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India-US ट्रेड डील से पहले भारत का बड़ा एलान, रूस से लगातार खरीदते रहेंगे तेल

By Jaiprakash RanjanEdited By: Garima Singh
Published: Thu, 16 Apr 2026 10:00 PM (IST)

अमेरिका द्वारा अस्थायी छूट समाप्त करने के बावजूद भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा, इसे राष्ट्रीय हित और ...और पढ़ें

रूस के राष्ट्रपति पुतिन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप, पीएम मोदी

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जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पहले पश्चिम एशिया में संघर्ष फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी और अब अमेरिका द्वारा रूस और ईरान से तेल खरीदने की अस्थायी छूट समाप्त कर दिए जाने के बाद भी भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद नहीं करेगा।

सरकार के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, यह खरीदारी 'राष्ट्रीय हित' की मांग है और पहले भी ऐसी स्थिति में भारत ने स्वतंत्र निर्णय लिया था। अभी भी वॉशिगटन को मनाने की कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं। मंगलवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अमेरिका के राजदूत सर्गियो गोर से मुलाकात की।

भारत राष्ट्रीय हित में रूस से तेल खरीद जारी रखेगा

बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, अमेरिकी तेल-एलपीजी आयात बढ़ाने और रूसी तेल की निरंतर आपूर्ति पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके ठीक कुछ दिन पहले विदेश सचिव विक्रम मिसरी की हालिया वॉशिगटन यात्रा के दौरान भी इन मुद्दों पर गहन विमर्श हुआ था, जहां मिसरी ने अमेरिका-भारत ऊर्जा साझेदारी को नई दिशा देने पर जोर दिया।

अधिकारी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि मौजूदा पश्चिम एशिया संकट में भारत की कच्चे तेल की विशाल जरूरत को रूस के अलावा अभी और कोई देश नहीं पूरा कर सकता। एक अधिकारी के मुताबिक, ईरान पर हमले की शुरुआत से पहले तक भारत अपनी जरूरत का 60 फीसद तक क्रूड होर्मुज जल मार्ग के रास्ते ला रहा था।

अब यह रास्ता बंद है। इराक व कुवैत से आपूर्ति एकदम ठप है। यूएई व सउदी अरब से आपूर्ति सीमिति हो चुकी है। इन देशों से आपूर्ति कब सामान्य होगी, यह अनिश्चित बना हुआ है। रूस से भारी पैमाने पर आयात करने की वजह से ही भारत के पास अभी भी 60 दिनों का पेट्रोलियम भंडार है।

ऐसे में रूस से तेल खरीद पर रोक लगाना भारत के संभव नहीं है। रूस से तेल खरीदने का कोई सरकारी डाटा तो नहीं हैं लेकिन निजी एजेंसी सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि रूसी कच्चे तेल का आयात मार्च, 2026 में दोगुना होकर 2.06 मिलियन बैरल प्रति दिन पहुंच गया है जबकि फरवरी के 1.06 मिलियन बैरल रोजाना की खरीद हुई थी।

आईओसी, ओएनजीसी से तेल खरीद बढ़ी

आईओसी, ओएनजीसी, एचपीसीएल जैसी सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से की गई खरीद काफी बढ़ी है। भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 46 फीसद तक हो गई है जो अभी तक का रिकार्ड है। यह मार्च तक के आंकड़ें हैं जबकि अप्रैल, 2026 में इससे भी ज्यादा की खरीद के सौदे हो रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि रूस और भारत के बीच होने वाले ऊर्जा कारोबार में स्थिति यह बदली है कि अब कीमत रूस तय कर रहा है। यूक्रेन युद्ध के शुरुआत में रूस ने भारत को कच्चे तेल की कीमतों में 15-20 डॉलर प्रति बैरल की जो छूट मिल रही थी, वह स्थिति अब नहीं है। कमोबेश भारतीय कंपनियां बाजार मूल्य पर ही रूसी तेल खरीद रही हैं क्योंकि भारत की चिंता आपूर्ति को सुनिश्चित करना है।

अमेरिका ने पहले भारत पर रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी लेकिन ईरान पर हमला करने के कुछ दिनों बाद जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें आसमान (119 डालर प्रति बैरल) तक पहुंच गई तो अमेरिका ने 15 अप्रैल, 2026 तक उक्त प्रतिबंध को हटा दिया था।

40 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे प्रमुख 

अब अमेरिका की ओर से छूट समाप्त करने का फैसला ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में की है। उन्होंने कहा कि, 'अब कोई नवीनीकरण नहीं।' इस बारे में पूछने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल का कहना है कि, 'भारत के लिए अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे प्रमुख वरीयता है और इसके लिए जो भी जरूरी कदम होगा, वह उठाया जाएगा।'

उधर, संकेत इस बात का भी है कि भारत और अमेरिका के बीच नई ऊर्जा साझेदारी की घोषणा की जाएगी। इसके तहत भारत अमेरिका से सभी तरह के पेट्रोलियम उत्पादों (क्रूड, एलपीजी, एलएनजी) की खरीद बढ़ाने जा रहा है। इस बात का संकेत अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी दिया है।

विश्लेषक मानते हैं कि यह भारत की ऊर्जा कूटनीति की नई परीक्षा है। यूक्रेन युद्ध (फरवरी, 2022) के बाद तकरीबन चार वर्षों तक भारत ने अमेरिका व यूरोपीय देशों के दबाव को दरकिनार कर रूस से तेल की खरीद जारी रखी थी।

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