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'बांग्लादेश से गंगा जल संधि पर बिना देरी चर्चा शुरू करे सरकार', संसदीय समिति का सुझाव

Published: Thu, 30 Jul 2026 10:39 PM (IST)

संसदीय पैनल ने भारत सरकार से 2026 में समाप्त हो रही गंगा जल संधि पर बांग्लादेश के साथ तत्काल चर्चा शुरू करने का आग्रह किया है।

गंगा जल संधि 2026 में समाप्त हो रही है

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश और भारत के बीच 1996 में हुई गंगा जल संधि इस वर्ष समाप्त होने वाली है। इस पर एक संसदीय पैनल ने सरकार से "बिना किसी देरी के" ढाका के साथ चर्चा शुरू करने का आग्रह किया है।

कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता में विदेश मामलों पर संसदीय स्थायी समिति ने यह बात गुरुवार को संसद में प्रस्तुत की गई एक रिपोर्ट में कही। इस रिपोर्ट का शीर्षक है-"भारत-बांग्लादेश संबंधों के भविष्य पर समिति की नौवीं रिपोर्ट में शामिल टिप्पणियों/सिफारिशों पर सरकार द्वारा उठाए गए कदम।'

गंगा जल संधि 2026 में समाप्त हो रही है

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि यह संधि 2026 में समाप्त होने वाली है और इसके नवीनीकरण पर द्विपक्षीय चर्चाएं अभी तक शुरू नहीं हुई हैं। समिति ने नवीनीकरण चर्चाओं की शीघ्र शुरुआत की सिफारिश की है, जो अद्यतन जलविज्ञान डाटा और जलवायु परिवर्तन के पूर्वानुमानों के आधार पर होनी चाहिए और बंगाल व बिहार की राज्य सरकारों के साथ परामर्श में होनी चाहिए।

1996 की गंगा जल संधि एक द्विपक्षीय समझौता है, जो फरक्का बैराज से गंगा नदी के जल के वितरण को 30 वर्षों के लिए नियंत्रित करता है। समिति ने बताया कि जुलाई 2023 में संधि की आंतरिक समीक्षा के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया था और बांग्लादेश में नई सरकार के तहत द्विपक्षीय चर्चाएं शुरू होने की उम्मीद है।

बंगाल, बिहार सरकारों से परामर्श आवश्यक है

समिति को चिंता है कि संधि 2026 में समाप्त होने वाली है, समय तेजी से बीत रहा है। अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा आंतरिक समीक्षा को शीघ्रता से पूरा करने की सिफारिश की गई है ताकि भारत की वार्ता की स्थिति तैयार हो सके।बंगाल और बिहार की राज्य सरकारों के साथ पूरे प्रक्रिया में परामर्श बनाए रखने की आवश्यकता है।

समिति ने कहा कि उसे सूचित किया गया है कि गंगा जल संधि में बंगाल की महत्वपूर्ण भागीदारी थी, जिसमें राज्य के वित्त मंत्री ने संधि प्रविधानों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बंगाल सरकार ने मार्च 2025 में कोलकाता में आयोजित संयुक्त नदियों आयोग (जेआरसी) की सबसे हालिया बैठक में भी भाग लिया।