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लद्दाख के 28 स्थानों के मानक नाम जारी, भारत ने नक्शे पर स्पष्ट की अपनी संप्रभुता

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:07 PM (IST)

भारत ने लद्दाख के 28 स्थानों और भौगोलिक संरचनाओं के मानक नाम जारी किए हैं, जिन्हें अब भारतीय सर्वेक्षण विभाग के आधिकारिक मानचित्र पर दर्शाया गया है।

भारत ने लद्दाख के 28 स्थानों को दिए मानक नाम (फाइल फोटो- PTI)

भारत ने लद्दाख के 28 स्थानों को दिए मानक नाम (फाइल फोटो- PTI)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चीन के साथ संबंध सुधारने की कोशिश जारी है, लेकिन भारत ने शुक्रवार को यह स्पष्ट कर दिया कि भौगोलिक संप्रभुता के मसले पर वह अपने हितों के अनुसार कदम उठाता रहेगा। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने पूर्वी लद्दाख समेत केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के 28 स्थानों और भौगोलिक संरचनाओं के मानक नाम जारी किए हैं।

ये नाम अब भारतीय सर्वेक्षण विभाग के आधिकारिक मानचित्र पर दर्ज हो गए हैं। इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे वे इलाके भी शामिल हैं, जो जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव के बिंदु रहे हैं।

भारत सरकार ने केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के परामर्श से इन 28 स्थानों को मानक नामों के साथ चिह्नित किया है। सरकारी बयान के अनुसार, इसका उद्देश्य इनकी सटीक पहचान आसान बनाना और आम लोगों में बेहतर जागरूकता पैदा करना है।

सूची में चोटियां, पहाड़, दर्रे, ग्लेशियर, घाटी, नदी, झील और कई भौगोलिक इकाइयां शामिल हैं। चोटियों में अतिश गिरि, कनिष्क पीक, मार्तंड गिरि, जोरावर पीक, रिनचेन जांगपो, शाक्यश्री गिरि, मार्पा लोत्सवा री, मिलारेपा कांगरी, शिव री और महेश्वर री हैं।

पहाड़ों में करुण पीर, द्रक कार्पो और जोलमोरी दर्रों में चपचिंगल पास और शचमिर्क पास और ग्लेशियरों में परपिक और स्कामरी शामिल हैं। श्कोर्गा घाटी, यांगपा नदी, गुरु रिनपोछे झील और हाट स्प्रिंग भी सूची में हैं।

भूमि-क्षेत्रों में ब्रंगसा, कुक्सेल, देहरा कम्पास, गोगरा, कुमारायण प्वाइंट, पांगलुंग और शमल लुंगपा शामिल हैं। यहां बताते चलें कि देहरा कम्पास अक्साई चिन क्षेत्र से जुड़ा माना जाता है, जिस पर चीन दावा करता है। मानचित्र सर्वेआफइंडियाडाटगोवडॉटइन पर देखा जा सकता है।

इस साल चीन के साथ लगी सीमा पर अपने भौगोलिक दावे को पुख्ता करने का यह भारत की तरफ से उठाया गया दूसरा कदम है। अगस्त 2026 की शुरुआत में भारत ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक संरचनाओं को भी भारतीय सर्वेक्षण विभाग के आधिकारिक मानचित्र पर उनके मानक नामों के साथ चिह्नित किया था। उस सूची में लान्गजू, माजा, थाग ला, जोल दर्रे और जसवंत गढ़ जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान शामिल थे।

चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ या दक्षिणी तिब्बत कहकर अपना बताता है, जिसे भारत खारिज करता रहा है। सरकारी भाषा में यह कदम पहचान और जन-जागरूकता के लिए बताया गया है, लेकिन समय और जगहें इसका राजनीतिक संदेश साफ करती हैं।

गोगरा और हाट स्प्रिंग वास्तविक नियंत्रण रेखा पर घर्षण के प्रमुख बिंदु रहे हैं। 2020 के बाद दोनों ओर बड़ी संख्या यहां पर तैनात हुई थी। कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद कुछ बिंदुओं पर पीछे-हटने और गश्त को लेकर समझौता हुआ है लेकिन कुछ इलाकों में आंशिक तौर पर ही सैनिकों की वापसी हुई थी।

मानचित्र पर मानक नाम दर्ज करना भारत का यह संकेत है कि बातचीत चाहे जारी रहे, नक्शे और नामकरण पर वह अपनी स्थिति नहीं छोड़ेगा। चीन के मानचित्रों या नामकरण से भारत की स्थिति नहीं बदलती और भारत भी अपने आधिकारिक नक्शे पर इन इलाकों को अपने नाम से चिह्नित कर रहा है। हाल के वर्षों में चीन ने भी अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों के मंदारिन भाषा में नाम जारी किए हैं।

बीजिंग ने 2017 में छह स्थानों के चीनी नाम घोषित किए थे, इसके बाद 2021, 2023, 2024 और 2025 में और सूचियां जारी कीं। अप्रैल 2024 में उसने 30 और स्थानों के नाम जारी किए थे। भारत इन कोशिशों को व्यर्थ और वास्तविकता से परे बताता रहा है। भारत कई बार साफ तौर पर कह चुका है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा।