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आसमान में तैनात हुई भारत की 'तीसरी आंख', दुश्मन की हर चाल पर होगी पैनी नजर

Published: Tue, 06 Oct 2026 10:54 PM (IST)Updated: Tue, 06 Oct 2026 10:55 PM (IST)

डीआरडीओ ने स्वदेशी 'हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफार्म सिस्टम' (एचएपीएस) का सफल उड़ान परीक्षण कर स्ट्रैटोस्फेरिक उड़ान क्षमता का प्रदर्शन किया।

डीआरडीओ ने स्वदेशी एचएपीएस का सफल स्ट्रैटोस्फेरिक उड़ान परीक्षण किया

डीआरडीओ ने स्वदेशी एचएपीएस का सफल स्ट्रैटोस्फेरिक उड़ान परीक्षण किया

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने आसमान से हवाई निगरानी और एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी 'हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफार्म सिस्टम' (एचएपीएस) का सफल उड़ान परीक्षण कर स्ट्रैटोस्फेरिक उड़ान की क्षमता प्रदर्शित की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल उड़ान परीक्षण के लिए डीआरडीओ, वायुसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) और औद्योगिक साझेदारों को बधाई दी है। उन्होंने इस उपलब्धि को उन्नत एयरोस्पेस तकनीक में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

DRDO ने किया है डिजाइन

एचएपीएस हवा से भी हल्का प्लेटफार्म है, जिसे लंबे समय तक ऊंचाई पर बने रहने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसे को आगरा स्थित डीआरडीओ की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) प्रयोगशाला द्वारा डिजाइन और विकसित किया जा रहा है।

डीआरडीओ ने मंगलवार को इस सफलता की जानकारी देते हुए बताया कि परीक्षण के दौरान यह एयरशिप समुद्र तल से 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और करीब 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक सफलतापूर्वक बना रहा।

21 किमी ऊंचाई पर तैनात 

पृथ्वी की सतह से लगभग 17 से 50 किलोमीटर ऊपर की उड़ान को स्ट्रैटोस्फेरिक उड़ान कहते हैं। यह उपलब्धि निगरानी, संचार क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, परीक्षण के दौरान एचएपीएस ने समुद्र तल से 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा। इसके बाद इसे लगभग 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से ज्यादा समय तक उड़ाया गया।

निर्धारित परीक्षण पूरा होने के बाद इसे धरती पर सुरक्षित रूप से रिकवर कर लिया गया। मिशन के दौरान एकत्र किए गए उड़ान संबंधी डाटा का विश्लेषण भी किया गया।

एयरोस्पेस आत्मनिर्भरता में मील का पत्थर

इस परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि एचएपीएस ने स्ट्रैटोस्फियर या समतापमंडल में संचालन की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। स्ट्रैटोस्फियर पृथ्वी के वायुमंडल का वह क्षेत्र है जहां लंबे समय तक किसी हवाई प्लेटफार्म को तैनात कर लगातार निगरानी, संचार और विभिन्न क्षेत्रों की निगरानी की जा सकती है।

परीक्षण के दौरान एचएपीएस से रियल-टाइम वीडियो और प्रदर्शन से जुड़ा डाटा लगातार ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक भेजा गया।इसमें कई उपकरण और कंट्रोल सिस्टम लगाए गए थे, जिनमें इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट (आइएमयू) जीपीएस रिसीवर, आनबोर्ड कैमरे, ऊंचाई नियंत्रित करने वाले सिस्टम अन्य निगरानी और नियंत्रण संबंधी सब-सिस्टम शामिल थे।

यह परीक्षण कई एजेंसियों के सहयोग के साथ किया गया, जिनमें भारतीय वायुसेना, सेंटर फार मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) शामिल थे।

(न्यूज एजेंसिप्ती के आईएएनएस के इनपुट के साथ)