यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 03, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सिंधु जल विवाद को लेकर होने वाली वार्ता में हिस्सा ले सकता है भारत
इस माह सिंधु जल समझौते को लेकर होने वाली वार्ता में भारत हिस्सा ले सकता है। इसको लेकर बने स्थाई कमिशन की यह बैठक लाहौर में होगी।

नई दिल्ली (एएनआई)। सिंधु जल विवाद को खत्म करने के मकसद से पाकिस्तान ने भारत को वार्ता का न्यौता भेजा है। यह वार्ता इस माह लाहौर में हो सकती है। इस वार्ता के दौरान सिंधु जल संधि के लिए बनाए गए स्थाई कमिशन के अधिकारियों की बातचीत होनी है। इस कमिशन में भारत और पाकिस्तान के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक स्थाई सिंधु आयोग की बैठक 31 मार्च से पहले होगी जो संधि के तहत तय है। उन्होंने कहा कि संधि के तहत जरूरी है कि भारत और पाकिस्तान की बैठक हर वित्त वर्ष में हो। अगर हम ऐसा नहीं करते तो यह संधि का उल्लंघन होगा।
इसका गठन 1960 में हुई सिंधु जल संधि को लागू करने के लिए किया गया था। कमिशन डेटा का रखरखाव और इसका आदान-प्रदान करने के साथ ही दोनो देशों के बीच सहयोग में मदद करता है। सिंधु जल संधि के लिए 56 वर्ष पहले यह कमिशन बनाया गया था। आगामी मीटिंग का अजेंडा नियमों के अनुसार मेजबान पाकिस्तान तय करेगा। एक अधिकारी ने बताया कि कमिशन की मीटिंग प्रत्येक फाइनेंशल इयर में होती है।
गौरतलब है कि उड़ी हमले के बाद से ही दोनों देशों के बीच खराब होते संबंधों का असर सिंधु समझौते पर भी दिखाई दिया था। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने इसका जिक्र करते हुए साफ कहा था कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते। पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान हुए प्रचार में भी उन्होंने एक रैली को संबोधित करते हुए साफतौर पर कहा था कि भारत सिंधु नदी के पानी की एक बूंद भी पाकिस्तान को नहीं जाने देगा। उड़ी हमले के बाद से ही इसको लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत रद है।
संभवत: इस माह होने वाली बातचीत से दोनों देशों के बीच संबंधों में आई कड़वाहट को दूर करने का मौका मिलेगा। इतना ही नहीं इससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके नवाज शरीफ के बीच 7-8 जून को कजाकिस्तान में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन समिट के दौरान मीटिंग का रास्ता भी खुल सकता है।
इस महीने की शुरुआत में यूनाइटेड नेशंस डिवेलपमेंट प्रोग्राम की रिपोर्ट में पाकिस्तान पर सीमा पार पानी से जुड़े मुद्दों का हल करने में लापरवाही बरतने और भारत के साथ विवाद के मामलों को कमिशन के सामने पेश करने में देरी करने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, रिपोर्ट में सिंधु जल संधि का विवाद निपटाने के लिए एक बेहतरीन उदाहरण के तौर पर भी जिक्र किया गया था।
1960 में सिंधु जल समझौते पर भारत की तरफ से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत भारत को व्यास, रावी और सतलुज का कंट्रोल दिया गया था जबकि पाकिस्तान को चेनाब और झेलम नदी का कंट्रोल सौंपा गया था। पाकिस्तान शुरू से ही भारत द्वारा यहां पर बनाए जा रहे हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर एतराज जताता रहा है।
