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'रक्षा खरीदारी राष्ट्रीय हितों से जुड़ी, किसी खास विचारधारा से नहीं'; जर्मनी के प्रस्ताव पर भारत का बड़ा बयान

Published: Mon, 12 Jan 2026 06:36 PM (IST)

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत की रक्षा खरीद नीति राष्ट्रीय हित से तय होती है, न कि ...और पढ़ें

एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम। (फाइल)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जर्मनी के साथ रक्षा समझौतों को लेकर भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि रक्षा सामान खरीदने के लिए जगह चुनने की भारत की नीति राष्ट्रीय हित से तय होती है, न कि खास विचारधारा से। ये टिप्पणी जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के भारत यात्रा के दौरान आई है।

जर्मन चांसलर ने पीएम मोदी से मुलाकात में कहा कि जर्मनी सुरक्षा मुद्दों पर भारत की रूस पर निर्भरता कम करने के लिए और ज्यादा करीब से सहयोग देना चाहता है। भारत पहले से ही मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के साथ साझेदारी में जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स द्वारा 6 पनडुब्बियां बनाने के लिए संभावित डील पर बातचीत कर रहा है।

सुरक्षा नीति पर जर्मन चांसलर की टिप्पणियों और दूसरे स्रोतों से हमारी रक्षा खरीद में कमी पर विक्रम मिसरी ने कहा, "मुझे लगता है कि जहां तक सुरक्षा नीति के पहलू का सवाल है, वह उसी बात की ओर इशारा कर रहे थे, जिसके बारे में मैं पहले बात कर रहा था, जो रक्षा और सुरक्षा नीति के संबंध में जर्मनी द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण में बदलाव था।"

रक्षा खरीद पर हमारा दृष्टिकोण राष्ट्रीय हित से तय होता है- मिसरी

उन्होंने कहा, देखिए, रक्षा खरीद पर हमारा दृष्टिकोण पूरी तरह से राष्ट्रीय हित से तय होता है। इसमें बहुत सारे कारक शामिल हैं और यह निश्चित रूप से वैचारिक नहीं है, यह पूरी तरह से हमारे राष्ट्रीय हित से तय होता है। इसलिए मैं यह नहीं कहूंगा कि एक जगह से खरीद दूसरी जगह से खरीद से जुड़ी है।

भारत अभी भी रूस के साथ सुरक्षा नीति पर मिलकर काम करता है, जहां से उसके ज्यादातर सैन्य उपकरण आते हैं और यह चीन के साथ रूसी गैस और तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है।

प्रक्रिया किसी भी समय हमारी जरूरतों को तय करती है- मिसरी

उन्होंने कहा कि हमारे पास एक प्रक्रिया है जो किसी भी समय हमारी जरूरतों को तय करती है। हम दुनिया में देखते हैं कि अगर हम इसे बाहर से खरीदने जा रहे हैं। अगर हम इसे स्थानीय स्तर पर नहीं बनाने जा रहे हैं, तो क्या हम इसे सबसे सुविधाजनक तरीके से खरीद सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि एक दूसरे से प्रभावित होता है।

रक्षा सहयोग भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। वर्तमान में, यह दोनों देशों के बीच सैन्य तकनीकी सहयोग कार्यक्रम पर समझौते द्वारा निर्देशित हैं। दोनों पक्ष समय-समय पर सशस्त्र बलों के कर्मियों का आदान-प्रदान और सैन्य अभ्यास करते हैं।

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