नई दिल्ली। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की पत्नी और पुत्री से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने से पीएमओ के इंकार का मामला शुक्रवार को राज्यसभा में उठा। सदन में तृणमूल कांग्रेस के सदस्य ने जानना चाहा कि इन्हें सार्वजनिक करने पर किस तरह का खतरा है।

तृणमूल के कुणाल घोष ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सूचना के अधिकार कानून के तहत नेताजी की पत्नी और पुत्री से संबंधित तीन फाइलों के बारे में जानकारी मांगी गई थी। इस पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह कहते हुए इन्हें सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया है कि इससे देश की संप्रभुता और दूसरे देशों के साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है। घोष ने कहा कि क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन को यह बताएंगे कि इन फाइलों के सार्वजनिक होने से देश की संप्रभुता और दूसरे देशों से संबंध पर कैसे असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने इससे पहले केंद्रीय सूचना आयोग को बताया कि इन तीन फाइलों सहित उसके पास नेताजी से जुड़ीं 33 गोपनीय फाइलें हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के लिए एक स्पष्ट नीति तैयार करनी चाहिए। हमारे पास अब तक नेताजी के आखिरी दिनों के बाबत जानकारी नहीं है।

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