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पायलटों की लगातार मौतों पर फेडरेशन ने जताई चिंता, ड्यूटी नियमों में छूट खत्म करने की मांग

Published: Wed, 16 Sep 2026 05:25 PM (IST)

देशभर में पायलटों की लगातार हो रही मौतों से चिंतित फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने विमानन मंत्रालय और डीजीसीए को पत्र लिखा है।

पायलटों की लगातार मौतों पर एक्शन में FIP।

पायलटों की लगातार मौतों पर एक्शन में FIP।

HighLights

  1. पायलटों की अचानक मौतों से एविएशन सेक्टर में खलबली मची।

  2. फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने मंत्रालय को पत्र लिखा।

  3. FDTL नियमों में छूट खत्म करने और जांच की मांग की।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में बीते कुछ समय में ड्यूटी के दौरान या उससे जुड़े मामलों में कई भारतीय पायलटों की अचानक हुई मौतों ने देश के एविएशन सेक्टर में खलबली मचा दी है। ऐसे में अब इसे लेकर फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने सख्त रुख अपनाते हुए विमानन मंत्रालय और डीजीसीए (DGCA) को पत्र लिखा है।

फेडरेशन ने एयरलाइंस को फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के तहत दी जा रही सभी तरह की छूट को तुरंत खत्म करने और हालिया मौतों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

पायलटों की मौतों और थकान पर गहरी चिंता

मामले में FIP के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने मंत्रालय को भेजे मेल में कहा है कि पायलटों में लगातार बढ़ रही थकान, ड्यूटी के कड़े नियमों और हालिया मौतों से पूरा पायलट समुदाय बेहद चिंतित है।

हालांकि फेडरेशन ने सीधे तौर पर इन मौतों को थकान से नहीं जोड़ा है, लेकिन उनका कहना है कि इन घटनाओं ने रोस्टर सिस्टम, आराम के समय, मेडिकल निगरानी और थकान जोखिम प्रबंधन (FRMS) की समीक्षा करने की तत्काल जरूरत पैदा कर दी है।

हाल के दिनों में सामने आए चौंकाने वाले हादसे

बता दें कि पिछले कुछ समय में कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं।

  • नवंबर 2023- दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर एक एयर इंडिया के पायलट की मौत हो गई थी।
  • फरवरी 2024- कतर एयरवेज के लिए काम करने वाला एक भारतीय पायलट दिल्ली-दोहा फ्लाइट के दौरान बीमार पड़ गया और उसकी मौत हो गई।
  • अप्रैल 2026- एयर इंडिया और अकासा एयर के एक-एक पायलट की मौत हो गई।
  • दिल्ली में लेओवर के दौरान एक एयर इंडिया के पायलट की उनके होटल के कमरे में मौत हो गई।

एयरलाइंस को मिलने वाली छूट और उसका असर भी समझिए

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि FDTL के नियम पायलटों के काम करने के घंटे, न्यूनतम आराम और लैंडिंग की संख्या तय करते हैं ताकि सुरक्षा बनी रहे। लेकिन क्रू की कमी और उड़ानों के शेड्यूल पर असर न पड़े, इसलिए बड़ी एयरलाइंस अक्सर इन नियमों में छूट हासिल कर लेती हैं।

गौर करने वाली यह है कि कोरोना के बाद का यह दौर विमानन कंपनियों के लिए पहले से ही काफी मुश्किल रहा है। हाल ही में ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और लगातार भू-राजनीतिक तनावों के कारण एयरलाइंस को भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते वे नियमों में ढील मांगती रही हैं।

अब समझिए पायलट बॉडी की मुख्य मांगें क्या-क्या?

  • एविएशन सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए एयरलाइंस को FDTL नियमों के तहत दी गई सभी तरह की छूट तुरंत वापस ली जाए।
  • डीजीसीए (DGCA) के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय FRMS निगरानी कार्यक्रम बनाया जाए।
  • पायलटों के स्वास्थ्य के रुझानों और थकान से जुड़ी चिकित्सा घटनाओं की स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा हो।
  • भविष्य के नियमों और बैठकों में पायलटों के प्रतिनिधि संगठनों को भी शामिल किया जाए।