जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारत और रूस के विदेश और रक्षा मंत्रियों को मिलाकर बनाई गई व्यवस्था टू प्लस टू की सोमवार को हुई पहली वार्ता कई मायने में ऐतिहासिक साबित हो सकती है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच जिस तरह के मुद्दों पर चर्चा हुई, वह बताती है कि दोनों देशों के बीच सामंजस्य बेहद व्यापक होने वाला है। खास तौर पर रूस के सुदूर पूर्व इलाकों के विकास में भारत एक बड़ी भूमिका निभाने वाला है। सब कुछ ठीक रहा तो इस इलाके में भारतीय कामगारों और श्रमिकों को उसी तरह से रोजगार के अवसर मिल सकते हैं, जैसे अभी उन्हें खाड़ी देशों में मिलते हैं। खनिजों से भरा यह इलाका रूस की बदहाल इकोनमी को बेहद मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। रूस यह काम भारतीय कंपनियों, निवेश और कामगारों के लिए पूरी तरह से खोलने को तत्पर है।

सूत्रों के मुताबिक, भारत और रूस के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग अभी काफी कम होता है, लेकिन इसकी संभावनाएं काफी ज्यादा हैं। अभी भारत अपनी आबादी को पूरी खाद्य सुरक्षा देने में सक्षम है, लेकिन जिस तरह से यहां आबादी बढ़ रही है और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए हो सकता है कि भविष्य में कई तरह के खाद्य उत्पादों का आयात करना पड़े। दूसरी तरफ रूस के पास काफी जमीन है जिस पर खेती की जा सकती है। भारत और रूस के बीच जो बातचीत हो रही है, वह इन संभावनाओं को देखते हुए ही हो रही है। यह भी ध्यान रहे कि चीन भी रूस के कुछ इलाकों में अपनी खाद्य सुरक्षा के लिहाज से खेती करवा रहा है। भारत और रूस की पहली टू प्लस टू वार्ता में कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात को आसान बनाने पर बात हुई है।

रूस को सुदूर पूर्वी इलाके के विकास में भारत को शामिल करके होगी खुशी: पुतिन

रूस के सुदूर पूर्व को लेकर भारत की रुचि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2019 में वहां की यात्रा करके जता चुके हैं। पिछले वर्ष भी प्रधानमंत्री मोदी ने ईस्टर्न इकोनमिक फोरम (जो सुदूर पूर्व के विकास से जुड़ी है) को संबोधित किया था। यह पूरा इलाका कोयला, कच्चे तेल और गैस से भरा हुआ है। कई विशेषज्ञ इस इलाके को रूस के भविष्य से जोड़कर देखते हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस को सुदूर पूर्वी इलाके के विकास में भारत को शामिल करके खुशी होगी।

उल्लेखनीय है कि अगले महीने वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में हिस्सा लेने के लिए सुदूर पूर्व रूस के सभी राज्यों के गवर्नरों को बुलाया गया है। कई भारतीय कंपनियों ने इस इलाके में एनर्जी, ट्रांसपोर्ट, लाजिस्टिक्स, समुद्री मार्ग से कनेक्टिविटी, हीरा प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर, पर्यटन आदि क्षेत्रों में निवेश में रुचि दिखाई है। प्रधानमंत्री ने 2019 में इस क्षेत्र की यात्रा में एक अरब डालर का लाइन आफ क्रेडिट (कंपनियों को सस्ती दर पर कर्ज) देने का एलान किया था।

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan