नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। अग्नि-5 और समुद्र के भीतर से बी-05 के संधान की कामयाबी के बाद भारत के रक्षा वैज्ञानिक अब पहली स्वदेशी क्रूज मिसाइल के पहले परीक्षण की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। 'निर्भय' नाम की इस मिसाइल का टेस्ट फायर अगले कुछ हफ्तों में होना है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन [डीआरडीओ] के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक अगले कुछ हफ्तों में मध्यम दूरी की क्रूज मिसाइल 'निर्भय' का परीक्षण कर लिया जाएगा। इस मिसाइल का यह परीक्षण करीब 800 किमी की मारक क्षमता के साथ होगा। अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल का भारतीय जवाब मानी जाने वाली निर्भय मिसाइल ध्वनि से कम गति वाली एक सब-सोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे जल, थल और आकाश में सभी तरह के प्लेटफार्म से हर मौसम में दागा जा सकेगा। इसे तीनों सशस्त्र सेनाओं की जरूरतों के मद्देनजर तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम पर बरती जा रही गोपनीयता का ही सबूत है कि डीआरडीओ ने निर्भय की कोई तस्वीर तक जारी नहीं की है।

हालांकि डीआरडीओ सूत्र मानते हैं कि निर्भय का परीक्षण 2012 के अंत में ही कर लिया जाना था, लेकिन परीक्षण में कुछ अधिक पैमानों की जरूरत के मद्देनजर इसे आगे बढ़ा दिया गया। इस कार्यक्रम की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ रक्षा वैज्ञानिक के अनुसार डीआरडीओ की कोशिश कम से कम परीक्षणों में अधिक से अधिक आंकड़े एकत्र कर प्रक्षेपास्त्र को सैन्य उपयोग के लिए तैयार कर लेने की है। इससे धन और समय दोनों की बचत होती है। रक्षा वैज्ञानिकों के मुताबिक निर्भय में सभी मुख्य उपकरण स्वदेशी होंगे। इसमें उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके कारण यह अपनी श्रेणी की किसी भी मिसाइल से कमतर नहीं होगी।

भारत ने अब तक अग्नि, आकाश, पृथ्वी जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास में तो कामयाबी हासिल की है, लेकिन जमीन की सतह से काफी कम ऊंचाई पर चलते हुए लक्ष्य संधान करने में सक्षम क्रूज मिसाइल क्षमता का यह पहला परीक्षण होगा। क्रूज मिसाइलों की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि धरती की सतह पर काफी कम ऊंचाई पर चलने के कारण इन्हें रडार भी नहीं पकड़ पाते।

अप्रैल, 2012 में अग्नि-5 मिसाइल के कामयाब परीक्षण के बाद डीआरडीओ अब तक अग्नि-1, 3, 4 और पृथ्वी श्रेणी की मिसाइलों के आधा दर्जन से अधिक परीक्षण कर चुका है। दो दिन पहले पहली बार पनडुब्बी से नाभिकीय हमला करने में सक्षम बी-05 प्रक्षेपास्त्र का भी परीक्षण कामयाब रहा।

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