बंगाल के बेंगडुबी सैन्य क्षेत्र में हाथियों के लिए बनेंगे चार सुरक्षित कॉरिडोर, सेना हटाएगी कंटीली बाड़
वन विभाग और भारतीय सेना उत्तर बंगाल के बेंगडुबी सैन्य छावनी में हाथियों के लिए चार स्थायी कॉरिडोर विकसित कर रहे हैं।

सैन्य क्षेत्र में हाथियों के लिए बनेंगे चार सुरक्षित कॉरिडोर

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मोहन झा, सिलीगुड़ी। उत्तर बंगाल में मानव-हाथी संघर्ष रोकने और वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने की दिशा में वन विभाग और भारतीय सेना ने महत्वपूर्ण पहल की है। दार्जिलिंग जिले के अधीन बागडोगरा के निकट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बेंगडुबी सैन्य छावनी के भीतर हाथियों के लिए चार स्थायी कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए सेना के अधीन लगभग 230 एकड़ जमीन में हाथियों के आवागमन में बाधक संरचनाओं को हटाने की योजना है।
इन कॉरिडोरों में भारी सैन्य वाहनों की आवाजाही और कंटीली तारों की बाड़ जैसी बाधाओं से मुक्त सुरक्षित रास्ते तैयार किए जाएंगे। साथ ही हाथियों के अनुकूल पेड़-पौधे लगाने और छोटे जलाशय बनाने की भी योजना है।
कर्सियांग फॉरेस्ट डिवीजन और सेना की त्रिशक्ति कोर के अधिकारियों ने संयुक्त सर्वेक्षण कर बेंगडुबी सैन्य क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही से जुड़े 26 अत्यधिक जोखिम वाले और पांच आंशिक जोखिम वाले स्थानों की पहचान की है। इन स्थानों पर मौजूद कृत्रिम बाधाओं को हटाने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग को सुगम बनाना और सैन्य प्रतिष्ठान की सुरक्षा व्यवस्था को भी सुरक्षित रखना है।
कर्सियांग के डीएफओ देवेश पांडेय के अनुसार प्रस्तावित कारिडोरों में हाथियों के अनुकूल वनस्पतियां लगाई जाएंगी। छोटे जलाशय विकसित करने की भी योजना है, ताकि हाथियों को रास्ते में भोजन और पानी उपलब्ध हो सके। वहीं, सैन्य क्षेत्र के भीतर लगभग 35 एकड़ में फैले इंजीनियर पार्क को हटाने का प्रस्ताव है। इससे जंगल के दो बड़े हिस्सों को दोबारा जोड़ने में मदद मिल सकती है।
उत्तर बंगाल का तराई और डुवार्स क्षेत्र हाथियों के प्रमुख आवास और आवागमन क्षेत्रों में शामिल है। हाथियों के झुंड नेपाल के झापा क्षेत्र और मेची नदी के आसपास से नक्सलबाड़ी, टुकुरियाझार, बागडोगरा, बामनपोखरी, सुकना और महानंदा अभयारण्य के जंगलों के बीच आवाजाही करते हैं। आगे उनका आवागमन डुवार्स और असम की दिशा तक होता है।
पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, चाय बागानों के विस्तार, सड़कों और रेलवे के विकास तथा सैन्य प्रतिष्ठानों के निर्माण से हाथियों के पारंपरिक रास्ते प्रभावित हुए हैं। बागडोगरा के जंगल के बीच स्थित सेना के 16 फील्ड एम्युनिशन डिपो के आसपास कंटीली बाड़, ऊंची चारदीवारी और अन्य संरचनाओं के कारण हाथियों के आवागमन में बाधाएं पैदा होती रही हैं।
रास्ता बाधित होने से हाथियों के आबादी वाले इलाकों और कृषि भूमि में प्रवेश करने का खतरा बढ़ जाता है।
सैटेलाइट मैपिंग से तैयार हुई रिपोर्ट
वन विभाग और सेना के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण के दौरान सैन्य क्षेत्र के विभिन्न जीपीएस बिंदुओं की जांच की। सैटेलाइट मैपिंग और ड्रोन से प्राप्त तस्वीरों के आधार पर विस्तृत डिजिटल मानचित्र और रिपोर्ट तैयार की गई है। इसे अंतिम अनुमोदन के लिए कर्सियांग के डीएफओ कार्यालय भेजा गया है।
वहां से रिपोर्ट राज्य सरकार, वन विभाग के मुख्यालय, रक्षा मंत्रालय और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजी जाएगी। कर्सियांग फॉरेस्ट डिवीजन के एडीएफओ राहुल देव मुखोपाध्याय ने बताया कि सैन्य क्षेत्र में चिह्नित जोखिम वाले स्थानों पर मौजूद कृत्रिम बाधाओं को हटाने की योजना है।
हाथियों के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी प्राथमिकता
वन विभाग और सेना की यह पहल सफल होती है तो सुकना और बागडोगरा के बीच हाथियों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है। इससे हाथियों के सैन्य क्षेत्र में भटकने, फसलों को नुकसान पहुंचाने और मानव-हाथी संघर्ष की आशंका कम होने की उम्मीद है। साथ ही वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को जोड़ने और संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान की सुरक्षा बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
