जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोरोना काल के दौरान एसी कोच वाली ट्रेनों से हटाए गए परदे व बेडरोल की सप्लाई फिर से चालू कर दी गई है। लेकिन मार्च से अब तक कुल ढाई हजार ट्रेनों में से केवल 1040 ट्रेनों में ही इसकी सुविधा दी जा सकी है। बाकी करीब 1100 ट्रेनों में भी जल्दी ही यह सुविधा बहाल की जाएगी। बेडरोल का पुराना 60 फीसद स्टाक खराब होने की वजह से सप्लाई प्रभावित हो रही है।

मानकों में छूट

नए बेडरोल की सप्लाई के लिए मानकों में छूट दी गई है। रेलवे में स्थानीय स्तर पर चादर, कंबल, तकिया और तौलिए की खरीद करने व लांड्री सुविधा का बंदोबस्त करने की छूट दे दी गई है। कोरोना महामारी की वजह से पहले ट्रेनों का संचालन बंद किया गया, फिर जब ट्रेनें चलाई गईं तो एयर कंडीशंड कोच के परदे और बेडरोल हटा लिए गए।

पेश आ रहीं मुश्किलें

लगभग दो सालों तक बेडरोल व परदों का उपयोग नहीं होने से उसका बड़ा हिस्सा खराब हो चुका है। इसके लिए बड़ी संख्या में बेडरोल (दो चादर, एक कंबल, एक तकिया व गिलाफ और एक तौलिया) तैयार करने में मुश्किलें पेश आ रही थीं। इसके मद्देनजर रेलवे बोर्ड ने नियमों में ढील देते हुए बेडरोल के लिए हैंडलूम व खादी आश्रम से ही खरीद करने की शर्त को फिलहाल हटा लिया है।

बेडरोल का बड़ा हिस्सा खराब

रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रेनों में 10 मार्च से बेडरोल देने का फैसला किया गया। लेकिन इसकी राह में कई तरह की मुश्किलें आईं। दो साल से पड़े हुए बेडरोल का बड़ा हिस्सा खराब हो गया है। कोविड काल के दौरान कुछ ट्रेनों को रोगियों के इलाज के लिए वार्ड के रूप में तब्दील किया गया था। उस दौरान जिन चादरों व बिस्तरों का उपयोग किया गया, उन्हें भी अनुपयोगी घोषित किया गया है। सरकारी व गैर सरकारी लांड्री में काम बंद होने से उसमें भी मरम्मत जरूरी है।

खरीद में भी छूट

बड़ी संख्या में बेडरोल की जरूरतों को देखते हुए रेलवे ने हैंडलूम के साथ मिलों में तैयार चादरें, कंबल व अन्य वस्तुओं की खरीद में भी छूट दे दी है। सेंट्रलाइज खरीद की जगह स्थानीय डिविजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) को नामित किया गया। खरीद की क्षमता भी बढ़ाई गई। ताकि यात्रियों के लिए सुविधा जल्दी बहाल हो सके।

Edited By: Krishna Bihari Singh