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25 साल में चौथा सबसे कमजोर मानसून: देश में 12 प्रतिशत कम बरसे बादल, कितना होगा नुकसान?

Published: Wed, 30 Sep 2026 11:14 PM (IST)

देश में इस मानसूनी सीजन में सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जो 2001 के बाद चौथी सबसे कम है।

देश में मानसूनी सीजन में 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई

देश में मानसूनी सीजन में 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक जून से 30 सितंबर के बीच के मानसूनी सीजन में होने वाली बारिश देश में धन-धान्य का पैमाना बनती है। लेकिन इस बार इस समयावधि के बीच यह बारिश पूरे देश में 12 फीसद कम हुई है।

यह आंकड़ा 2001 के बाद से मानसून सीजन में चौथा सबसे कम है। पूर्वोत्तर के राज्य बारिश के लिए सबसे अधिक तरसे हैं। अत्यधिक वर्षा के लिए प्रसिद्ध मेघालय में सामान्य से 60 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। दक्षिणी राज्यों में भी मानसून कमजोर रहा।

बिहार, झारखंड और ओडिशा में सितंबर के अंतिम दौर की बारिश से कुछ भरपाई जरूर हुई, लेकिन पूरे मानसून सीजन में वर्षा सामान्य से कम रही।

वर्षा का वितरण भी असामान्य रहा। कहीं सामान्य से अधिक तो कहीं काफी कम बारिश हुई। मौसम विभाग का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा आना अभी बाकी है।

यह 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर मानसूनी सीजन रहा

29 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून सीजन में देश में कुल 758.5 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर इस दौरान 865 मिलीमीटर वर्षा होती है। यानी सामान्य से करीब 12.3 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

क्षेत्रवार तस्वीर इससे अलग है। दक्षिण भारत में 29 सितंबर तक 539 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य वर्षा 710 मिलीमीटर है। इस क्षेत्र में कमी 24 प्रतिशत रही। इसके विपरीत मध्य भारत में 952.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 974.7 मिलीमीटर है।

स्पष्ट है कि राष्ट्रीय औसत के पीछे वर्षा का वितरण बेहद असमान रहा।पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी मानसून कमजोर रहा। मेघालय में सामान्य से 60 प्रतिशत कम बारिश हुई है। यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूर्वोत्तर देश के सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में शामिल है।

पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों में वर्षा की भारी कमी देखी गई

29 सितंबर तक 18 राज्य सामान्य वर्षा की श्रेणी में थे, जबकि 14 राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।मौसम विभाग ने अप्रैल में मानसून सीजन में दीर्घावधि औसत की करीब 94 प्रतिशत बारिश का अनुमान जताया था।

अगस्त-सितंबर में कमजोर बारिश की आशंका व्यक्त की थी। बाद में अगस्त के अंत तक स्काईमेट के आंकड़ों में जून-अगस्त की मौसमी कमी करीब 14 प्रतिशत दर्ज की गई। इस असमान बारिश का असर खेती पर पड़ेगा। जहां सामान्य बारिश हुई है, वहां खरीफ फसलों पर कम दबाव होगा।

लेकिन दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर के कम बारिश वाले क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और जलस्रोतों की स्थिति रबी की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण होगी। सीमित सिंचाई वाले इलाकों में कम मानसूनी बारिश का असर अगली फसल तक जा सकता है।