नई दिल्ली [जागरण स्‍पेशल]। शनिवार रात को ज्वालामुखी फटने से इंडोनेशिया में आई सुनामी ने भारी तबाही मचाई है। यह सुनामी क्रैकाटोआ की संतान कहे जाने वाले एक ज्वालामुखी में विस्फोट के कारण आई। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस द्वीप का निर्माण क्रैकटो ज्‍वालामुखी के लावा से हुआ है। इस ज्‍वालामुखी में आखिरी बार अक्‍टूबर में विस्‍फोट हुआ था। प्रशांत महासागर में स्थित रिंग ऑफ फायर का हिस्सा इंडोनेशिया इससे पहले भी कई बार भूकंप और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से दो चार हो चुका है।

क्या है सुनामी
समुद्र के भीतर अचानक जब बड़ी तेज हलचल (भूकंप या ज्वालामुखीय गतिविधि) होने लगती है तो उसमें उफान उठता है। इससे ऐसी लंबी और बहुत ऊंची लहरें उठना शुरू होती हैं, जो जबरदस्त आवेग के साथ आगे बढ़ती हैं। इन्हीं लहरों को सूनामी कहते हैं।

तबाही की वजह
इंडोनेशिया अति सक्रिय भूकंप क्षेत्र में है। यही कारण है कि यहां पर इतने ज्यादा भूकंप आते हैं। यह प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है। रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर के बेसिन का इलाका है, जहां पर कई ज्वालामुखी फटते रहते हैं और तगड़े भूकंप के झटके आते हैं। भूकंप के चलते ही इसके आस-पास के समुद्रों में सुनामी की लहरें उठती हैं। यह रिंग ऑफ फायर का इलाका करीब 40 हजार किमी के दायरे में फैला है। यहां पर विश्व के कुल सक्रिय ज्वालामुखियों के 75 फीसद ज्वालामुखी हैं।

सितंबर में भूकंप और तूफान से 832 लोगों की मौत
तीन महीने पहले सितंबर में इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप स्थित पालु और दोंगला शहर में भूकंप के बाद सुनामी आने से 832 लोगों की मौत हो गई थी। हजारों लोग घायल भी हुए थे। कुल 6 लाख की आबादी वाले इन दोनों शहरों में आपदा के तीन महीने बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।

26 दिसंबर, 2004: उत्तरी सुमात्रा में आचेह प्रांत के पश्चिमी तट पर 9.1 तीव्रता का भूकंप आया था। समुद्र में उठी विनाशकारी लहरों से उपजी सुनामी ने 14 देशों को लपेटे में लिया। इस प्राकृतिक आपदा में 2.26 लाख लोग मारे गए थे। इनमें आधे से ज्यादा आचेह प्रांत के थे।

2005: मार्च के अंत में और अप्रैल की शुरुआत में, तेज तीव्रता वाले भूकंपों की एक शृंखला ने सुमात्रा के पश्चिमी तट को हिला कर रख दिया था। इसके कारण नियास द्वीप में सैकड़ों लोग मारे गए थे।

2006: इंडोनेशिया के सबसे अधिक आबादी वाले द्वीप जावा के दक्षिणी तट पर 6.8 तीव्रता के भूकंप से आई सूनामी के कारण पूरा तट तबाह हो हो गया था। इसमें लगभग 700 लोग मारे गए थे।

2009: पश्चिम सुमात्रा प्रांत में पदंग शहर के पास आए 7.6 तीव्रता के भूकंप में 1,100 से अधिक लोग मारे गए थे।

2010: पश्चिमी सुमात्रा के मेंटावाई द्वीप पर आए 7.5 तीव्रता के भूकंप से आई सुनामी में 300 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों गांवों को तबाह कर दिया था।

2018: इंडोनेशिया के पर्यटक द्वीप लोंबोक में आए भीषण भूकंप ने पूरा द्वीप को तबाह कर दिया था। इसमें 500 से अधिक लोग मारे गए।

28, सितंबर, 2018: पालू शहर में तेज भूकंप के बाद आई सुनामी में 2000 लोगों की जान चली गई थी।

समुद्र से निकला ज्वालामुखी द्वीप
अनक क्रैकाटोआ एक छोटा ज्वालामुखी द्वीप है। जिसका अर्थ चाइल्ड ऑफ क्रैकाटोआ होता है। 1883 में एक प्रलयकारी प्राकृतिक आपदा के बाद यह द्वीप अस्तिव में आया था, तब तीन ज्वालामुखी वाले एक बड़े द्वीप पर विस्फोट होने शुरू हुए थे। इसके कारण समुद्र में विशाल लहरें उठी थीं। इस त्रासदी में 36,000 लोग मारे गए थे। 26 से 27 अगस्त, 1883 के बीच लगातार हुए ज्वालामुखियों के विस्फोट इतने भयानक थे कि द्वीप से 3,600 किमी दूर ऑस्ट्रेलिया के एलिस स्प्रिंग्स में इसकी ध्वनि सुनाई दी थी।

1927 में पहली बार एक मछुआरे ने देखा कि समुद्र के ऊपर जमीन का एक हिस्सा बाहर दिखाई दे रहा है। बाद में नया द्वीप पानी की सतह पर उभर आया। 3 मील चौड़ा और 5.5 मील लंबा यह द्वीप जावा और सुमात्रा के बीच सुंडा जलसंधि में स्थित है। अनक क्रैकाटोआ इंडोनेशियाई द्वीप आर्क का हिस्सा है। इसमें 2009, 2010, 2011, 2012, 2014 में छोटेछोटे विस्फोट हो चुके हैं। इंडो-ऑस्ट्रेलियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच घर्षण से यहां ज्वालामुखीय गतिविधियां ज्यादा होती हैं।

इंडोनेशिया में सबसे अधिक भूकंप और सुनामी
बता दें कि रिंग ऑफ फायर में स्थित होने के कारण इंडोनेशिया में दुनिया में सबसे अधिक भूकंप और सुनामी आते हैं। इसी साल जुलाई में इंडोनेशिया में एक हफ्ते के अंतराल में दो भूकंप के झटके आए थे। लोम्बोक में 7 और बाली में 6.4 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था। इनमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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