क्लीन एनर्जी की ओर भारत की बड़ी छलांग: सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा ने संभाली बिजली की बढ़ी हुई मांग
भारत में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार से बिजली क्षेत्र का उत्सर्जन पिछले दो वर्षों में स्थिर रहा है, जबकि बिजली की मांग में 7% की वृद्धि हुई है।

स्वच्छ ऊर्जा से बिजली क्षेत्र का उत्सर्जन दो वर्षों से स्थिर रहा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार का असर अब बिजली क्षेत्र के उत्सर्जन पर दिखाई देने लगा है। देश में ऊर्जा क्षेत्र से होने वाला ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन पिछले दो वर्षों में लगभग स्थिर रहा है, जबकि इसी दौरान बिजली की मांग में करीब सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। एक नए विश्लेषण के मुताबिक, बढ़ी हुई बिजली जरूरत का बड़ा हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से पूरा हुआ है।
सेंटर फार रिसर्च आन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के विश्लेषण के अनुसार, 2026 में ऊर्जा उत्पादन से होने वाला उत्सर्जन 2024 के स्तर के आसपास बना हुआ है। इस दौरान बिजली की मांग में करीब सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन इसके अनुरूप कोयले से बिजली उत्पादन नहीं बढ़ा।
सीआरईए ने गुरुवार को जारी अपने विश्लेषण में कहा कि पिछले 50 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब बिजली उत्पादन में कोयले की खपत में लगातार दो वर्षों के दौरान बढ़ोतरी नहीं हुई। यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी अवधि में देश की बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है।
सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा ने बढ़ाया उत्पादन
सीआरईए के विश्लेषकों लारी माइलीविर्टा और अनुभा अग्रवाल के विश्लेषण के मुताबिक, 2024 की पहली छमाही से 2026 की पहली छमाही के बीच भारत में बिजली की मांग में सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस अतिरिक्त जरूरत को स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से पूरा किया गया और इस दौरान गैर-जीवाश्म ऊर्जा उत्पादन में करीब 63 टेरावाट-घंटे (टीडब्ल्यूएच) की बढ़ोतरी हुई।
इसमें सौर ऊर्जा का योगदान 44 टीडब्ल्यूएच, पवन ऊर्जा का 13 टीडब्ल्यूएच और परमाणु ऊर्जा का आठ टीडब्ल्यूएच रहा। विश्लेषण के अनुसार, 2024 की पहली छमाही से 2026 की पहली छमाही के बीच गैर-जीवाश्म ऊर्जा उत्पादन में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई।
कुल उत्सर्जन में बढ़ोतरी अब भी चिंता
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में बढ़ोतरी रुक गई है। 2026 की पहली छमाही में उत्सर्जन में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसकी प्रमुख वजह स्टील, सीमेंट और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती मांग रही।
सीआरईए ने स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को बनाए रखने के लिए बिजली ग्रिड को लगातार मजबूत करने, बिजली भंडारण की क्षमता बढ़ाने और कोयले से बिजली उत्पादन को मांग के मुताबिक अधिक लचीला बनाने की जरूरत बताई है।
जीवाश्म ईंधन में निवेश जारी
विश्लेषण में जीवाश्म ईंधन क्षेत्र में जारी बड़े पूंजी निवेश को भी चुनौती बताया गया है। इसमें नए थर्मल पावर प्लांट का निर्माण, कोयले को रसायनों में बदलने की योजनाएं और स्टील उद्योग के लिए घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन बढ़ाने के प्रयास शामिल हैं।
भारी उद्योग से होने वाला उत्सर्जन भी बड़ी चिंता बना हुआ है। भारत में स्टील और सीमेंट क्षेत्र का उत्सर्जन लगातार करीब आठ प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रहा है। 2026 की पहली छमाही में देश के कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में इन दोनों क्षेत्रों की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत रही।
