कानपुर, जासं। छात्र अंतरिक्ष अनुसंधान में अपना बेहतर भविष्य तलाश सकते हैं। सफलता इस पर निर्भर करती है कि आप कैसा सोचते हैं? उसे पूरा करने के लिए कैसा व्यवहार करते हैं और अपने पर कितना विश्वास करते हैं? उत्सुकता को जन्म दीजिए। काम करने का जुनून पैदा कीजिए बस कुछ न कुछ लाभकारी नया होकर रहेगा। यह बात आइआइटी कानपुर के 46 वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि इसरो के चेयरमैन डॉ. के राधाकृष्णन ने कही।

उन्होंने कहा कि इसरो नासा की जेट प्रोपल्सन लेबोरेटरी के साथ मिल कर 2019-20 तक एक माइक्रोवेब इमेंजिंग सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है। 2014-17 के बीच दस कम्युनिकेशन सेटेलाइट छोड़े जाने हैं। भारत में 13 भू अध्ययन सेटेलाइट हैं जो भूमि, अंतरिक्ष व जल स्त्रोतों के बारे में जानकारियां दे रहे हैं। इसरो 2015 तक सात सेटेलाइट [सितारा समूह] बनाने की तैयारी कर रहा है जिसमें इंडियन रीजनल नेवीगेशन सेटेलाइट [आइआरएनएसएस] विकसित करेगा। इनसे भारत व उससे 1500 किलोमीटर दूरी तक भूमि, पर्यावरण व जल उपलब्धता की जानकारियां प्राप्त की जा सकेगी।

समारोह के मुख्य अतिथि भौतिक शास्त्र में नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. जोहांनेस जॉर्ज बेडनार्ज ने छात्रों से कहा कि वे देश-विदेश कहीं भी रहें अपने व्यवसाय में लीडरशिप प्राप्त करें और मानवीय रिश्तों के नए मानक तैयार करें। उन्होंने गांधी जी का उदाहरण देते हुए कहा कि परिवर्तन का कारण बनो, वह करो जो दुनिया में देखना चाहते हो। देश की सामाजिक, सांस्कृतिक चुनौतियों को हल करने का रास्ता निकालो। अपने प्रयासों से असंभव शब्द निकाल फेंको।

वही पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने छात्रों को सफलता के तीन सूत्र बताते हुए कहा कि उत्कृष्टता प्राप्त करो, पैसे के पीछे मत भागो और अपने विषय में दक्ष बनो। दीक्षांत समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री, अरुण शौरी तथा कंप्यूटर क्रांति के जनक प्रो. वी. राजारमन को मानद उपाधि प्रदान की गई।

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