नई दिल्ली, (जागरण ब्यूरो)। कश्मीर में मानवाधिकार के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा कर भारत को घेरने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान को अब उसी की भाषा में जवाब मिलेगा। बलूचिस्तान में जारी पाक के दमन को लेकर अभी तक पीएम नरेंद्र मोदी और भारतीय विदेश मंत्रालय ने जो बातें की है वह सिर्फ बानगी है। अभी तो भारत इस मुद्दे पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिर्फ बेनकाब करेगा लेकिन इसके बावजूद उसकी आदतों में सुधार नहीं होता है तो ब्लूचिस्तान की आजादी का भारत खुल कर समर्थन करने से भी नहीं हिचकेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने भारत की इस रणनीति की तरफ यह कहते हुए संकेत दिया कि, 'जब तक बलूचिस्तान में दमन करने जैसे हालात रहेंगे तब तक भारत इस मुद्दे को उठाएगा।' भारतीय विदेश मंत्रालय का यह जवाब इसलिए अहम है कि दस दिनों बाद संयुक्त राष्ट्र की सालाना बैठक शुरु होने वाली है।

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पाकिस्तान इसमें कश्मीर के मुद्दे को जोर शोर से उठाने की तैयारी में है। इसके लिए पाक पीएम नवाज शरीफ ने दुनिया भर के अपने कूटनीतिक विशेषज्ञों की बैठक बुला कर रणनीति बनाई है। साथ ही अपने 22 सांसदों को दुनिया भर में जा कर कश्मीर मुद्दे को उठा रहा है। साथ ही पाक पीएम नवाज शरीफ स्वयं न्यूयार्क में यूएन की सालाना बैठक में जाने को तैयार हैं ताकि कश्मीर में भड़की आग में और घी डाला जाए।

दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दल की अगुवाई विदेश मंत्री सुषमा स्वराज करेंगी। स्वराज संभवत: 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र में अपना भाषण देंगी। तब तक शरीफ का भाषण भी खत्म हो चुका होगा। भारत की कश्मीर में मानवाधिकार का मुद्दा उठाने के लिए संयुक्त राष्ट्र परिषद (यूएनएचआरसी) के दावे की हवा तो निकालेगा ही लेकिन साथ ही बलूचिस्तान में पाकिस्तान सेना की तरफ से चल रहे दमनकारी कार्यो का भी पूरा हवाला देगा। जब से पीएम मोदी ने भारत की आजादी दिवस के मौके पर बलूचिस्तान का मुद्दा उठाया है तब से वहां पर पाक सेना ने अपनी दमनकारी नीतियों को और तेज कर दिया है।

बलूचिस्तान में आजादी की मांग करने वाले लोगों को अगवा कर उनकी लाशों को रात के अंधेरे में सड़क किनारे फेंकने का सिलसिला काफी बढ़ गया है। भारत की तरफ से इन मुद्दों की तरफ अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान खींचा जाएगा।

भारत ने बुधवार को ही यूएनएचआरसी की बैठक में कश्मीर में मानवाधिकार मुद्दे को उठाने पर पाकिस्तान को खूब लताड़ लगाई है। भारत ने यूएनसीएचआरसी के जम्मू व कश्मीर राज्य में प्रतिनिधि भेजने के प्रस्ताव को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि भारतीय लोकत्रांतिक व्यवस्था में कश्मीर में चल रहे आंदोलन का समाधान निकालने की पूरी व्यवस्था है।

भारत लोकत्रांतिक तरीके से इसका समाधान निकालने में जुटा हुआ है। दूसरी तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से में न तो लोकतंत्र है और न ही वहां मानवाधिकारों का कोई महत्व है। पाक सरकार को पहले अपने देश में मानवाधिकारों की रक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

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