नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। पिछले दो सप्ताह में भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते इतने तल्ख हो चुके हैं कि सीमा पर युद्ध जैसी स्थिति बन चुकी है। आलम ये है कि दुनिया के तमाम देश पिछले कई दिनों से लगातार भारत-पाकिस्तान से युद्ध छोड़ शांति का रास्ता अपनाने की अपील कर रहे हैं। आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद सरगना अजहर मसूद को खुली छूट और पनाह देने के लिए पाक के नापाक इरादे जगजाहिर हो चुके हैं। इससे यूएन में भारत की स्थिति मजबूत हुई है। उम्मीद लगाई जा रही है कि इस बार यूएन में अजहर मसूद पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, लेकिन क्या ये इतना आसान है?

भारत-पाकिस्तान के बीच इस तनावपूर्ण स्थिति की शुरूआत हुई है 14 फरवीर 2019 को पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) में सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत से। पाकिस्तान से संचालित होने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसका बदला लेने के लिए भारत ने 26 फरवरी 2019 की तड़के साढ़े तीन बजे पाकिस्तान में घुसकर बालाकोट, चकोटी और मुजफ्फराबाद में जैश-ए-मुहम्मद के ठिकानों पर मिराज-2000 फाइटर जेट विमानों से बम बरसाए। भारत ने इस कार्रवाई के बाद स्पष्ट किया कि उसका मकसद केवल आतंकी ठिकानों को तबाह करना था, जो हिन्दुस्तान के खिलाफ और आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे। उसने पाकिस्तान पर न तो कोई हमला किया और न ही ये किसी तरह की सैन्य कार्रवाई है।

पाक ने खुद साबित कर दिया आतंकवाद से सेना का संबंध
इसके बाद मंगलवार रात ही पाकिस्तान ने एक बार फिर सीमा पर सीज फायर का उल्लंघन करते हुए भारी गोलाबारी की। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने भारत की एयर स्ट्राइक के ठीक अगले दिन (बुधवार, 27 फरवरी 2019) भारतीय सीमा में घुसकर सैन्य शिविरों को रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर बम गिराने का असफल प्रयास किया। इससे पूरी दुनिया में ये संदेश गया कि पाकिस्तान ने अपने आतंकी ठिकानों पर हुई भारत की एयर स्ट्राइक का बदला लेने के लिए सैन्य कार्रवाई की है। ये पाकिस्तान में आतंकवाद और सेना के गठजोड़ का स्पष्ट उदाहरण है, जिसका आरोप भारत हमेशा लगाता रहा है। इस बार ये सैन्य कार्रवाई कर पाकिस्तान खुद दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है।

तीन बार अजहर मसूद को बचा चुका है चीन
वैसे तो पुलवामा हमले के बाद से ही पाकिस्तान पर उसकी सरजमीं पर चल रहे आतंकवादी शिविरों पर ठोस कार्रवाई करने का दबाव बन गया था। भारत ने इसमें अहम कूटनीतिक भूमिका निभाई। इसी का नतीजा है कि अब पाक द्वारा भारत में घुसकर बम गिराने का प्रयास करने पर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने जैश-ए-मुहम्मद सरगना अजहर मसूद के खिलाफ यूएन में प्रस्ताव पेश किया है। इन देशों ने 15 सदस्यीय सुरक्षा प्रतिबंध समिति से अजहर की आंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर प्रतिबंध लगाने और संपत्तियों को जब्त करने की मांग रखी है। इससे पहले तीन बार अजहर मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के लिए यूएन में प्रस्ताव आ चुका है, लेकिन हर बार भारत के प्रस्ताव पर वीटो पावर का इस्तेमाल कर अजहर मसूद को बचा लिया।

ड्रैगन के रुख पर टिकीं दुनिया की निगाहें
इस बार अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा संयुक्ट राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अजहर मसूद के खिलाफ प्रस्ताव लाए जाने से पाकिस्तान और चीन दोनों सकते में हैं। इस बार चीन भी खुलकर पाकिस्तान का पक्ष नहीं ले रहा है। लिहाजा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार यूएन में अजहर मसूद पर नकेल कसने के लिए प्रस्ताव पास हो सकता है। अनुमान ये भी लगाया जा रहा है कि इस बार चीन मसूद को बचाने के लिए वीटो पावर का इस्तेमाल नहीं करेगा। दरअसल, अब भी मसूद पर शिंकजा कसना पूरी तरह से चीन के रुक पर ही निर्भर है। जानकार मानते हैं कि अभी भी चीन द्वारा अजहर मसूद को बचाने के लिए वीटो पावर का इस्तेमाल करने की गुंजाइश है। चीन के लिए पाकिस्तान को छोड़ना वो भी भारत के खिलाफ, इतना आसान नहीं है।

13 मार्च तक आपत्ति दर्ज कराने का समय
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद प्रतिबंध समिति ने अजहर मसूद को प्रतिबंधित करने संबंधि प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए 13 मार्च तक का समय दिया है। समिति के सामने दिए गए प्रस्ताव में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा है कि पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का मुखिया अजहर मसूद ही जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले का मास्टर माइंड है। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

चौथी बार पेश हुआ प्रस्ताव
पिछले 10 वर्षो में यूएन में यह चौथा मौका है, जब अजहर मसूद के खिलाफ प्रस्ताव पेश हुआ है। इससे पहले 2009 और 2016 में भारत ने यूएन के सेक्शन कमेटी 1267 में अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश किया था। यही आतंकी सरगना पठानकोट वायुसैनिक अड्डे पर जनवरी 2016 में हुए हमले का भी मास्टरमाइंड था। 2016 के प्रस्ताव में भारत के साथ पी3 देश थे। उस समय भी अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने साथ दिया था। 2017 में इन्हीं पी3 देशों ने यूएन में ऐसा ही प्रस्ताव पेश किया था। हर बार चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर यूएन में प्रस्ताव मंजूर नहीं होने दिया।

फ्रांस ने दिये कड़ी कार्रवाई के संकेत
फ्रांस एक मार्च को औपचारिक तौर पर एक महीने के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यपक्ष की जिम्मेदारी संभालेगा। दरअसल, पंद्रह राष्ट्रों वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता हर माह एक देश से दूसरे देश के हाथ में जाती है। एक मार्च को इसकी अध्यक्षता इक्वेटोरियल गुयाना से फ्रांस के पास चली जाएगी। फ्रांस ने इससे पहले ही संकेत दिया है कि वह अपनी अध्यक्षता के दौरान अजहर मसूद के खिलाफ और कड़े कदम उठाएगा। पुलवामा हमले के बाद से फ्रांस लगातार भारत के साथ खड़ा है।

चीन आतंकवाद पर तो साथ है, लेकिन...
आर्ब्जवर रिसर्च फाउंडेशन के प्रोफेसर हर्ष वी पंत मानते हैं कि चीन आतंकवाद के मुद्दे पर तो भारत के साथ आया है, लेकिन मसूद अजहर पर अब भी उसका रुख स्पष्ट नहीं है। फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव को चीन का समर्थन मिलेगा या नहीं, ये कहना बहुत मुश्किल है। अभी भी आशंका है कि चीन हर बार की तरह इस बार भी वीटो पावर का अड़ंगा लगा भारत की कोशिशों को धूमिल कर सकता है। एक बार यदि कोई देश ने वीटो का इस्तेमाल किया तो प्रस्ताव वहीं रुक जाएगा। इससे भारत के सभी कूटनीतिक प्रयासों को झटका लग सकता है।

Posted By: Amit Singh

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