नई दिल्ली, एजेंसियां। समुद्री क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना 24 पनडुब्बी बनाने की योजना बना रही है। इनमें 18 पारंपरिक और छह परमाणु हमले की क्षमता वाली पनडुब्बियां शामिल हैं। रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने संसद के शीतकालीन सत्र में एक रिपोर्ट पेश की। इसमें कहा गया है कि इस समय नौसेना के बेड़े में 15 पारंपरिक और दो परमाणु पनडुब्बियां हैं। इन दोनों परमाणु पनडुब्बियों के नाम आइएनएस अरिहंत और आइएनएस चक्र हैं। इनमें आइएनएस चक्र रूस से पट्टे पर लिया गया है।

निजी क्षेत्र के उद्योगों के साथ साझेदारी में योजना

परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बियों का निर्माण देश में ही किए जाने की योजना है, जिसके लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझेदारी की जाएगी। नौसेना के मुताबिक, उसके पास ज्यादातर पनडुब्बियां 25 साल से ज्यादा पुरानी हैं। 13 पनडुब्बियों की उम्र तो 17 से 32 साल के बीच है।

भारतीय नौसेना ने अरिहंत क्लास एसएसबीएन (SSBN) के साथ छह परमाणु हमले वाली पनडुब्बियों के निर्माण की योजना बनाई है जो परमाणु मिसाइलों से लैस परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी है। परमाणु हमले की पनडुब्बियों को भी निजी क्षेत्र के उद्योगों के साथ साझेदारी में स्वदेश निर्मित करने की योजना है। वर्तमान में नौसेना रूसी मूल की किलो वर्ग, जर्मन मूल की एचडीडब्‍लू वर्ग और पारंपरिक डोमेन में नवीनतम फ्रेंच स्कॉर्पीन क्लास की पनडुब्बियों का संचालन कर रही है, जबकि परमाणु खंड में इसने रूस से एक आईएनएस चक्र (अकुला वर्ग) को पट्टे पर दिया है।

पिछले 15 वर्षों में सिर्फ दो नई पारंपरिक पनडुब्बियों को शामिल किया गया

नौसेना ने संसदीय समिति को यह भी बताया कि पिछले 15 वर्षों में सिर्फ दो नई पारंपरिक पनडुब्बियों को स्कॉर्पीन श्रेणी के जहाज आईएनएस कलवरी और आईएनएस खंडेरी को शामिल किया गया है। 

नौसेना अपने प्रोजेक्ट 75 इंडिया के तहत छह नई पनडुब्बियों के निर्माण की योजना पर भी काम कर रही है। नौसेना द्वारा भारतीय कंपनियों और विदेशी मूल की उपकरण निर्माताओं के साथ छह और पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना रणनीतिक साझेदारी नीति के तहत शुरू की जाएगी।  

उल्लेखनीय है कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की गतिविधियों से भारत को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए भारतीय नौसेना अपने बुनियादी ढांचे में सुधार की योजना बना रही है। इसके तहत नए जहाजों की खरीद भी शामिल है।

 

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