घर में बुजुर्ग ज्यादातर समय या अमूमन अकेले रहते हैं, उसकी खिड़कियों व दरवाजों की मजबूती सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए खिड़की व दरवाजे पर लोहे की मजबूत ग्रिल लगाई जा सकती है।

बिना सत्यापन घरेलू सहायक रखना- बिना सत्यापन घरेलू सहायक को रखना किसी के लिए भी बड़ा खतरा हो सकता है। अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए ये सबसे बड़ा खतरा होता है। अक्सर घरेलू सहायक के तौर पर बदमाश घर में एंट्री करते हैं और वारदात करने के मौके की तलाश में रहते हैं। घरेलू सहायक के साथ उसके परिचित को घर में बिल्कुल प्रवेश करने न दें। घरेलू सहायक के सामने धन-दौलत की बात न करें और न ही उनका प्रदर्शन करें।

अपरिचित को प्रवेश न दें- किसी भी अपरिचित को घर में प्रवेश न दें, चाहे वह कोई भी बहाना बनाए। अगर कोई खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर घर में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा है तो उसे भी आप रोक सकते हैं। संदेह होने पर आप सोसायटी के गार्ड, किसी पड़ोसी या पुलिस को भी बुला सकते हैं।

रिश्तेदार से भी रहें सतर्क- घर में अकेले रह रहे बुजुर्गों को अचानक किसी दूर के रिश्तेदार या परिचित के आने पर भी सतर्क हो जाना चाहिए। हो सकता है कि वह किसी गलत मंशा से आए हों।

बुजुर्गों के लिए दिल्ली की योजनाएं

-सीनियर सिटीजन हेल्प लाइन - 1291

- 2000 से 2500 रुपये प्रतिमाह पेंशन

- देश के 10 तीर्थ स्थलों की मुफ्त यात्रा

- दो वृद्धाश्रम का संचालन, जल्द 10 नए खुलेंगे

- 108 मनोरंजन केंद्रों को वित्तीय मदद

- 32 नए मनोरंजन केंद्र खोलने की योजना

- 10 मेंटिनेंस ट्रिब्यूनल और 10 अपीलेंट ट्रिब्यूनल का गठन

- दिल्ली की तर्ज पर अन्य राज्यों में भी वृद्धों के लिए पेंशन योजना समेत कई स्कीम चलाई जा रही हैं।

- यूपी सरकार ने घोषणा की है कि अकेले रहने वाले बुजुर्गों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर खाना मिलेगा।

Posted By: Amit Singh

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