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दुनिया पर AI का खतरा: आर्थिक संकट, टेक्नॉलजी और रोजगार... 10 Points में समझें क्या है भारत की प्लानिंग

Published: Thu, 29 Jan 2026 08:29 PM (IST)

संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण ने AI पर भारत की स्थिति का विश्लेषण किया है। इसमें चेतावनी दी गई है ...और पढ़ें

AI पर क्या है भारत की प्लानिंग?

AI पर क्या है भारत की प्लानिंग?

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संक्षेप में पढ़ें

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आर्टिफिशिएल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर गुरुवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण ने भारत सरकार के सामने कुछ कड़वी सच्चाइयों को बेबाकी से पेश किया है।

परंपरा से हटकर, सर्वेक्षण ने सरकार को आईना दिखाने का भी काम किया है ताकि AI की हकीकत और उसके महत्व की समय रहते पहचान की जाए और सही कदम उठाया जा सके।

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AI में निष्क्रियता से भारत ग्राहक बन जाएगा

सर्वे में चेतावनी दी गई है कि अगर ऐसा नहीं किया गया है तो तेजी से तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी, सीमित संसाधनों और लगातार अनिश्चितता वाले वैश्विक इकोसिस्टम में भारत सिर्फ एक ग्राहक बनकर रह जाएगा।जबकि कोशिश AI के विकास और उपयोग में महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनने की होनी चाहिए।

ऐसा नहीं होता है तो यह भारत के लिए काफी जोखिमपूर्ण स्थिति होगी। इस क्षेत्र में देरी से प्रवेश कर रहे भारत के लिए अच्छी बात यह है कि वह दूसरे देशों के अनुभव से इसमें बहुत कुछ सीख सकता है और कम ऊर्जा खपत वाले ज्यादा सक्षम AI मॉडल को विकसित कर सकता है।

AI

भारत में जनजीवन को बेहतर कर सकता है AI

सर्वेक्षण ने कई उदाहरणों से यह साबित करने की कोशिश की है कि किस तरह से AI भारत में आम जनजीवन को बेहतर कर सकता है। दक्षिण भारत में, AI-सक्षम थर्मल इमेजिंग टूल्स कम संसाधन वाले इलाकों में स्तन कैंसर की शुरुआती जांच को संभव बना रहे हैं। हिमालयी क्षेत्र में, स्वदेशी सेंसर नेटवर्क को मशीन लर्निंग के साथ जोड़कर भूस्खलन की रीयल-टाइम चेतावनी दे रहे हैं।

बेंगलुरु में, AI-आधारित जल प्रबंधन प्रणालियां पानी की खपत की निगरानी कर रही हैं और रिसाव का पता लगा रही हैं। पिंपरी-चिंचवाड़ में, AI कक्षा शिक्षण परिणामों की निगरानी कर रहे हैं, जिससे छात्रों की भागीदारी में सुधार हुआ है।

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पहले के अनुभव से सीखे भारत

पहले के अनुभवों से सीख सकता है भारत सर्वेक्षण भारत को घरेलू रूप से क्या बनाना है, वैश्विक रूप से क्या सोर्स करना है, क्या जल्दी रेगुलेट करना है और क्या विकसित होने देना है। सर्वे में इस बारे में फैसला लेने की बात करता है, क्योंकि यही देश में AI के भविष्य को तय करेंगे।

वैसे भारत में AI को लेकर देर से शुरुआत होने के फायदे के बारे में यहां बताया गया है कि भारत पहले के अनुभवों से सीख सकता है और क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करने वाले व जनभागीदारी वासे AI सिस्टम डिजाइन कर सकता है।

क्या है भारत की प्लानिंग

  1. भारत को AI रेगुलेशन को आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप संवेदनशील और संतुलित तरीके से डिजाइन करने पर जोर देना चाहिए।
  2. विभिन्न देशों के AI डिजाइन दृष्टिकोण में अंतर है; भारत को संसाधनों की कमी और अन्य बाधाओं वाली स्थिति में संतुलन बनाना होगा।
  3. सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, संसाधन सीमित होने पर भी प्रभावी AI नीति और रेगुलेशन तैयार करने में।
  4. पहले विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय स्थापित करें, क्षमता विकसित करें, फिर अंत में बाध्यकारी नीतियां लागू करें।
  5. संस्थाओं और बाजार को साथ-साथ विकसित होने का मौका देने के लिए चरणबद्ध रेगुलेशन अपनाना चाहिए।
  6. बड़े पैमाने पर फाउंडेशनल मॉडल ट्रेन करने के बजाय छोटे, विशिष्ट कार्यों के लिए AI मॉडल पर फोकस करें।
  7. ऐसे AI मॉडल बनाएं जो स्थानीय हार्डवेयर (स्मार्टफोन, पीसी) पर आसानी से चल सकें।
  8. AI भारत में जनजीवन सुधार सकता है उदाहरण के तौर पर AI थर्मल इमेजिंग से कम संसाधन वाले क्षेत्रों में स्तन कैंसर की शुरुआती जांच की जा रही है।
  9. हिमालय में भूस्खलन रीयल-टाइम चेतावनी, बेंगलुरु में AI जल प्रबंधन, पिंपरी-चिंचवड़ में AI आधारित शिक्षा निगरानी।
  10. भारत को देर से AI में प्रवेश का फायदा मिल सकता है पिछले अनुभवों से सीखकर, जन-केंद्रित, बेहतर क्षमता वाले और अधिक समावेशी AI सिस्टम डिजाइन कर सकता है।