नई दिल्‍ली [ जागरण स्‍पेशल ]। 13 वर्षों बाद एक फ‍िर भारत-अमेरिका संबंधों में तल्‍खी देखने को मिल रही है। अमेरिकी दबाव के बीच भारत ने जिस तरह से अपनी सामरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम डील की है उस पर अमेरिका ने नाराजगी जाहिर की है। इतना ही नहीं अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद भारत ने तेल की आपूर्ति के लिए ईरान से बातचीत जारी रखी है, इसे लेकर भी अमेरिका की निगाहें भारत पर टिकी हैं। आइए जानते हैं भारत-अमेरिका संबंधों का एक संक्षिप्‍त लेखा-जोखा, साथ ही उन अहम पड़ावों के बारे में जब दोनों देशों के संबंध बेहद तल्‍ख हुए।  

भारत-अमेरिका संबंध: अविश्‍वास से तल्‍खी तक

अविश्‍वास पूर्ण रहे रिश्‍ते

आजादी के बाद से शीत युद्ध के दौर में दोनों देशों के बीच रिश्‍ते अविश्‍वास पूर्ण रहे। हालांकि, इस दौरान भारत ने साफ कर दिया था कि वह श्‍ाीत युद्ध में किसी गुट का हिस्‍सा नहीं रहेगा। वह तटस्‍थ देश रहेगा। लेकिन जरूरतों के लिहाज से रूस (तत्‍कालीन सोवियत संघ) के साथ निकटता को अमेरिका ने शक के नजरिए से देखा। ऐसे स्थिति में दोनों देशों के रिश्‍ते कभी मधुर नहीं बन सके। हालांकि, इस दौरान दोनों देशाें के बीच संवाद जारी रहा। दोनों देशों के बीच राष्‍ट्रध्‍यक्षों का आना-जाना भी जारी रहा। 1954 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति आईजन हॉवर ने पाकिस्तान को भारी सैनिक सहायता देने की घोषणा की थी, इससे दोनों देशों के बीच रिश्‍ते तल्‍ख हुए। 1971 में भारत-पाकिस्तान के तीसरे युद्ध के दौरान अमरीका ने चीन के साथ निकटता के संदर्भ में मध्यस्थ की भूमिका निभाई और पाकिस्तान को सहयोग किया। इससे दोनों देशों के बीच अविश्‍वास की खाई और भी गहरी हुई। इस तरह से शीत युद्ध के दौरान अमेरिका का पाकिस्‍तान के प्रति उदार नजरिया और निकटता ने दोनों देशों के बीच दूरियां बनाईं।

1974 के परमाणु कार्यक्रम से तल्‍ख हुए रिश्‍ते

अमेरिकी इच्‍छा के विपरीत 1974 में भारत के परमाणु परीक्षण की रेस में शामिल होने से दोनों देशों के बीच रिश्‍ते तल्‍ख हुए। दोनों देशों के बीच अविश्‍वास का चरण समाप्‍त हुआ और तल्‍ख रिश्‍तों का दौर शुरू हुआ। पूरे दो दशक तक दोनों देशों के बीच खिंचावपूर्ण संबंध रहे। परीक्षण के बाद अमेरिका ने भारत से सभी तरह का परमाणु सहयोग खत्म किया। भारत ने सोवियत संघ के साथ 20 साल के लिए दोस्ती और सहयोग संधि पर दस्तखत किए। इसके बाद यह रिश्‍ते और तल्‍ख हो गए। चार वर्षों तक दोनों देशाें के बड़े नेताओं ने एक दूसरे के यहां जाने से कतराते रहे। भारत में उस वक्‍त इंदिरा गांधी की सरकार थी। 1977 में देश में आम चुनाव के बाद केंद्र की सत्‍ता में बदलाव आया।

देश में इंदिरा गांधी की जगह मोरार जी देसाई की सरकार बनी। थी। देश के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई 1978 में अमेरिका की यात्रा पर गए। इस वर्ष अमेरिका के राष्‍ट्रपति जिमी कार्टर की भारत यात्रा हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई से मुलाकात हुई। कार्टर ने भारतीय संसद को संबोधित भी किया। कार्टर ने परमाणु अप्रसार अधिनियम खड़ा किया और भारत सहित तमाम देशों के परमाणु संयंत्रों के परीक्षण की मांग की। यह वह दौर था, जब भारत-अमेरिका के संबंधों में जमी बर्फ को थोड़ी गरमाहट मिली।

1998 में परमाणु परीक्षणों के बाद पटरी से उतरे रिश्‍ते

भारत ने 1998 में परमाणु परीक्षण किया। उस वक्‍त केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। इस परीक्षण के बाद अमेरिका ने भारत पर आर्थिक प्रतिंबध लगाए थे। भारत के लिए यह कठिन समय था। भारत ने पूरे चार वर्ष अमेरिकी प्रतिबंधों को झेला। 2001 में बुश प्रशासन ने आर्थिक प्रतिबंध हटाए। 1999 में करगिल युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्‍ट्रपति क्लिंटन के हस्‍तक्षेप के बाद पाकिस्‍तान ने नियंत्रण रेखा से अपनी सेनाएं पीछे हटाईं।

2005 पटरी पर लौटा भारत-अमेरिका संबंध

दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पर करार

2005 में भारत-अमेरिका के बीच एक नए युग की शुरुआत हुई। दोनों देशों के बीच तल्‍ख पड़े रिश्‍तों में गर्माहट आई। दुनिया में शीत युद्ध का दौर समाप्‍त हो चुका था और भारत एक नए बाजार के रूप में उभर रहा था। तेजी से बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था के बीच दुनिया भारत में असीम संभावनाएं देख रही थी। 1991 में आर्थिक उदारीकरण के चलते अमरीका के साथ कारोबारी रिश्तों में बहुत तेजी से सुधार हुआ। 2005 में अमरीका की तत्‍का‍लीन विदेश मंत्री कॉन्डोलीजा राइस भारत के दौरे पर आईं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पर समझौता हुआ। इसी साल दोनों देशों की सेनाओं का पहली बार संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास हुआ। इसी साल दोनों देशों ने दस वर्षों के लिए नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर दस्तखत किए। इसी के साथ अमरीका ने 30 वर्षों के लिए भारत से परमाणु कारोबार पर लगे स्थगन को हटा लिया। बदले में भारत ने अपने नागरिक और सैन्य परमाणु संयंत्रों को अलग रखने और सभी नागरिक संयंत्रों को आईएईए की देखरेख में लाने को मंजूरी दी। 2008 में मुंबई हमलों के दौरान अमरीका ने एफबीआई जांचकर्ताओं को भारत भेजा।

सुरक्षा परिषद में भारत की दोवदारी का समर्थन किया

दोनों देशों के बीच निकटता का दौर जारी रहा। 2010 में पहली बार इंडिया-यूएस स्ट्रैटेजिक डायलॉग की नींव पड़ी। अमेरिका ने पहली बार सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का पुरजोर समर्थन किया। अमेरिका के तत्‍कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने खुलकर भारत का पक्ष लिया। 2011 में भारत और अमेरीका ने साइबर सिक्योरिटी के लिए एमओयू पर दस्तखत किए, जो स्ट्रैटेजिक डायलॉग का ही हिस्सा है। 2014 में भारत में हुए आम चुनाव के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत के नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी जीत पर बधाई दी और अमरीका यात्रा का न्योता भी दिया। 

राष्‍ट्रध्‍यक्षों की प्रमुख यात्राएं

  • 1949 में अमेरिका की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे। वह अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन के मेहमान बने। इसके बाद नेहरू ने 1956, 1960, 1961 में अमेरिका की यात्राएं कीं।
  • 1959 में अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी आइजनहावर भारत का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने। भारत में उन्होंने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और प्रधानमंत्री नेहरू से मुलाकात की और संसद को संबोधित किया।
  • 1960 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सम्मेलन के दौरान नेहरू ने राष्ट्रपति आइजनहावर से मुलाकात की। नेहरू ने केनेडी को चिट्ठी लिखकर मैकमोहन रेखा को सीमा मानने का अनुरोध किया था।
  • सर्वपल्ली राधाकृष्णन जून 1963 में अमेरिका की यात्रा करने वाले भारत के पहले राष्ट्रपति बने। इसी साल अमेरिकी कृषि विशेषज्ञ नॉरमन बोरलॉग भारत आए और भारतीय वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन के साथ मुलाकात के बाद 'हरित क्रांति' के बीज पड़े।
  • 1969 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन भारत आए। वह तब कार्यवाहक राष्ट्रपति हिदायतुल्लाह से मिले। 1982 में आखिरी बार अमेरीका दौरा किया।
  • मोरार जी देसाई 1978 में अमेरिका यात्रा की। इसी साल राष्ट्रपति जिमी कार्टर भारत यात्रा पर राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी और प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई से मिले। 
  • राजीव गांधी तीन बार अमेरिकी दौरे पर गए। 1985 में वह दो बार और फिर 1987 में एक बार अमेरिका की यात्रा पर गए। राजीव गांधी ने 1985 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन से मुलाकात की। पीवी नरसिम्ह राव ने 1994 में अमेरिका का दौरा किया।
  • अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2000 में अमेरिका गए। अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र का संबोधन किया। इसी साल राष्ट्रपति क्लिंटन भारत दौरे पर राष्ट्रपति के आर नारायणन से मिले। ऊर्जा और पर्यावरण पर द्विपक्षीय समझौता हुआ । 2001 में वाजपेयी ने अमेरिका का दौरा किया।
  • मनमोहन सिंह 2005 और 2008 में अमेरिकी दौरे पर गए। 2006 में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भारत में मिले और परमाणु समझौते पर दस्तखत किए।
  • 2010 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मुंबई आकर भारत-अमेरिकी कारोबारी सम्मेलन को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात की। 2013 में मनमोहन सिंह ने अमेरिकी कै दौरा किया।

Posted By: Ramesh Mishra