संजय मिश्र, नई दिल्ली। भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर जारी सैन्य तनातनी घटाने के लिए तेज और सक्रिय पहल की सैद्धांतिक सहमति बनी है। दोनों पक्षों ने सीमा पर प्राथमिकता के साथ जल्द, चरणबद्ध और सिलसिलेवार तरीके से तनाव घटाने पर जोर दिया है। सैन्‍य सूत्रों ने बताया कि बातचीत में दोनों ही पक्ष एलएसी पर तनाव कम करने को लेकर प्रतिबद्ध नजर आए। सूत्रों का यह भी कहना है कि गतिरोध को खत्‍म करने के लिए दोनों ही पक्षों के बीच आगे भी सैन्‍य एवं कूटनीति के स्‍तरों पर और बैठकें होने की संभावना है। सूत्रों का मानना है कि एलएसी पर जारी गतिरोध को खत्‍म करने की प्रक्रिया बेहद जटिल है। 

सूत्रों ने बताया कि आगामी बैठकों में मसले का आपसी सहमति से द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल के आधार पर समाधान निकालने की कोशिश होगी। इस तीसरी बैठक में दोनों पक्षों ने जल्द से जल्द, चरणबद्ध तरीके से पीछे हटने पर जोर दिया। हालांकि जमीनी स्तर पर भारत कोई भी जोखिम लेने को तैयार नहीं है। भारत ने साफ कर दिया है कि गतिरोध का रास्ता निकालने के लिए विश्वास बहाली के उपायों के तहत चीन को एलएसी से अपने सैनिकों को पीछे हटाना ही पड़ेगा।  चुशूल में 30 जून को हुई 12 घंटे की मैराथन बैठक में एलएसी से सैनिकों को पीछे हटाने के तौर-तरीकों पर कोई रजामंदी तो नहीं हुई लेकिन दोनों पक्षों ने चरणबद्ध तरीके और तेजी के साथ तनाव घटाने पर जोर दिया।

बैठक में भारत ने साफ कर दिया कि बीते छह जून को कोर कमांडरों की पहली वार्ता में एलएसी पर तनाव घटाने के लिए जो सहमति बनी थी और 22 जून को दूसरी बैठक में इसके कार्यान्वयन के लिए जो रजामंदी हुई थी उस पर अमल करके तनाव घटाया जा सकता है। बैठक में गलवन की घटना के बाद 17 जून को भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की फोन पर हुई वार्ता में टकराव घटाने के लिए 6 जून के समझौते पर कार्यान्वयन के लिए परिपक्वता और जिम्मेदारी से आगे बढ़ने पर बनी सहमति पर भी दोनों पक्ष सहमत दिखे। सूत्रों ने बताया कि भारत और चीन दोनों ने बैठक में यह स्वीकार किया कि एलएसी पर आमने-सामने की तनातनी से सैनिकों को पीछे हटाना एक जटिल विषय है और ऐसे में अफवाहों की अनदेखी की जानी चाहिए।

लद्दाख के अग्रिम मोर्चो पर दोनों पक्षों के अपने सैनिकों और हथियारों की तैनाती में भारी इजाफा करने के बावजूद सैन्य और कूटनीतिक स्तरों पर वार्ता का सिलसिला जारी रखने पर दोनों सहमत हैं। सूत्रों ने कहा कि आने वाले दिनों में एलएसी पर शांति बहाली के लिए सैन्य व कूटनीतिक वार्ताओं का दौर जारी रहेगा। एलएसी पर अपनी जबरदस्त सैन्य मोर्चेबंदी के सहारे भारत को दबाव में लाने के प्रयासों का असर होते न देख चीन ने इस वार्ता के दौरान सैनिकों को आमने-सामने के टकराव से हटाने की बात कह अपने रुख में थोड़ी नरमी लाने के संकेत दिए।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कोर कमांडरों की वार्ता के दौरान 6 और 22 जून की बैठकों में तय मुद्दों के कार्यान्वयन पर दोनों देशों के सहमत होने की बात कह इस नरमी का संकेत भी दिया। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि अग्रिम मोर्चे पर सैनिकों को आमने-सामने के टकराव से पीछे हटाने और तनाव घटाने की दिशा में दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति का चीन स्वागत करता है। साथ ही उम्मीद जताई कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय पक्ष चीनी पक्ष के साथ मिलकर काम करेगा। चीन ने भी सीमा पर सैन्य तनातनी से बढ़े तनाव को घटाने के लिए सैन्य व कूटनीतिक वार्ता के सारे चैनल खुले रखने की बात कही है।

हालांकि एलएसी अतिक्रमण को लेकर जमीनी स्तर पर चीन की चालबाजी में अभी तक बदलाव नहीं आने को देखते हुए भारतीय सेनाओं ने भी चौतरफा अग्रिम मोर्चे पर टैकों के साथ हथियारों की तैनाती में इजाफा कर दिया है। पैंगोग त्सो लेक इलाके में चीनी सैनिकों पर सतर्क निगाह रखने के लिए नौसेना के कई विशेष पेट्रोलिंग बोट भी लद्दाख भेजे दिए गए हैं। रक्षामंत्री लद्दाख दौरे के दौरान स्थानीय सैन्य कमांडरों के साथ एलएसी पर टकराव और सैन्य तैनाती की समीक्षा करेंगे। सूत्रों के अनुसार राजनाथ सिंह गलवन घाटी में चीनी सैनिकों को खदड़ने वाले घायल बहादुर सैनिकों से भी मुलाकात करेंगे।