होर्मुज संकट के बीच मुंबई में भारत-अमेरिका-यूएई की बैठक, ऊर्जा सुरक्षा और तेल आपूर्ति को निर्बाध रखने पर चर्चा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति संकट के बीच भारत, अमेरिका और यूएई के विदेश मंत्रियों ने मुंबई ...और पढ़ें

पश्चिम एशिया तनाव के बीच मुंबई में भारत-अमेरिका-यूएई की अहम बैठक (फोटो- ANI)
HighLights
मुंबई में भारत, अमेरिका, यूएई विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक।
पश्चिम एशिया तनाव, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा।
भारत-यूएई ने द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग की समीक्षा की।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच भारत, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रणनीतिक समन्वय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया है।
मंगलवार को मुंबई में तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक हुई। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन पर हूती हमलों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और यूएई के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नाहयान शामिल हुए। रूबियो ने इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर कहा कि जयशंकर और शेख अब्दुल्ला के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं पर चर्चा करना अच्छा रहा।
बैठक में पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के आर्थिक प्रभावों पर भी विचार किया गया। रूबियो मंगलवार दोपहर मुंबई पहुंचे, जबकि शेख अब्दुल्ला 19 और 20 अक्टूबर को भारत की आधिकारिक यात्रा पर थे। तीनों देशों के बीच यह संवाद इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर तेल आपूर्ति, व्यापार और समुद्री परिवहन पर पड़ सकता है।
भारत ऊर्जा का बड़ा आयातक है, जबकि अमेरिका और यूएई भी क्षेत्रीय सुरक्षा तथा ऊर्जा प्रवाह को निर्बाध बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।जयशंकर और शेख अब्दुल्ला की द्विपक्षीय बैठक भीत्रिपक्षीय वार्ता से पहले जयशंकर ने शेख अब्दुल्ला के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, लाजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की।
जयशंकर ने कहा कि भारत और यूएई के संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत लगातार आगे बढ़ रहे हैं। पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत संवाद और कूटनीति के जरिये शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।
उन्होंने व्यापार, ऊर्जा और उर्वरक की आपूर्ति को मुक्त, सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने हाल के उच्चस्तरीय संपर्कों का उल्लेख करते हुए जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद की भारत यात्रा, क्राउन प्रिंस शेख खालिद की भागीदारी और मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यूएई यात्रा का जिक्र किया।
भारत और यूएई प्रमुख व्यापारिक एवं निवेश साझेदार हैं। दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में कारोबार के निपटान की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं। रक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।
