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बंधुआ मजदूर नहीं, इनोवेशन इंजन हैं भारतीय-अमेरिकी पेशेवर; नवाचार में देते हैं बड़ा योगदान

Published: Sat, 10 Oct 2026 04:09 PM (IST)

समझना होगा कि भारतीय-अमेरिकी पेशेवर केवल सस्ते कर्मचारी नहीं, बल्कि अमेरिका के विकास के इंजन हैं, जिनके बिना अमेरिकी नेतृत्व को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान पर बवाल।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान पर बवाल।

HighLights

  1. भारतीय-अमेरिकी पेशेवर US अर्थव्यवस्था में 5-6% कर योगदान करते हैं।

  2. 70% से अधिक H-1B वीजा धारक भारतीय पेशेवर हैं।

  3. इनके बिना अमेरिका को AI रेस में पिछड़ने का खतरा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की तरफ से एच-1बी वीजा धारकों और विदेशी पेशेवरों को विदेशी बंधुआ मजदूर कहे जाने वाले बयान ने वैश्विक स्तर पर नया विवाद खड़ा कर दिया है। हालांकि वास्तविकता यह है कि भारतीय-अमेरिकी पेशेवर अमेरिका की अर्थव्यवस्था के सस्ते कर्मचारी नहीं, बल्कि उस के इनोवेशन इंजन हैं।

आइए जानते हैं कि भारतीय अमेरिकी पेशेवरों का अमेरिका की अर्थव्यस्था और नवाचार में क्या योगदान है और अगर भारतीय पेशेवर अमेरिका जाना बंद कर दें तो इसका क्या असर होगा?

क्या-क्या योगदान देते हैं भारतीय पेशेवर?

  • 6% तक योगदान करते है अमेरिका के कुल कर संग्रह में भारतीय अमेरिकी पेशेवर।
  • 70% से अधिक हिस्सेदारी है भारतीय पेशेवरों की एच-1बी वीजा कार्यक्रम में।
  • 25% स्टार्ट अप की सहस्थापना भारतीयों ने की है।
  • 300 अरब डालर तक वार्षिक कर राजस्व में योगदान करते हैं भारतीय-अमेरिकी पेशेवर।

अगर भारतीय पेशेवर अमेरिका न जाएं तो...

इस बात को ऐसे समझिए कि यदि राजनीतिक या नीतिगत दबावों के कारण भारतीय प्रतिभा का अमेरिका जाना रुकता है, तो इसका असर केवल भारतीयों पर नहीं, बल्कि सीधे अमेरिकी वैश्विक नेतृत्व पर पड़ेगा।

अल्पकालिक प्रभाव  दीर्घकालिक प्रभाव 
• प्रोजेक्ट में देरी और बढ़ी लागत  • टेक प्रतिभाओं की गंभीर किल्लत
• अमेरिकी खजाने को अरबों डॉलर का कर राजस्व घाटा • एआई और क्वांटम में चीन से पिछड़ जाएगा अमेरिका
• प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट • आरएंडडी हब का भारत में शिफ्ट होना

कर राजस्व में में भारी गिरावट:- उच्च आय अर्जित करने वाले भारतीय कार्यबल केन आने से अमेरिकी संघ और राज्य सरकारों को अरबों डालर के कर राजस्व और स्थानीय रियल एस्टेट व उपभोक्ता बाजार में भारी नुकसान होगा।

नौकरियों तक सीमित नहीं है योगदान...

भारतीय पेशेवरों का योगदान सिर्फ नौकरियों तक सीमित नहीं है; वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सबसे समृद्ध और नवाचार को आगे बढ़ाने वाले स्तंभों में शामिल हैं।

वितीय एवं कर योगदान- भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिका की कुल आबादी का मात्र 1.5% है, लेकिन यह समुदाय अमेरिका के कुल आयकर में लगभग 5% से 6% का योगदान देता है।

कारपोरेट और टेक लीडरशिप- गूगल के सुंदर पिचाई, माइक्रोसाफ्ट के सत्या नडेला और एडोब के शांतनु नारायण जैसे भारतीय मूल के लीडर्स उन वैश्विक टेक कंपनियों का संचालन कर रहे हैं जो अमेरिका के बाजार इंजीकरण की रीढ़ हैं।

उद्यमिता और रोजगार सृजन- सिलिकान वैली के हर चार में से एक टेक स्टार्टअप की सह-स्थापना भारतीयों द्वारा की बगई है। ये स्टार्टअप लाखों अमेरिकियों के लिए रोजगार भी पैदा करते हैं।

अनुसंधान एवं स्वास्थ्य सेवा- अमेरिका में हर 20 में से एक डाक्टर भारतीय मूल का है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआइ) सेमीकंडक्टर और बायोटेक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारतीय शोधकर्ताओं की केंद्रीय भूमिका है।