विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

UNSC: आठ बार अस्थायी सदस्य रह चुका भारत, स्थायी सीट का इंतजार कब तक?

Published: Mon, 21 Sep 2026 10:40 PM (IST)

भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और सुधारों की लंबे समय से मांग कर रहा है, क्योंकि 1945 के बाद से वैश्विक परिदृश्य काफी बदल गया है।

UNSC में स्थायी सीट का इंतजार कब तक। (रॉयटर्स)

UNSC में स्थायी सीट का इंतजार कब तक। (रॉयटर्स)


HighLights

  1. भारत UNSC में स्थायी सदस्यता और सुधारों की मांग कर रहा है।

  2. 1945 के बाद वैश्विक परिदृश्य बदला, विकासशील देशों को प्रतिनिधित्व मिले।

  3. भारत अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था, योगदान के आधार पर स्थायी सीट चाहता।

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गठन को 81 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इसके स्थायी सदस्यों की संख्या में अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका आज भी इसके पांच स्थायी सदस्य हैं और सभी के पास वीटो का अधिकार है। इनके अलावा परिषद में 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा दो वर्ष के कार्यकाल के लिए करती है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। उसका तर्क है कि 1945 के बाद दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय तस्वीर काफी बदल चुकी है। ऐसे में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका समेत विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

भारत ने सितंबर 2000 में न्यूयार्क में हुए संयुक्त राष्ट्र मिलेनियम शिखर सम्मेलन में भी स्थायी सदस्यता की अपनी दावेदारी दोहराई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि भारत खुद को स्थायी सदस्यता की जिम्मेदारियों के लिए योग्य मानता है।

भारत की दावेदारी

भारत स्थायी सदस्यता के समर्थन में अपने विशाल आकार, लोकतांत्रिक व्यवस्था, बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक भूमिका तथा संयुक्त राष्ट्र शांति-रक्षा अभियानों में लंबे योगदान को प्रमुख आधार के रूप में रखता है।

भारत 2028-29 के लिए फिर अस्थायी सदस्यता का चुनाव लड़ रहा है और इसके लिए आधिकारिक अभियान शुरू कर चुका है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अभियान के दौरान संयुक्त राष्ट्र शांति-रक्षा में भारत के योगदान को भी रेखांकित किया है।

परिषद में बदलाव की जरूरतसुरक्षा परिषद का मौजूदा ढांचा 1965 के बाद से मूल रूप से नहीं बदला है। 1963 में अपनाया गया और 1965 में प्रभावी हुआ संयुक्त राष्ट्र चार्टर संशोधन परिषद में सदस्यों की संख्या 11 से बढ़ाकर 15 करता है। इसमें अस्थायी सदस्यों की संख्या छह से बढ़ाकर 10 की गई, लेकिन स्थायी सदस्यों की संख्या पांच ही रही।

भारत का कहना है कि केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने से परिषद की निर्णय प्रक्रिया में वह बुनियादी बदलाव नहीं आएगा, जिसकी आज जरूरत है।सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्यों के पास एक-एक वोट होता है, लेकिन स्थायी सदस्यों के पास वीटो अधिकार है।

गैर-प्रक्रियात्मक प्रस्तावों को पारित करने के लिए नौ मतों के साथ स्थायी सदस्यों की सहमति भी जरूरी होती है। यही वजह है कि स्थायी सदस्यता के साथ वीटो का सवाल भी भारत की दावेदारी के केंद्र में है।