बंधुआ मजदूर नहीं, इनोवेशन इंजन हैं भारतीय-अमेरिकी पेशेवर; नवाचार में देते हैं बड़ा योगदान
समझना होगा कि भारतीय-अमेरिकी पेशेवर केवल सस्ते कर्मचारी नहीं, बल्कि अमेरिका के विकास के इंजन हैं, जिनके बिना अमेरिकी नेतृत्व को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान पर बवाल।
HighLights
भारतीय-अमेरिकी पेशेवर US अर्थव्यवस्था में 5-6% कर योगदान करते हैं।
70% से अधिक H-1B वीजा धारक भारतीय पेशेवर हैं।
इनके बिना अमेरिका को AI रेस में पिछड़ने का खतरा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की तरफ से एच-1बी वीजा धारकों और विदेशी पेशेवरों को विदेशी बंधुआ मजदूर कहे जाने वाले बयान ने वैश्विक स्तर पर नया विवाद खड़ा कर दिया है। हालांकि वास्तविकता यह है कि भारतीय-अमेरिकी पेशेवर अमेरिका की अर्थव्यवस्था के सस्ते कर्मचारी नहीं, बल्कि उस के इनोवेशन इंजन हैं।
आइए जानते हैं कि भारतीय अमेरिकी पेशेवरों का अमेरिका की अर्थव्यस्था और नवाचार में क्या योगदान है और अगर भारतीय पेशेवर अमेरिका जाना बंद कर दें तो इसका क्या असर होगा?
क्या-क्या योगदान देते हैं भारतीय पेशेवर?
- 6% तक योगदान करते है अमेरिका के कुल कर संग्रह में भारतीय अमेरिकी पेशेवर।
- 70% से अधिक हिस्सेदारी है भारतीय पेशेवरों की एच-1बी वीजा कार्यक्रम में।
- 25% स्टार्ट अप की सहस्थापना भारतीयों ने की है।
- 300 अरब डालर तक वार्षिक कर राजस्व में योगदान करते हैं भारतीय-अमेरिकी पेशेवर।
अगर भारतीय पेशेवर अमेरिका न जाएं तो...
इस बात को ऐसे समझिए कि यदि राजनीतिक या नीतिगत दबावों के कारण भारतीय प्रतिभा का अमेरिका जाना रुकता है, तो इसका असर केवल भारतीयों पर नहीं, बल्कि सीधे अमेरिकी वैश्विक नेतृत्व पर पड़ेगा।
