लद्दाख, एएनआइ। पूर्वी लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर चीन से जारी तनाव के बीच भारतीय सेना किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को धार देने में जुटी हुई है। भारतीय सेना ने अब बोफोर्स होवित्जर तोपों (Bofors howitzers) को तैयार करना शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, लद्दाख में सेना के इंजीनियर 155mm की इन तोपों की सर्विसिंग कर रहे हैं। 

इन तोपों को आर्टिलरी रेजिमेंट में 1980 के दशक के मध्य में शामिल किया गया था। ये तोपें लो एंड हाई दोनों एंगल से फायरिंग करने में सक्षम हैं। इनकी सर्विसिंग का काम पूरा होने के बाद इन्हें लद्दाख में तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय वायु सेना लद्दाख की अग्रिम चौकी तक जरूरी सामग्री पहुंचाने का काम कर रही है। सर्विसिंग के काम में जुटे इंजीनियरों ने कहा कि कुछ ही दिनों में ये तोपें सीमा पर गर्जने के लिए तैयार हो जाएंगी।

अधिकारियों ने बताया कि इन तोपों को समय-समय पर सर्विसिंग और मेंटनेंस की जरूरत होती है। इसके लिए बकायदा टेक्नीशियंस को तैनात किया गया है। इस तोप ने कारगिल युद्ध के दौरान पूरे युद्ध का रुख बदल दिया था। इन तोपों ने जम्मू-कश्मीर के द्रास में ऑपरेशन विजय की लड़ाइयों को जीतने में बड़ी भूमिका निभाई थी। वर्कशॉप में तैनात इंजीनियरों पर आपा‍त स्थितियों में तेजी से इन हथियारों को संचालन के लायक बनाने की जिम्‍मेदारी होती है।  

ऊंचाई पर बैठे दुश्मनों को मार गिराने में इस तोप का कोई तोड़ नहीं है। वर्कशॉप को टैंक की फायरिंग पिन से लेकर इंजन असेंबल तक सब कुछ मुहैया कराना होता है। उल्‍लेखनीय है कि मौजूदा वक्‍त में सीमा पर चीन की आक्रामकता को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी तैनाती भी बढ़ाई है। बीते 20 दिनों में भारत और चीन के बीच उत्तरी पैंगोंग झील के पास फायरिंग की कम से कम तीन घटनाएं हुई हैं। यही नहीं इस दौरान दोनों पक्षों के बीच 100-200 राउंड हवाई फायरिंग भी हुई है।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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