250 साल के इतिहास से उठा पर्दा, भारतीय वैज्ञानिकों ने खोज निकाला अंटार्कटिका के 'मॉड राइज पोलिना' का रहस्य
भारतीय वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ के बीच बार-बार दिखने वाले खुले पानी के रहस्यमय क्षेत्र (पोलिना) के 250 साल के इतिहास का पता लगाया है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिक पोलिना के 250 साल के इतिहास का पता लगाया

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। भारतीय विज्ञानियों को अंटार्कटिका के इर्द-गिर्द समुद्री बर्फ में बार-बार दिखाई देने वाले खुले पानी के एक रहस्यमयी इलाके के 250 वर्ष तक के इतिहास का पता लगाने में सफलता मिली है। इससे यह जाहिर होता है कि अतीत में इस तरह की घटनाएं कई बार हुईं। इनमें से कुछ बड़ी घटनाओं को देखा भी जा चुका है।
यह अध्ययन क्रायोस्फीयर पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय ध्रवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के शोधकर्ताओं की अगुआई में यह अध्ययन किया गया है।
इसमें डेनमार्क और नार्वे के विज्ञानी भी शामिल रहे। शोधकर्ताओं की टीम ने 'माड राइज पोलिना' (समुद्री बर्फ से घिरे खुले समुद्र का एक एक बड़ा इलाका) के इतिहास का पता लगाने के लिए अंटार्कटिक आइस कोर का उपयोग किया।
पोलिना वास्तव में खुले पानी का एक बड़ा इलाका होता है, जो बर्फ से ढके समुद्र के बीच बनता है। "माड राइज पोलिना" वेडेल सागर में स्थित है, जहां यह महासागर और वायुमंडल के बीच गर्मी के आदान-प्रदान को काफी हद तक बदल सकता है।
शोधकर्ताओं ने पूर्वी अंटार्कटिका में जुप्रानन आइस राइज से 122 मीटर लंबा आइस कोर निकाला। बर्फ के अंदर संरक्षित बर्फ और रासायनिक परतों से सैकड़ों वर्षों के दौरान की आसपास के समुद्र अैर वायुमंडल की स्थितियों के बारे में जानकारी मिली।
गोवा स्थित एनसीपीओआर में आइस कोर का विश्लेषण किया गया। इसके माध्यम से शोधकर्ता "माड राइज पोलिना" का 1774 तक का इतिहास फिर से तैयार करने में सफल रहे।
