'भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक', ब्लैक सी में ऊर्जा समझौते के लिए हिंदुस्तान की मध्यस्थता की भूमिका पर यूक्रेन ने लगाई मुहर
यूक्रेन के विदेश मंत्री ने भारत के युद्धविराम प्रस्ताव को 'सबसे व्यापक' बताया है, जिसमें ऊर्जा और काला सागर क्षेत्र में हमले रोकने की बात शामिल है।

हिंदुस्तान की मध्यस्थता की भूमिका पर यूक्रेन ने लगाई मुहर। (एएनआई)
HighLights
यूक्रेन ने भारत के युद्धविराम प्रस्ताव को 'सबसे व्यापक' बताया।
प्रस्ताव में ऊर्जा और काला सागर क्षेत्र में हमले रोकने की शर्त।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भी पीएम मोदी के शांति प्रयासों को सराहा।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। लगभग साढ़े चार साल से चल रहा रूस-यूक्रेन युद्ध अब संभवत: समाप्ति की ओर जा रहा है और पूरी संभावना है कि भारत की भूमिका सबसे अहम हो। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की इस दिशा मे लगातार हो रहे प्रयास का जिक्र करने के दूसरे दिन यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रि सिबिहा ने भी भारत का जिक्र किया है।
उन्होंने कहा कि कीव के पास युद्धविराम के चार प्रस्ताव हैं। ये भारत, तुर्की, मिस्र और अमेरिका की ओर से आए हैं। इनमें भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है।
यूक्रेन विभिन्न स्वरूपों पर विचार के लिए तैयार- सिबिहा
सिबिहा ने कीव में पत्रकारों से कहा कि यूक्रेन विभिन्न स्वरूपों पर विचार के लिए तैयार है, लेकिन शर्त यह है कि युद्धविराम केवल मोर्चे पर लड़ाई तक सीमित न रहे। इसमें ऊर्जा और बंदरगाह ढाांचे पर हमले तथा काला सागर की स्थिति भी शामिल होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमारे पास चार प्रस्ताव हैं। सबसे व्यापक भारत का है। हम ऊर्जा और काला सागर युद्धविराम के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल इसी संयोजन में।”तुर्की और मिस्र के प्रस्ताव मुख्य रूप से अनाज गलियारे यानी खाद्य युद्धविराम से जुड़े हैं, जबकि अमेरिका का प्रस्ताव ऊर्जा युद्धविराम पर केंद्रित है।
भारत ने पहली बार अलग भूमिका निभाने का संकेत दिया- सिबाहा
सिबिहा के अनुसार, भारत ने पहली बार इस प्रक्रिया में अलग भूमिका निभाने का संकेत दिया है। अभी एक दिन पहले ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा है कि वह यूक्रेन-रूस युद्ध समाप्त करने की पीएम नरेंद्र मोदी की कोशिशों की तारीफ करते हैं। उन्होंने पीएम मोदी के प्रस्ताव को बढ़िया भी बताया था।
रोचक यह है कि दोनों देशों की ओर से आए बयान के बाद भी भारत अपनी पीठ थपथपाने की बजाय संभवत: युद्धविराम को ठोस आकार देने में जुटा है। यूक्रेन की तरफ से आये इस बयान से पहले पिछले करीब दो महीनों में पीएम मोदी रूसी राष्ट्रपति पुतिन से दो बार मिल चुके हैं और दोनों मौकों पर यूक्रेन युद्ध रोकने की बात उठाई।
31 अगस्त को बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी ने कहा था कि हर दिन जो युद्ध जारी रहता है, मानवता एक कदम पीछे हटती है, और अंतहीन युद्ध से युद्ध की समाप्ति की ओर बढ़ना होगा। इसके बाद सितंबर में नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई।
इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सितंबर में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा से बात की। इस मुलाकात में हाल के घटनाक्रम और शांति प्रयासों पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने भारत का यह रूख बहुत मजबूती से रखा कि संवाद और कूटनीति ही शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता है। सिबिहा ने बाद में काला सागर में नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक खाद्य सुरक्षा का भी जिक्र किया।
भारत की तरफ से युद्ध समाप्ति की नई कोशिशों की वजह यह भी है कि जिन देशों की ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा पर यूक्रेन-रूस युद्ध का सबसे व्यापक असर पड़ने की बात हो रही है, उसमें भारत प्रमुख है।
पीएम मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण हाल के हफ्तों में कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैश्विक नौवहन में आ रही दिक्कतों और ऊर्जा व उवर्रक की आपूर्ति पर पड़ने वाले असर पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर चुके हैं।
भारत उन गिने-चुने देशों में है जो युद्ध शुरू होने के बाद से लगातार यूक्रेन और रूस दोनों के साथ संपर्क में है। प्रधानमंत्री मोदी रूस की यात्रा के साथ यूक्रेन भी जा चुके हैं। वे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से कई बार मिल चुके हैं।
समाधान युद्ध के मैदान से नहीं, बातचीत से निकलेगा- पीएम मोदी
हाल ही में जून 2026 में फ्रांस के एवियान में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी मोदी और जेलेंस्की की मुलाकात हुई थी। उस मुलाकात में मोदी ने कहा था कि भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहेगा और मानवता के मूल्यों को सबसे ऊपर रखेगा। भारत का रुख शुरू से यही रहा है कि समाधान युद्ध के मैदान से नहीं, बातचीत से निकलेगा।
