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ईरान-इजरायल जंग: भारत में LPG और तेल संकट से कैसे उबरेगा भारत? 10 Points में समझें पूरी कहानी

Published: Tue, 10 Mar 2026 06:30 PM (IST)

मिडिल ईस्ट में जारी जंग से भारत की ऊर्जा आपूर्ति, विशेषकर कच्चे तेल और एलपीजी पर गहरा असर पड़ा है। ...और पढ़ें

मिडिल ईस्ट में जंग से भारत में LPG और तेल पर कितना असर?

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संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जंग और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के चलते कच्चे तेल की कीमतें एक समय 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई।

लिक्विड नैचुरल गैस (एलएनजी) और लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) भी संकट की स्थिति में हैं। बता दें ये तीनों की किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। एक तरफ ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द ही खत्म हो सकता है लेकिन तब तक उर्जा और तेल आपूर्ति तनाव का मुद्दा बना हुआ है।

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भारत की नजर से देखें तो मिडिल ईस्ट की जंग ने ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर डाला है। बता दें, भारत अपने कच्चे तेल का 90 प्रतिशत दूसरे देशों से आयात करता है, जबकि एलपीजी 60 प्रतिशत और एलएनजी का आधे से अधिक आयात होता है। यह आपूर्ति मुख्यत खाड़ी देशों से ही होती है। ऐसे में भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, इस स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।

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भारत की ऊर्जा स्थिति को समझने के लिए यहां 10 महत्वपूर्ण बिंदु

1. LPG उत्पादन बढ़ाया जाएगा

सरकार ने ऑयल रिफाइनरी को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए खाना पकाने वाली गैस (LPG) का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है।

देश में वर्तमान में 33.1 करोड़ से अधिक LPG उपयोगकर्ता हैं। सोमवार को जारी एक निर्देश में, सरकार ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स सहित ऑयल रिफाइनरी को निर्देश दिया कि वे प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटेन जैसे C3 और C4 धाराओं के उत्पादन को अधिकतम करें।

इन एलपीजी सोर्स को सरकारी कंपनियों इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को आपूर्ति के लिए एलपीजी पूल में भेजा जाएगा। इस व्यवस्था के तहत उत्पादित एलपीजी का वितरण केवल घरेलू उपभोक्ताओं को किया जाएगा।

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2. LPG रिफिल के लिए वेटिंग पीरियड बढाया जाएगा

LPG रिफिल के लिए न्यूनतम वेटिंग बढ़ाई गई है। तेल बेचने वाली कंपनियों ने घरेलू LPG रिफिल बुक करने की न्यूनतम वेटिंग को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य जमाखोरी को रोकना और खाना पकाने के गैस सिलेंडरों की कमी से बचना है। यह बदलाव पिछले सप्ताह किए गए संशोधन के बाद आया है, जब न्यूनतम बुकिंग अंतराल को पहले के 15 दिनों से बढ़ाकर 21 दिन कर दिया गया था।

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तेल कंपनियों द्वारा पर्याप्त भंडार बनाए रखने पर जोर देते हुए, सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि बुकिंग की अवधि बढ़ाने का उद्देश्य उपभोक्ताओं द्वारा घबराहट में की जाने वाली बुकिंग को रोकना है।

अधिकारियों ने बताया कि एक सामान्य परिवार एक साल में लगभग छह से सात घरेलू LPG सिलेंडर (प्रत्येक सिलेंडर की क्षमता 14.2 किलोग्राम) का उपभोग करता है और आमतौर पर इसे लगभग 50 से 55 दिनों के बाद ही रिफिल कराने की आवश्यकता होती है।

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3. वैकल्पिक सोर्स पर विचार

भारत एलपीजी के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर विचार कर रहा है। भारत अमेरिका, अल्जीरिया, नॉर्वे और कनाडा जैसे देशों से एलपीजी आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत तलाश रहा है।

अधिकारियों ने बताया है कि भारत ने कई देशों के साथ एलपीजी आपूर्ति समझौते किए हैं, लेकिन लंबी परिवहन दूरी और जहाजरानी मार्गों में व्यवधान के कारण आपूर्ति में देरी हो रही है। फिलहाल माल की आपूर्ति जारी है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति बेहतर होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार वैश्विक ऊर्जा स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और आपूर्ति श्रृंखलाओं में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है।

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4. LPG: इन क्षेत्रों को प्राथमिकता

पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी कहा है कि गैर-घरेलू उपयोग के लिए आयातित एलपीजी की आपूर्ति अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।

मंत्रालय ने बताया कि रेस्तरां, होटल और विभिन्न उद्योगों सहित अन्य गैर-घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए अनुरोधों की समीक्षा और आवंटन निर्धारित करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है।

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5. इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर

वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में रुकावट की वजह से रेस्तरां और इंडस्ट्री जैसे गैर-घरेलू LPG उपभोक्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार द्वारा घरेलू उपयोगकर्ताओं को आपूर्ति को प्राथमिकता देने के कारण, वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों का वितरण धीमा हो गया है, जिससे होटल, रेस्तरां और सड़क किनारे के ढाबों को अनिश्चित स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन के अनुसार, बेंगलुरु में छोटे और मीडियम स्तर के भोजनालयों को मंगलवार तक अपना संचालन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, क्योंकि खाना पकाने की गैस खत्म होने की आशंका है।

6. भारत ने रूस से बढाई कच्चे तेल की खरीद

मिडिल ईस्ट में फंसे कच्चे तेल की खेपों की भरपाई के लिए भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने भारत को रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए 30 दिन की छूट दी है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए कभी भी किसी देश से अनुमति की आवश्यकता नहीं पड़ी है।

फरवरी में भी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। भारत ने अपनी ऊर्जा कूटनीति के तहत कच्चे तेल की आपूर्ति का दायरा बढ़ाया है और छह महाद्वीपों में फैले आपूर्तिकर्ता देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 40 कर दी है।

इसके परिणामस्वरूप, देश की ऊर्जा सुरक्षा अब होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे किसी एक समुद्री मार्ग पर निर्भर नहीं है। भारत में वर्तमान में 25 करोड़ बैरल से अधिक, यानी लगभग 40 करोड़ लीटर कच्चे तेल और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार है। यह भंडार ऊर्जा प्रणाली में लगभग सात से आठ सप्ताह की आपूर्ति के बराबर बफर प्रदान करता है।

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7. नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2022 के बाद से उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं, इसके बावजूद सरकारी अधिकारियों ने बताया कि भारत में खुदरा ईंधन की कीमतों में वृद्धि की कोई योजना नहीं है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'क्रूड के मामले में हमारी स्थिति मजबूत है। आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की संभावना नहीं है, भले ही कीमतें 110-120 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहें।'

8. 'इंडिया फर्स्ट' की नीति पर काम करेगा भारत 

एक सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को कम करने के उद्देश्य से रणनीतिक तेल भंडार जारी करने की अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की पहल में भाग नहीं लेगा।

यह संकट (जिसके कारण कीमतें बढ़ीं) हमारी देन नहीं है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को ही इससे निपटना होगा और कीमतों को कम करने के लिए उपाय करने होंगे

एक सरकारी सूत्र ने पीटीआई को बताया, साथ ही यह साफ किया कि भारत अपने भंडार का उपयोग नहीं करेगा। अधिकारियों ने बताया कि भारत के रणनीतिक भंडार का उपयोग केवल आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में ही किया जाना चाहिए। देश इस समय 'इंडिया फर्स्ट' की नीति पर काम करेगा।

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9. सरकार ने किए उपाय 

होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी शिपमेंट में रुकावट होने पर भारत ने आपातकालीन कदम उठाए हैं। सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस आवंटन की प्राथमिकता संशोधित की। जिससे LPG उत्पादन, CNG और पाइप्ड खाना पकाने की गैस को सर्वोच्च प्राथमिकता, उर्वरक क्षेत्र को दूसरी, चाय बागान और विनिर्माण आदि को तीसरी प्राथमिकता दी है। इससे महत्वपूर्ण क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे। 

10. महंगाई पर बड़ा असर नहीं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार कच्चे तेल की कीमत में 10% वृद्धि से महंगाई लगभग 0.3% तक बढ़ती है, इसलिए फिलहाल बड़ी महंगाई की आशंका नहीं है।

 

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