नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को मुंबई में दो भारतीय वारशिप - आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस 'सूरत' का शुभारंभ किया। मझगांव डाक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने इन दोनों ही वारशिप का निर्माण किया है। प्रोजेक्ट 15B डेस्ट्रायर्स ( Destroyers) का चौथा जहाज 'सूरत' है। गुजरात की राजधानी सूरत के नाम पर इसका नाम पड़ा है। मुंबई के बाद सूरत पश्चिम भारत का दूसरा सबसे बड़ा कमर्शियल हब है। वहीं उदयगिरि प्रोजेक्ट 17 A फ्रिगेट्स (Frigates) का तीसरा जहाज है। आंध्र प्रदेश के पहाड़ की श्रृंखला के नाम पर इसका नाम दिया गया है।

7400 टन के वजन वाला है 'सूरत वारशिप'

आज लान्च किए गए सूरत वारशिप का वजन 7400 टन है। इसकी लंबाई 163 मीटर है। आईएनएस सूरत की स्पीड 56 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसमें रडार को चकमा देने की प्रणाली है। इस वारशिप को ब्लाक निर्माण पद्धति का उपयोग करके बनाया गया है। इसमें दो अलग-अलग भौगोलिक स्थानों पर पतवार निर्माण शामिल है और एमडीएल, मुंबई में एक साथ जुड़ गया है। इस श्रेणी के पहले जहाज को 2021 में कमीशन किया गया था। दूसरे और तीसरे जहाजों को लान्च किया गया है और वे आउटफिटिंग / परीक्षण के विभिन्न चरणों में हैं।

उदयगिरि वारशिप

भारत में ही निर्मित उदयगिरि वारशिप आधुनिक सुविधाओं और उन्नत हथियारों से लैस है। यह उन्नत हथियार, सेंसर और प्लेटफार्म मैनेजमेंट सिस्टम से सुसज्जित है। INS उदयगिरि सीरीज के युद्धपोत कई दशकों के लिए नौसेना के लिए काम कर रहे हैं। 'उदयगिरि' पूर्ववर्ती 'उदयगिरि', लिएंडर क्लास एएसडब्ल्यू फ्रिगेट का एडवांस वर्जन है। 18 फरवरी 1976 से 24 अगस्त 2007 तक इसने तीन दशकों में देश के लिए अपनी शानदार सेवा में कई चुनौतीपूर्ण आपरेशन का सामना किया। P17A कार्यक्रम के तहत, एमडीएल में 04 और जीआरएसई में 03 के साथ कुल सात जहाज निर्माणाधीन हैं।

फ्रिगेट व डेस्ट्रायर में ये है फर्क

फ्रि‍गेट और डेस्ट्रायर दोनों ही वारशिप हैं। इनके आकार व क्षमता में अंतर होता है। फ्रि‍गेट के मुकाबले डेस्ट्रायर करीब डेढ़ गुना बड़ा होता है। फ्रि‍गेट किसी एक तरह भूमिका में फिट होता है। वहीं डेस्ट्रायर अनेक भूमिकाओं को निभाने की क्षमता रखता है। इसे एंटी सबमरीन, एंटी शिप या फिर एंटी एयरक्राफ्ट के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं और यह सभी में उतनी ही सटीकता से अपना रोल निभाता है।

Edited By: Monika Minal