नई दिल्ली, प्रेट्र। भारत का रणनीतिक और महत्वपूर्ण क्षेत्र अब अमेरिका निर्मित जीपीएस पर निर्भर नहीं रहेगा। इस दिशा में शुक्रवार को महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इसरो की क्षेत्रीय स्थिति प्रणाली एनएवीआइसी अब भारतीय परमाणु घड़ी पर निर्भर रहेगी।

इसरो के आइएसटीआरएसी सेल और राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला ने एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। इसके तहत अंतरिक्ष एजेंसी को राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला समय की सटीकता तय करने में मदद करेगी। समय अंतरिक्ष एजेंसी के उपग्रहों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस कदम से अंतरिक्ष एजेंसी अब अमेरिकी जीपीएस पर निर्भर नहीं रहेगी।

विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) के तहत एनपीएल संस्थान भारत के पुराने संस्थानों में से एक है। इसकी स्थापना आजादी से पहले ही हुई थी। अपनी परमाणु घडि़यों से यह भारतीय मानक समय मुहैया कराता है। ये परमाणु घडि़यां अंतरराष्ट्रीय माप तौल ब्यूरो (बीआइपीएम) फ्रांस की परमाणु घडि़यों के साथ संबद्ध हैं। बीआइपीएम ही दुनिया को वैश्विक समय समन्वय (यूटीसी) मुहैया कराता है। दुनिया में 400 परमाणु घडि़यां हैं और इनमें से भारत के पास चार से पांच घडि़यां हैं। ये घडि़यां एकदम सटीक होती हैं। 10 करोड़ साल में इन घडि़यों के काम में एक सेकंड की चूक होती है। इस तरह के अत्यंत कीमती समय में नैनो सेकंड का भी अपना महत्व होता है। यह इसरो के उपग्रहों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Posted By: Manish Negi