संजय मिश्र, नई दिल्ली। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर अतिक्रमण को लेकर जारी गतिरोध का समाधान निकालने के लिए भारत और चीन के शीर्ष सैन्य कमांडर स्तर पर हुई बातचीत तनाव घटाने की दिशा में सकारात्मक मानी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि शनिवार को हुई इस बैठक में भारत ने चीन से दो-टूक कहा है कि तनाव घटाने के लिए एलएसी पर अप्रैल की पूर्व स्थिति को बहाल किया जाना जरूरी है। 

जब तक नहीं हटोगे, पीछे नहीं हटेंगे 

भारत ने चीन को स्पष्ट कर दिया है कि जब तक चीनी सैनिक एलएसी का सम्मान करते हुए पीछे नहीं हटते तब तक भारतीय सेना मजबूती से डटी रहेगी। साथ ही भारत ने अपने इलाके में किए जा रहे निर्माण पर चीन की आपत्तियों को भी अनुचित बताया है। मालूम हो कि लद्दाख में एलएसी पर चीन के सबसे गंभीर अतिक्रमण का बातचीत से हल निकालने की दोनों देशों की घोषणा के तहत शनिवार को शीर्ष कमांडर स्तर की सैन्य वार्ता हुई। 

हरिंदर सिंह ने किया प्रतिनिधित्‍व 

चुशूल सेक्टर के सामने चीन के मोल्डो सैन्य बेस में हुई इस बैठक में भारत का नेतृत्व लेह स्थित सेना की 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया और उनके साथ दो ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी भी शामिल थे। चीनी प्रतिनिधिमंडल की अगुआई पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के दक्षिण शिनजियांग सैन्य कमांड के मेजर जनरल लियो लिन ने किया। हालांकि बातचीत को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। 

जारी रहेगा वार्ताओं का दौर 

एक सैन्य प्रवक्ता ने केवल इतना कहा कि भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर गतिरोध का हल निकालने के लिए वार्ताओं का दौर अभी जारी रहेगा। समझा जाता है कि तीन घंटे से अधिक चली इस बैठक में भारत ने एलएसी पर चीनी अतिक्रमण पर अपनी गंभीर आपत्ति जताते हुए पहले की स्थिति बहाल किए जाने को तनाव खत्म करने के लिए अपरिहार्य बताया है। 

सड़क निर्माण पर भड़का ड्रैगन 

चीनी पक्ष ने एलएसी के निकट भारत के अपने इलाके में किए जा रहे सड़क निर्माण को रोके जाने की बात उठाई। हालांकि इस पर भारतीय सैन्य अधिकारियों ने साफ कर दिया कि चीन की ऐसी आपत्ति वाजिब नहीं क्योंकि निर्माण कार्य भारत अपने अधिकार वाले इलाके में कर रहा है। भारत की ओर से एलएसी पर यथास्थिति बहाल किए जाने की शर्त एक तरह से स्पष्ट कर दी गई।

भारत करता रहेगा पेट्रोलिंग 

इस बातचीत में पैंगोंग त्सो लेक के फिंगर-4 और फिंगर-8 पर चीनी अतिक्रमण को लेकर भी बातचीत हुई। गलवन घाटी में चीनी सैनिकों के तीन दिन पहले कुछ पीछे हटने के बाद उम्मीद की जा रही है कि इस इलाके का मुददा जल्द सुलझ सकता है। वहीं दोनों फिंगर हाइट पर पीएलए सैनिकों के अचानक घुसपैठ का मसला सुलझने में वक्त लग सकता है। भारत का रुख साफ है कि उसकी टीम फिंगर-8 तक पहले की तरह पैट्रोलिंग करती रहेगी और चीन फिंगर-4 तक ही पैट्रोलिंग को सीमित रखे।

अब तक 12 दौर की बातचीत

वहीं सूत्रों ने बताया कि दोनों सेनाओं में स्थानीय कमांडरों के स्तर पर अब तक 12 दौर की बातचीत हो चुकी है जिसमें मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों के बीच तीन दौर की बातचीत भी शामिल है। उक्‍त वार्ता का कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने पर ही शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर पर बातचीत हुई है।

भारत ने कहा, चीन ने बढ़ाया तनाव 

भारत ने अब तक हुई वार्ताओं के सभी दौर में स्पष्ट कहा है कि एलएसी पर सैनिकों की तैनाती बढाने का सिलसिला चीन ने शुरू किया है। ऐसे में भारत के पास जवाबी कार्रवाई के तहत अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। एलएसी पर अतिक्रमण करने के बाद से चीनी सैनिक फिंगर-4 इलाके से भारतीय सैनिकों को गश्त के लिए बढ़ने से रोक रहे हैं।

बातचीत के जरिए मसला सुलझाने पर जोर 

इस बातचीत से ठीक एक दिन पहले दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत हुई थी जिसमें दोनों पक्षों में गतिरोध का हल शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए निकालने और इसके किसी बड़े टकराव में नहीं बदलने देने पर सहमति बनी थी। यही नहीं दोनों देश एक-दूसरे की संवेदनाओं और चिंताओं का ध्यान रखते हुए समाधान निकालने पर सहमत हुए थे।

चीनी सैनिकों के जमावड़े पर आपत्ति 

सूत्रों की मानें तो वार्ता के लिए पहले ही तय हो गया था कि भारतीय पक्ष पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी, पैंगोंग सो और गोगरा में यथा स्थिति की पुन:बहाली के लिए दबाव बनाएगा। यही नहीं क्षेत्र में चीनी सैनिकों के जमावड़े का भी विरोध करेगा। वार्ता में चीन से कहा जाएगा कि वह भारत द्वारा सीमा के भीतर किए जा रहे आधारभूत ढांचे के विकास का विरोध न करे।

यथास्थिति को बदलने की कोशिश 

दोनों देशों के बीच यह बातचीत पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में खास तौर पर पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर गतिरोध को हल करने के लिए हुई जहां चीनी सेना पीएलए ने यथास्थिति को बदलने की कोशिश की है। रिपोर्टों में कहा गया था चीनी सेना ने पैंगोंग झील के फिंगर-4 क्षेत्र में बड़ी संख्या में जमावड़ा किया है।

सैन्य ढांचे में इजाफा किया 

सूत्रों ने बताया कि उपग्रह से ली गई तस्वीरों में नजर आ रहा है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के अपनी तरफ के क्षेत्र में सैन्य आधारभूत ढांचे में महत्वपूर्ण रूप से इजाफा किया है। यही नहीं चीनी सेना एलएसी के निकट अपने पीछे के सैन्य अड्डों पर रणनीतिक रूप से जरूरी चीजों का भंडारण कर रही है। इनमें तोप और भारी सैन्य उपकरणों शामिल हैं।

कड़ा रुख रहेगा बरकरार 

पैंगोंग झील को आठ फिंगर क्षेत्रों के हिसाब से विभाजित किया गया है। झील के साथ पहाड़ियों के उभरे हुए हिस्से को ही फिंगर कहा जाता है। अब तक भारत कई फिंगर के क्षेत्र को नियंत्रित करता रहा है। पिछले महीने के शुरू में गतिरोध शुरू होने के बाद भारतीय सैन्य नेतृत्व ने फैसला किया था कि भारतीय सेना के जवान चीनी सेना के आक्रामक रवैये के खिलाफ पैंगोंग सो, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी में कड़ा रुख अपनाएंगे। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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