'ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करेंगे...', ट्रेड डील पर डोभाल ने रूबियो को सुनाई थी खरी-खरी
अमेरिका द्वारा भारत पर 18% ट्रेड टैरिफ लगाने के बाद, एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ...और पढ़ें

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बीते दिनों भारत पर लगाए गए ट्रेड टैरिफ को 18 प्रतिशत करने की घोषणा कर दी। इसका कारण राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करने का भारत का दृढ़ रुख रहा।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के लिए एक संदेश लेकर अमेरिका गए थे।
इस दौरान अजीत डोभाल ने रूबियो से कहा था कि भारत राष्ट्रपति ट्रंप और उनके शीर्ष सहयोगियों की धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। भारत अतीत में भी प्रतिकूल अमेरिकी सरकारों का सामना कर चुका है और वह झुकने की बजाय वर्तमान राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म होने की प्रतीक्षा करेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बैठक के बाद अमेरिका से रिश्ते सुधारने के लिए डोभाल को वॉशिंगटन भेजा था। इस दौरान डोभाल और रूबियो की मुलाकात हुई थी।
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'अगर बात नहीं बनी तो ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करेंगे'
इस मुलाकात से जुड़े भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, डोभाल ने रूबियो से कहा था कि अगर ट्रेड डील पर बात नहीं बनी भारत राष्ट्रपति ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने तक इंतजार करने को तैयार है, लेकिन वह यह भी चाहता है कि ट्रंप और उनके सहयोगी भारत की सार्वजनिक रूप से निंदा न करें, ताकि रिश्तों को पटरी पर लाया जा सके।
इस बैठक के कुछ ही समय बाद ही तनाव कम होने के पहले संकेत दिखे थे। 16 सितंबर 2025 को ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन किया और भारत में शानदार काम करने के लिए उनकी तारीफ की थी। वर्ष के अंत तक दोनों नेताओं ने टैरिफ कम करने की डील की तरफ बढ़ते हुए फोन पर चार बार और बात की।
क्या डोभाल के अल्टीमेटम का हुआ फायदा?
सार्वजनिक तौर पर हालांकि, दोनों ओर से डील होने का कोई संकेत नहीं दिया गया था। लिहाजा सोमवार को भारत में कई अधिकारी तब हैरान रह गए, जब ट्रंप ने इंटरनेट मीडिया पर इस डील के बारे में पोस्ट किया। दरअसल, सितंबर में रूबियो के साथ डोभाल की मुलाकात अमेरिका के लिए एक संकेत थी कि भारत अमेरिका को दीर्घकालिक साझीदार के तौर पर देखता है और आपसी रिश्तों को और खराब नहीं होने देना चाहता है।
भारत में आम राय थी कि चीन के एशिया में बढ़ते प्रभाव रोकने और 2047 तक देश को एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अमेरिकी पूंजी, तकनीक और सैन्य सहयोग आवश्यक हैं।
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नए राजदूत ने भी संभाले रिश्ते
दिसंबर 2025 में भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के आने से लगा कि रिश्तों को ठीक करने की और गंभीर कोशिशें शुरू हो गई हैं। गोर व्हाइट हाउस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और लंबे समय से ट्रंप के करीबी लोगों में से हैं। वह अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो के भी करीबी हैं।
गोर ने नई भूमिका में अपने पहले सार्वजनिक भाषण में दोनों देशों के बीच तनाव को 'असली दोस्तों' के बीच असहमति बताया और भरोसा जताया था कि तनाव को दोनों देश सुल झा लेंगे।संबंधों में इस सुधार के बावजूद भारत ट्रंप के साथ आगे भी सावधानी बरतेगा क्योंकि वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार रखना चाहता है।
भारत की डिप्लोमेसी का दुनिया ने माना लोहा
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ प्रधानमंत्री मोदी का हाथ पकड़कर हंसते हुए वायरल फोटो ट्रंप को यह दिखाने के लिए था कि भारत के पास दूसरे विकल्प भी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने दिसंबर 2025 में पुतिन का रेड कार्पेट वेलकम भी किया, इससे ट्रंप प्रशासन पर दवाब भी बढ़ा।
भारत ने पिछले हफ्ते लगभग दो दशकों की वार्ता के बाद यूरोपियन यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया। यह ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते के कुछ महीने बाद हुआ।
इन समझौतों से साफ हुआ कि अमेरिका के साथ रुकावट के बावजूद भारत अपने व्यापारिक संबंधों में विविधता लाने के प्रति गंभीर है। इस महीने के आखिर में प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा की मेजबानी करेंगे।
