नौकरी से रक्षा और परमाणु तक, भारत-स्विटजरलैंड के बीच बड़ी डील; आपको क्या मिलेगा ?
भारत और स्विटजरलैंड ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा सहयोग और व्यापार बढ़ाने पर सहमति जताई, जिसके तहत पांच समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

भारत-स्विटजरलैंड के बीच बड़ी डील। (X- @narendramodi)
HighLights
रक्षा और परमाणु ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर भारत-स्विटजरलैंड के बीच सहमति।
दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए पांच समझौते।
युवा पेशेवरों और कुशल कामगारों के आदान-प्रदान हेतु समझौते हुए।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। स्विटजरलैंड की पहचान भारतीय जनमानस में अभी तक यश चोपड़ा की फिल्मों और स्विस बैंक में जमा कालाधन तक ही सीमित है लेकिन बहुत जल्द ही यह पहचान भारत के रक्षा साझेदार और परमाणु ऊर्जा सहयोग के लिए बन सकती है।
स्विटजरलैंड के राष्ट्रपति गाय पारमेलिन के बीच हुई बैठक के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि, “आज हमने मिलिटरी एक्सचेंज और रक्षा उत्पादन में सहयोग की नई संभावनाओं की पहचान की। नूक्लीअर एनर्जी में सहयोग को और प्रगाढ़ करने पर भी सहमति बनी।”
दोनों देशों के बीच पांच समझौते पर हस्ताक्षर
स्विटजरलैंड यूरोपीय संघ से बाहर बहुत ही कम देशों के साथ रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में काम करता है। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय कारोबारी संबंधों को प्रगाढ़ करने की भी सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच पांच समझौते पर हस्ताक्षर भी हुए हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि, “हमने स्विट्ज़रलैंड के बाजार में भारतीय निर्यात को बढ़ाने, और दोनों देशों के बीच निवेश की राह को और आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इससे भारत के कृषि, फार्मा, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पादों की स्विट्जरलैंड में निर्यात बढ़ेगी।
शांति, कूटनीति और वैश्विक संस्थाओं के सुधार के प्रति जताई प्रतिबद्धता
और साथ-साथ, भारत के बायोटेक, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, इन्श्योरेन्स, फूड प्रोसेसिंग और सस्टे-निबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हम नए स्विस इनवेस्टमेंट को आकर्षित करेंगे। इन पहलों से हम साथ मिलकर पूरे विश्व के लिए विश्वसनीय सप्लाई चेन विकसित करेंगे।” दोनों पक्षों ने शांति, कूटनीति और वैश्विक संस्थाओं के सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की जताई है।
भारत और स्विस गणराज्य के बीच युवा पेशेवरों व प्रशिक्षित कामगारों के आदान-प्रदान की सहूलियत के लिए दो समझौतों के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किये गये हैं।
प्रवास एवं गतिशीलता साझेदारी (एमएमपी) व युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान (वाइपीएस) के लिए किया गया यह समझौता दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को नियमबद्ध और समानता के सिद्धांतों पर आधारित बनाने के लिए किया गया है। एमएमपी के जरिए पांच वर्ष तक की बहु-प्रवेश वीजा का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक यात्रा पर छह महीने तक का प्रवास शामिल है।
वाईपीएस समझौता से व्यावसायिक और भाषा कौशल बढ़ाने का अवसर
वहीं वाईपीएस समझौता युवा पेशेवरों को दूसरे देश में अस्थायी रोजगार के माध्यम से अपने क्षेत्र में व्यावसायिक और भाषा कौशल बढ़ाने का अवसर देगा। इसके अंतर्गत दोनों देश एक दूसरे के यहां 300 व्यक्तियों आदान-प्रदान करेंगे। इसे बाद में बढ़ा कर 500 किया जा सकेगा।
बाद में भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच यह सहमति बनी कि एक दूसरे के यहां निवेश की राह को आसान बनाने पर सुझाव देने के लिए एक संयुक्त समिति का गठन होगा। यूक्रेन-रूस युद्ध पर भी चर्चा हुई है और स्विटजरलैंड ने भारत की तरफ से युद्ध समाप्ति के लिए की जा रही कोशिशों की तारीफ की है।
राष्ट्रपति पारमेलिन के साथ वार्ता में मोदी ने कहा भी कि, “हम लोकतांत्रिक मूल्यों, कूटनीति व वार्ता पर विश्वास रखते हैं। हम वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए साथ काम करते रहेंगे। यूक्रेन हो या पश्चिमी एशिया, भारत शांति की दिशा में किए जाने वाले हर सार्थक प्रयास का समर्थन करता रहा है।
