जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारतीय छात्रों के पलायन को रोकने के लिए दुनिया के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों के कैंपस जहां देश में खोलने की तैयारी की जा रही है, वहीं देश के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थान भी अन्य देशों में अपने कैंपस खोलने को लेकर उत्साहित हैं। इनमें फिलहाल सात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) सहित कई निजी विश्वविद्यालयों की रुचि सामने आई है।

सरकार भी इसको लेकर सैद्धांतिक रूप से सहमत है। लेकिन वह इससे पहले सभी तकनीकी पहलुओं को जांचने और इसका रोडमैप बनाने में जुटी है। माना जा रहा है कि जल्द ही इसको लेकर अहम निर्णय लिया जा सकता है। शिक्षा मंत्रालय ने यह पहल तब की है, जब आइआइटी मद्रास ने खाड़ी देशों की मांग पर अपना कैंपस खोलने की रुचि जताई।

इसके बाद मंत्रालय ने दुनिया के दूसरे देशों के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों की तरह अपने भी उच्च शिक्षण संस्थानों को आगे बढ़ाने की योजना बनाई। इसको लेकर मंत्रालय ने 16 सदस्यीय एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। इसमें आइआइटी के पूर्व और मौजूदा निदेशकों को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा कमेटी में निजी और देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भी रखा गया है।

खास बात यह है कि भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसा विचार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) से मिला है। इसमें देश के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों को दूसरे देशों के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों की तरह स्वतंत्रता देने की पैरवी की गई है। यह योजना वैसे तो दो साल पहले बनी थी, लेकिन अभी इसे रफ्तार दिया जा रहा है।

मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो फिलहाल जिन देशों में भारतीय उच्च संस्थानों के कैंपस खोलने की योजना बनाई जा रही है, उनमें ऐसे देश शामिल हैं, जहां से मौजूदा समय में पढ़ने के लिए सबसे ज्यादा छात्र आते हैं। इनमें आसियान देशों के साथ अफ्रीकी और खाड़ी देश शामिल हैं। कई देशों के साथ कैंपस खोलने को लेकर बातचीत भी हो गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार ऐसे संस्थानों की वित्तीय सहित प्रशासनिक क्षमता को जांचने के बाद इसकी अनुमति दे सकती है। 

Edited By: Krishna Bihari Singh