नई दिल्ली। भारतीय नौसेना पिछले कुछ सालों में काफी मजबूत हुई है। आने वाले समय में भारत को महाशक्ति के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन इन सब के बावजूद भारत के पास विमान वाहक पोत अगले कुछ महीनों के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा। भारत का अकेला विमान वाहक पोत आइएनएस विक्रमादित्य भी मेंटेनेंस की वजह से आठ महीने बाद ही वापस लौट पाएगा।

मंगलवार को सीएजी ने सदन में पेश की अपनी रिपोर्ट में कहा कि ज्यादा चिंता की बात ये है कि 44,570 टन वजनी आईएनएस विक्रमादित्य को ही अगले 6 से 7 सालों तक अकेले ही मोर्चा संभालना होगा क्योंकि 40000 टन वजनी विमान वाहक पोट आइएनएस विक्रांत साल 2023 तक ही तैयार हो पाएगा।

हालांकि भौगोलिक परिस्तिथियों को देखते हुए भारत दीर्घकालीन योजनाओं के क्रियान्वयन की रणनीति पर काम कर रहा है। नौसेना लंबे समय से तीन विमान वाहक पोत की मांग करती रही है। वेस्टर्न और इस्टर्न बोर्ड के लिए 1-1 विमान वाहक पोत और तीसरे को कहीं भी किसी भी समय भेज सकने के लिए ताकि कभी भी किसी भी फ्रंट पर मदद पहुंचाई जा सके मगर सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ एक ही विमान वाहक पोत तैयार हो पाएगा और उसे भी तैयार होने में काफी समय लग जाएगा।

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Posted By: Atul Gupta