बरेली [जागरण संवाददाता]। जिसका डर था वही हुआ। पाकिस्तान की लाहौर स्थित कोटलखपत जेल में बंद यशपाल की रिहाई का इंतजार और बढ़ गया है। उसे यूपी सरकार की ढिलाई का खामियाजा उठाना पड़ा है। अगर वक्त रहते उसकी नागरिकता का प्रमाण केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंच जाता तो आज यशपाल हमारे बीच होता। बरेली नहीं, कम से कम बाघा बॉर्डर पार कर अपने वतन की सरजमीं पर कदम तो रख ही लेता। अलबत्ता, उसकी रिहाई के प्रयास में लगे लोगों ने नए सिरे से कोशिशें तेज कर दी हैं।

सीमा उल्लंघन में पकड़ा गया फरीदपुर के पढ़ेरा गांव निवासी यशपाल तीन साल से पाकिस्तान की कैद में है। 30 मई को उसकी सजा पूरी हो चुकी है। 'दैनिक जागरण' की मुहिम और सामाजिक संस्था जागर के डा. प्रदीप कुमार की लगन से उसकी रिहाई भी निर्धारित तिथि पर तय थी, लेकिन यूपी सरकार के ढुलमुल रवैये ने सबपर पानी फेर दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय में यशपाल का प्रकरण देखने वाले विदेश विंग के डायरेक्टर पीवी सिवरमन करीब एक साल से उसकी नागरिकता के प्रमाण का इंतजार कर रहे थे लेकिन यूपी सरकार ने कोई जवाब नहीं भेजा।

मामले को 'जागरण' ने जोर-शोर से उठाया तो राज्य गृह मंत्रालय के प्रमुख सचिव की नींद टूटी और उन्होंने नागरिकता से जुड़े कागजात पिछले दिनों केंद्र को भेज दिए। यह यशपाल के परिवार का दुर्भाग्य ही था कि कागज तो दिल्ली पहुंचे, लेकिन सिवरमन इसी हफ्ते रिटायर हो गए। पिछले दिनों लगातार संपर्क साधने पर जब सिवरमन से बात नहीं हो सकी थी। उनके रिटायरमेंट की बात भाजपा सांसद मेनका गांधी के जरिये पता चली।

जागर के डा. प्रदीप भी ब्यूरोक्रेसी के इस रवैये से खासे आहत हैं। बोले, यह आलम तब है जब हमने हाल ही में सरबजीत को खो दिया। अगर यूपी और केंद्र सरकार के अफसर यशपाल प्रकरण को गंभीरता से लेते तो वह आज ही रिहा हो जाता। हालांकि, हमने अब नए सिरे से प्रयास शुरू कर दिए हैं। सांसद मेनका गांधी की मदद से केंद्रीय गृह मंत्रालय के दूसरे अफसरों से संपर्क साधा है। उम्मीद है, कोई नतीजा निकलेगा।

गृह मंत्री की ई मेल आइडी ठप

डा. प्रदीप कुमार के मुताबिक, दावे कितने भी हों। भारत में ई गवर्नेस बेहाल है। उन्होंने यशपाल की रिहाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी ई-मेल भेजा लेकिन उनकी मेल आइडी ही ठप है।

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