नई दिल्ली, एएनआई: भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी और इंडो पैसिफिक क्षेत्र के अलग-अलग वायु सेनाओं के वायु सेना प्रमुखों के बीच गुरुवार को वर्चुअल टेलीकांफ्रेंस आयोजित की गई। इंडियन एयर फोर्स ने बताया कि इस दौरान महत्वपूर्ण स्थानों से संचालन के दौरान वितरित रसद की चुनौतियों समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई। वहीं इसी महीने विदेश मंत्री डा एस जयशंकर ने अपने अमेरिकी समकक्ष एंटनी ब्लिंकन के साथ बातचीत की थी। जि‍समें दोनों के बीच वर्तमान द्विपक्षीय मुद्दों इंडो पैसिफिक और वैश्विक मामलों को लेकर चर्चा हुई थी।

रक्षा मंत्री ने किया प्रतिबद्ध का बखान

पिछले साल इंडो पैसिफिक रीजनल डायलाग में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि मुझे खुशी है कि इस साल इंडो पैसिफिक के रीजनल डायलाग पूरी चुनौतियों के साथ सुचारू ढंग से हुए। आने वाले समय में ये हमारे लिए सकारात्मक साबित होंगे। पैसिफिक रीजन में हम भारत के जल और विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। साथ ही कहा था कि भारत समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) 1982 में निर्धारित किए गए सभी देशों के अधिकारों का सम्मान करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। हम यूएनसीएलओएस, 1982 के तहत शासनादेश के रूप में कानून आधारित समुद्री प्रणालियों के रखरखाव का समर्थन करते हैं। साथ ही अपने क्षेत्रीय जल और विशेष आर्थिक क्षेत्र के संबंध में देश के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

इंडो-पैसिफिक की चुनौतियों पर भारत गंभीर

विदेश मंत्री एस जयशंकर के मुताबिक भारत इंडो पैसिफिक को एक स्वतंत्र, खुले समावेशी क्षेत्र के रूप में देखता है जो प्रगति और समृद्धि की एक साझा खोज में सभी को शामिल करता है। साथ ही कहा कि भारत इंडो-पैसिफिक की चुनौतियों को बहुत गंभीरता से देखता है। उन्होंने कहा था कि, एक उज्जवल भविष्य के लिए तीन क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं, जो की स्वास्थ्य, जलवायु और डिजिटल हैं। ये हमारी अर्थव्यवस्थाओं के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक तौर पर प्रतिस्पर्धा और नेतृत्व का निर्माण करने के लिए भी हमारी साझेदारी का महत्वपूर्ण अंग है।

Edited By: Amit Singh