CPR देना होगा आसान, भारतीय मूल के छात्रों ने बनाया स्मार्ट पैच
भारतीय मूल के छात्रों ने सीपीआर देने को आसान बनाने के लिए 'सीपीराइट' नामक एक बटुए के आकार का पैच विकसित किया है।

CPR देना होगा आसान। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
भारतीय छात्रों ने सीपीआर के लिए 'सीपीराइट' स्मार्ट पैच बनाया।
यह पैच सही दबाव, गति और गहराई के संकेत देता है।
अप्रशिक्षित लोगों को आपात स्थिति में जान बचाने में सहायक।
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। कार्डियक अरेस्ट या दिल के दौरे की स्थिति में समय पर सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ सकती है। लेकिन सही प्रशिक्षण न होने पर कई बार लोग मदद के लिए आगे आने के बावजूद सही तरीके से सीपीआर नहीं दे पाते।
इसी चुनौती से निपटने के लिए वाशिंगटन विश्वविद्यालय में पढ़ रहे भारतीय मूल के चार छात्रों ने बटुए के आकार का एक छोटा-सा पैच विकसित किया है।
'सीपीराइट' नाम का यह उपकरण सीपीआर देते समय छाती पर दबाव डालने की सही जगह, गति और गहराई के बारे में दृश्य संकेत देता है। इस नवाचार को इस वर्ष कॉलेजिएट इन्वेंटर्स प्रतियोगिता की स्नातक श्रेणी में पहला पुरस्कार और 10,000 डॉलर की राशि मिली है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पैच को शुभम बंसल, प्रिशा हेमानी, दीया शर्मा और निखिता वद्दिनेनी ने त्रिस्टन जाफरी के मार्गदर्शन में विकसित किया है। नेशनल इन्वेंटर्स हॉल ऑफ फेम (एनआईएचएफ) के अनुसार, यह एक छोटा और एक बार इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण है।
इसमें लगी एलईडी लाइटें सीपीआर के दौरान दबाव डालने की सही जगह और कम्प्रेशन की गति व गहराई के बारे में संकेत देती हैं। इसे चलाने के लिए स्मार्टफोन, मॉनिटर या किसी अन्य बाहरी उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती।
सीपीआर देते समय मिलेगी तुरंत जानकारी
सीपीराइट का इस्तेमाल करना आसान रखा गया है। सीपीआर शुरू करने से पहले पैच को मरीज की छाती की हड्डी यानी स्टर्नम पर लगाया जाता है। इसके बाद छाती पर दबाव डालते समय इसकी एलईडी लाइटें संकेत देती हैं कि कम्प्रेशन सही तरीके से किया जा रहा है या नहीं। इससे बचाव करने वाले व्यक्ति को हर बार किसी दूसरे उपकरण की स्क्रीन देखने या अलग से निर्देश लेने की जरूरत नहीं होती।
इसकी छोटी बनावट भी इसे खास बनाती है। जेब में रखा जा सकने वाला यह पैच आपात स्थिति में आसानी से उपलब्ध हो सकता है। इसका उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है, जिन्हें सीपीआर का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला है या जो संकट की घड़ी में सही तकनीक को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं।
समय पर मदद की अहमियत
अमेरिका में हर साल अस्पताल के बाहर 3.5 लाख से अधिक लोग हृदयाघात संबंधी आपात स्थितियों का सामना करते हैं। एनआईएचएफ के अनुसार, इनमें करीब 90 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। ये आंकड़े बताते हैं कि अस्पताल पहुंचने से पहले मिलने वाली त्वरित सहायता कितनी महत्वपूर्ण है।
सीपीराइट जैसे उपकरण का मकसद सीपीआर देने की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाना और बचावकर्ता को तत्काल संकेत उपलब्ध कराना है। हालांकि, इसकी वास्तविक उपयोगिता का आकलन व्यापक परीक्षणों और व्यावहारिक इस्तेमाल के आधार पर ही किया जा सकेगा।
