भारतीय नौसेना के नए 'आईएनएस समर्थक' पोत के सामने नहीं टिकेंगे दुश्मन, बेड़े में हुआ शामिल
भारतीय नौसेना में 'आईएनएस समर्थक' युद्धपोत शामिल हो गया है, जिससे नौसेना की ताकत में इजाफा हुआ है। यह बहुउद्देशीय ...और पढ़ें

आईएनएस समर्थक की तस्वीर (फाइल)
HighLights
'आईएनएस समर्थक' भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल।
यह बहुउद्देशीय पोत आधुनिक सुविधाओं से लैस है।
'मेक इन इंडिया' के तहत लार्सन एंड टुब्रो ने बनाया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की नौसेना की ताकत अब और बढ़ गई है। मौका था 'आईएनएस समर्थक' (INS Samarthak) युद्ध पोत के नौसेना में शामिल होना का। कर्नाटक के कारवार नौसेनिक अड्डे पर आईएनएस समर्थक को सेना के बेड़े में शामिल किया गया। शुक्रवार को नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने इसे नौसेना में शामिल किया।
देश की सेना अब ज्यादा ताकत के साथ दुश्मन पर पलटवार करने की स्थिति में है, क्योंकि आईएनएस समर्थक एक बहुउद्देशीय पोत है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस
समर्थक का मतलब होता है सहयोग करने वाला। इस पोत के नाम से ही आप समझ सकते हैं कि ये सेना के हौसले बढ़ाने वाला है। जिस तरह से इसे डिजाइन किया गया है वो उसे एक शानदार युद्ध पोत की सारी खूबियों से लैस करता है। नौसेना भविष्य में किसी भी मोर्चे पर पीछे ना रहे इसलिए इसे सारी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है।
क्या क्या है इसकी खासियत
- मानवीय सहायता
- समुद्र की निगरानी
- आपदा के मौके पर मदद के लिए तत्पर
- पर्यावरण संरक्षण में सहयोग
तोपखाने और ड्रोन लॉन्च करने की सुविधा
इस पोत पर तोपखाने और ड्रोन को लॉन्च करने की भी सुविधा है। गश्त के वक्त इससे समुद्र की सतह के नीचे से सामान निकालने और जरूरत पड़ने पर अस्पताल जैसी सुविधा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा ये दूसरे खराब हुए जहाज को खींच कर किनारे लाने में भी उपयोगी है। इसकी सबसे यूनिक सुविधा की बात करें तो ये मदरशिप के तौर पर भी काम करेगा यानी जरूरत के वक्त ये एक ही कमांड में कई सारे एक्शन लेने के लिए तैयार होगा जिससे दुश्मन पश्त हो जाएगा।
मेक इन इंडिया की पहल
ये पोत भारत के मेक इन इंडिया की कड़ी को और मजबूत करता है। इसे बनाने वाली कंपनी लार्सन एंड टुब्रो है। ये 106 मीटर लंबा और 16.8 मीटर चौड़ा है। इसकी अधिकतम स्पीट 15 नॉट (27 किमी प्रति घंटा) है। ये 'समर्थक' श्रेणी का पहला पोत है। इसी श्रेणी में दूसरा जहाज 'उत्कर्ष' अभी परीक्षण के दौर से गुजर रहा है। इसमें करीब 75 फीसदी से ज्यादा भारतीय कलपुर्जे का इस्तेमाल हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए 887 करोड़ रुपये के अनुबंध किया है।
