संजय सिंह, नई दिल्ली। जब रेलवे ई-टिकटिंग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ तो उसमे बार बार 'गुरुजी' का नाम आया था। अब अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह गुरुजी कोई और नहीं बल्कि सरगना हामिद अशरफ को फंडा सिखाने वाला आइआरसीटीसी व सीबीआइ का पूर्व प्रोग्रामर अजय गर्ग था। अजय गर्ग 2007 से 2011 के बीच आइआरसीटीसी में काम करता था और उसके बाद उसने सीबीआइ में असिस्टेंट प्रोग्रामर की नौकरी ज्वाइन कर ली थी। उसके बारे में जानकारी खुद अशरफ ने सीबीआइ को दी थी।

जिसके बाद सीबीआइ ने 2017 में उसे उसके सहयोगी अनिल गुप्ता के साथ गिरफ्तार किया था। बाद में सीबीआइ ने क्रिस के मुख्यालय ले जाकर इन तीनो की पेशी अधिकारियों के समक्ष कराई थी। वहां तीनो ने सबके सामने आइआरसीटीसी की वेबसाइट में अनधिकृत घुसपैठ कर कैप्चा और ओटीपी को बाइपास कर फटाफट टिकट बुकिंग करने वाले एएनएमएस सॉफ्टवयर का हुनर दिखाया था। इसी के बाद से क्रिस पर बंदी की तलवार लटक रही है।

अशरफ और अजय गर्ग के खुलासों के बाद आरपीएफ ने देश भर में कई जगहों पर छापेमारी कर ई-टिकटिंग रैकेट से जुड़े कई अन्य एजेंटों को पकड़ा था। इसके बावजूद क्रिस और आइआरसीटीसी के लोग लगातार इस बात से इनकार करते रहे कि उनकी वेबसाइट में कोई खामी है। उनका कहना था मनुष्य के मुकाबले मशीनों के जरिए टिकटों की ज्यादा तेज गति से बुकिंग तो संभव है, परंतु वेबसाइट को हैक करना कतई संभव नहीं है। मशीन की घुसपैठ की संभावना को सीमित करने के लिए उन्होंने हर चरण में कैप्चा डालने तथा भुगतान के लिए ओटीपी की व्यवस्था की। लेकिन अशरफ के एजेंटों ने इससे जनता को परेशानी की सैकड़ों शिकायतें कर क्रिस को कुछ जगहों पर कैप्चा बंद करने को विवश कर दिया। लेकिन इससे गैरकानूनी बुकिंग के मामले फिर बढ़ने लगे। इस पर कुछ मामलों को छोड़ कैप्चा को फिर से बहाल कर दिया गया। इससे गैरकानूनी बुकिंग फिर से बढ़ गई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेल मंत्रालय ने क्रिस और आइआरसीटीसी को ये साबित करने को कहा कि उनका सिस्टम फूलप्रूफ है। इसके लिए रेल भवन में बाकायदा साइबर एक्सपर्ट और एथिकल हैकर्स बुलाए गए और उन्हें वेबसाइट को हैक करने की चुनौती दी गई। इस सम्मेलन में क्रिस व आइआरसीटीसी वाले सिस्टम को हैकप्रूफ साबित करने में तो कामयाब रहे। लेकिन एएनएमएस या लाल मिर्ची जैसे सॉफ्टवेयर से सेंधमारी व फटाफट बुकिंग को रोकने के लिए जटिल कैप्चा के उपयोग के अलावा उनके पास कोई जवाब नहीं था।

क्रिस को बंद करने की चर्चाएं

बताते हैं कि इसी सम्मेलन के बाद रेल मंत्रालय ने 'क्रिस' को अपना सिस्टम फूलप्रूफ बनाने अन्यथा बंदी के लिए तैयार रहने की चेतावनी दे दी थी। तबसे क्रिस को बंद किए जाने की चर्चाएं लगातार चल रही हैं। सूत्रों की माने तो नवीनतम खुलासों के बाद क्रिस को बंद किए जाने पर कभी भी मुहर लग सकती है। क्योंकि क्रिस की कोई तरकीब काम नहीं कर रही। सेंधमारी रोकने के लिए पिछले दिनो उसने वेबसाइट पर गूगल रीकैप्चा वी3 का प्रावधान किया था। परंतु माफिया उसे भी काटने में कामयाब हो गया।

मिलीभगत का संदेह

पिछले डेढ़ वर्षो में टिकट दलालों के विरुद्ध छेड़े गए अभियानों से ये संदेह पुख्ता हुआ है कि क्रिस और आइआरसीटीसी के भीतर के ही कुछ लोग टिकटिंग माफिया को सिस्टम से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं मुहैया कराते हैं। ये लोग नहीं चाहते कि सिस्टम कभी पूरी तरह फूलप्रूफ हो। इसके बार-बार प्रमाण मिले हैं। सूत्रों के अनुसार सिस्टम को फूलप्रूफ बनाने के लिए आरपीएफ द्वारा जब कभी सूचनाएं मांगी जाती हैं, क्रिस के अधिकारी उसमें रोड़े अटकाने का प्रयास करते हैं।

यहां तक कि अभी 11-20 जनवरी के दौरान डाले गए छापों में जब गुलाम मुस्तफा को पकड़ा गया और बंगलूर में उसके गढ़ का पता चला तो आरपीएफ ने आइआरसीटीसी और क्रिस के अधिकारियों को बंगलूर आकर जांच में मदद करने को कहा, परंतु दोनो संगठनों के किसी भी अधिकारी ने ऐसा करने की जहमत नहीं उठाई है।

 

Posted By: Sanjeev Tiwari

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