चीन-पाक के परमाणु खतरे का काल बनेगा भारत का 'सुदर्शन चक्र', हवा में ही मिसाइलों को स्वाहा करेगा नया किल-वेब
भारत चीन और पाकिस्तान के बढ़ते परमाणु एवं मिसाइल जखीरे का मुकाबला करने के लिए 'सुदर्शन चक्र' नामक अत्याधुनिक बहु-स्तरीय वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित कर रहा है।

भारत का सुदर्शन चक्र (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान के तेजी से बढ़ते परमाणु एवं मिसाइल जखीरे के बीच भारत एक अत्याधुनिक बहु-स्तरीय राष्ट्रीय वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित कर रहा है, जिसे सुदर्शन चक्र नाम दिया गया है। यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु हथियार ले जाने वाले प्लेटफॉर्म को हवा में ही निष्क्रिय करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।
चीन का बढ़ता परमाणु विस्तार
हाल के वर्षों में चीन ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम का तेजी से विस्तार किया है। विभिन्न आकलनों के अनुसार चीन के पास अब करीब 600 परमाणु वारहेड हैं, जबकि अमेरिकी रक्षा विभाग का अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है।
चीन की परमाणु ताकत का मुख्य आधार DF-41 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जो MIRV तकनीक से लैस है। यह एक साथ कई परमाणु वारहेड अलग-अलग लक्ष्यों पर दाग सकती है। इसके अलावा DF-5B, DF-31AG और DF-26 जैसी मिसाइलें भी चीन की रणनीतिक क्षमता को मजबूत कर रही हैं।
समुद्र आधारित परमाणु क्षमता बढ़ाने के लिए चीन ने JL-3 सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल को अपनी Type-094 पनडुब्बियों में तैनात किया है। वहीं 300 से अधिक नए मिसाइल साइलो का निर्माण और विखंडनीय सामग्री उत्पादन में बढ़ोतरी बीजिंग की दीर्घकालिक रणनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाती है।
भारत केंद्रित है पाकिस्तान की परमाणु नीति
दूसरी ओर पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम मुख्य रूप से भारत को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। अनुमानतः पाकिस्तान के पास करीब 170 परमाणु वारहेड हैं। उसकी “फुल स्पेक्ट्रम डिटरेंस” नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ सिद्धांत को नहीं मानती और सामरिक से लेकर रणनीतिक स्तर तक परमाणु विकल्प खुला रखती है।
पाकिस्तान के मिसाइल बेड़े में शाहीन श्रृंखला की बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी मारक क्षमता 2,750 किलोमीटर तक बताई जाती है। इसके अलावा कम दूरी की नस्र मिसाइल युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल के लिए विकसित की गई है। बाबर क्रूज मिसाइल और राद एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइलें भी पाकिस्तान की परमाणु क्षमता का हिस्सा हैं।
सुदर्शन चक्र होगा भारत की सुरक्षा कवच
इन चुनौतियों के बीच भारत सुदर्शन चक्र नामक बहु-स्तरीय एयर डिफेंस आर्किटेक्चर विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य पाकिस्तान की सामरिक परमाणु प्रणालियों और चीन की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताओं दोनों का मुकाबला करना है।
इस प्रणाली में अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों की सुरक्षा के लिए बहुत कम दूरी की एयर डिफेंस प्रणालियां, मध्यम दूरी के लिए आकाश और MR-SAM जैसी इंटरसेप्टर मिसाइलें तथा लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली शामिल होगी।
किल-वेब तकनीक पर आधारित होगा नेटवर्क
सुदर्शन चक्र की सबसे बड़ी विशेषता इसका किल-वेब ढांचा होगा। इसमें सेना, नौसेना और वायुसेना के सेंसर, रडार, कमांड सेंटर और हथियार प्रणालियां एकीकृत नेटवर्क में जुड़ी होंगी। इससे दुश्मन के हमले का तेजी से पता लगाकर तुरंत जवाबी कार्रवाई संभव होगी।
रक्षा योजनाकारों के अनुसार यह प्रणाली बड़े पैमाने पर होने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों के दौरान भी काम करने के लिए डिजाइन की जा रही है। वर्ष 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था ने कथित तौर पर ड्रोन और मिसाइल हमलों को विफल किया था, जिससे भविष्य की रणनीति को दिशा मिली।
