भारतीय तटरक्षक बल का बड़ा कदम, महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने पर होगा विचार
भारतीय तटरक्षक बल ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वह विजिलेंस क्लीयरेंस के बाद महिला अधिकारियों, जिनमें प्रियंका ...और पढ़ें
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तटरक्षक बल महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर सकारात्मक विचार करेगा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय तटरक्षक बल ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि विजिलेंस क्लीयरेंस रिपोर्ट मिलने के बाद शार्ट सर्विस अप्वाइंटी (एसएसए) अधिकारी प्रियंका त्यागी और अन्य पात्र महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।
यह निर्णय महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, क्योंकि स्थायी कमीशन मिलने से अधिकारियों को सेवानिवृत्ति तक सेना में एक सुरक्षित और लंबा करियर मिलता है, जो कि केवल 10 से 14 वर्ष के सीमित कार्यकाल वाले शार्ट सर्विस कमीशन से पूरी तरह भिन्न है।
इससे पहले, प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने तटरक्षक बल के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि महिलाओं को इस प्रकार अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने तटरक्षक बल की नीति को "अस्पष्ट" और "मनमाना" करार देते हुए पूछा था कि जब पुरुषों को स्थायी कमीशन मिल सकता है, तो महिलाओं के साथ यह भेदभाव क्यों? कोर्ट की इस दो टूक और सख्त फटकार के बाद ही बल का यह संवेदनशील रुख सामने आया है, जिसने लैंगिक न्याय की उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है।
यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब 14 साल से अधिक की शानदार सेवा दे चुकीं अधिकारी प्रियंका त्यागी को स्थायी कमीशन देने से इन्कार कर दिया गया और उन्हें सेवामुक्त करने का आदेश दिया गया। प्रियंका त्यागी वही साहसी महिला हैं, जिन्होंने पूर्वी क्षेत्र में गश्त करने वाले डोर्नियर विमान के पहले सर्व-महिला चालक दल का बतौर कप्तान ऐतिहासिक नेतृत्व किया था। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें सेवा में पुनः बहाल करने का आदेश दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट ने तटरक्षक बल को विजिलेंस क्लीयरेंस रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दो सप्ताह के भीतर प्रियंका त्यागी और अन्य योग्य महिलाओं को स्थायी कमीशन देने के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने अपने रुख से यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायपालिका समाज में बदलाव की संवाहक है और सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता के रास्ते में आने वाली हर छोटी-सी बाधा या पुरानी मानसिकता को अब बदलना ही होगा। संवेदनशीलता और न्याय की यह बयार न केवल इन महिला अधिकारियों के लिए, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक नया सवेरा लेकर आई है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
