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'अमेरिकी उपराष्ट्रपति की टिप्पणी अनुचित व अपमानजनक', ट्रंप सरकार के फैसले पर भारत ने दिखाया आईना

Published: Fri, 09 Oct 2026 08:47 PM (IST)

भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस द्वारा भारतीय आईटी पेशेवरों को 'बंधुआ' कहने और ग्रीन कार्ड से जुड़ी पर्म प्रक्रिया से कंपनियों को बाहर करने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति की 'बंधुआ' टिप्पणी को अपमानजनक बताया।

भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति की 'बंधुआ' टिप्पणी को अपमानजनक बताया।

HighLights

  1. भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति की 'बंधुआ' टिप्पणी को अपमानजनक बताया।

  2. ग्रीन कार्ड पर्म प्रक्रिया से कंपनियों को बाहर करने पर आपत्ति।

  3. भारतीय पेशेवरों का अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारत की कई प्रमुख आइटी कंपनियों और कुछ वैश्विक कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़ी पर्म प्रक्रिया से बाहर करने की ट्रंप प्रशासन के फैसले पर भारत ने बेहद कड़ी और कठोर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने स्थाई श्रम प्रमाणीकरण (पर्म) प्रक्रिया को एच-1बी वीजा से जुड़ा मामला बताते हुए इसे अमेरिकी इकोनमी के लिए फायदेमंद बताया है।

साथ ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस द्वारा भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए 'बंधुआ' (इनडेंटर्ड सर्वेंट्स) जैसे शब्द के इस्तेमाल को पूरी तरह अनुचित, आपत्तिजनक और गहरा अपमानजनक बताया है। यह हाल के दिनों में भारत के हितों को चोट पहुंचाने वाले अमेरिकी कदम पर नई दिल्ली की सबसे तीखी प्रतिक्रिया है और साफ संकेत देती है कि भारत-अमेरिका संबंध और नीचे जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि, 'उपराष्ट्रपति के ऐसे वर्णन पूरी तरह अनुचित हैं और इस तथ्य को नजरअंदाज करते हैं कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल हैं तथा वहां की अर्थव्यवस्था और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान दे रहे हैं। अमेरिका का अपना इतिहास भी पीढ़ियों से आप्रवासियों के श्रम, उद्यम से बना है, जिन्होंने उसकी वृद्धि और समृद्धि में योगदान दिया। दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत के अर्थ लिए हुए शब्दावली का सहारा लेना गहरा अपमानजनक है।'

दरअसल, ‘इंटेन्टर्ड सर्वेंट्स’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर उन भारतीय श्रमिकों के लिए किया जाता है जिन्हें तकरीबन 175 वर्ष पहले सूरीनाम, मारीशस, वेस्टइंडीज जैसे दूरदराज के इलाकों में अंग्रेजी हुकूमत ले कर गई थी। उन्हें कोई श्रमिक नहीं दिया जाता था और बंधुआ मजदूरी के तौर पर काम लिया जाता था।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस मुद्दे पर हो रहे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पर्म प्रक्रिया और एच-1बी वीजा कार्यक्रम से एक दूसरे से अलग है। पर्म आवेदनों के निलंबन से मौजूदा एच-1बी वीजा की वैधता या एच-1बी वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति अपने आप प्रभावित नहीं होती, हालांकि प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की स्थायी निवास संबंधी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ सकता है।

बारत ने यह भी याद दिलाया है कि, 'पेशेवर प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है। अगर यह भारतीयों के लिए अवसर बनाती है तो अमेरिकी कंपनियों को अत्याधुनिक प्रतिभा, नवाचार, शोध, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और रोजगार देती है, साथ ही अमेरिका में शेयरधारक संपत्ति भी बढ़ाती है। यह दोनों देशों के लिए परस्पर लाभ का क्षेत्र है और उम्मीद है कि सभी पक्ष इस तथ्य को समझेंगे। अमेरिका द्वारा घोषित कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाते।'

हाल के वर्षों में अमेरिका को लेकर यह भारत की सबसे सख्त प्रतिक्रिया है। रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों पर भी भारत साफ कहता रहा है कि ऊर्जा खरीद पर वह अपने हितों को देख कर फैसला करेगा। विदेश मंत्रालय के अधिकारी बता रहे हैं कि ट्रंप सरकार का यह कदम मध्यावधि चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

साथ ही व्यापार वार्ता अटकने के बाद ट्रंप प्रशासन लगातार ऐसे कदम उठा रहा है जो भारत के हितों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे लगता है कि वह परोक्ष दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।

भारत के कूटनीतिक हलकों में अमेरिकी श्रम विभाग के इस कदम को लेकर गहरा रोष है। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल का कहना है कि, 'ट्रंप प्रशासन भारत के साथ संबंधों को पूरी तरह खत्म करने पर आमादा दिखता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह ऐसा क्यों करना चाहता है।'

एक अन्य विदेश सचिव टी एस त्रिमूर्ति का मानना है कि, 'अमेरिका लगातार यह संदेश दे रहा है कि उसकी नई रणनीति में भारत फिट नहीं होता।' इस प्रकरण के बाद अब सभी की नजर रूसी तेल खरीद पर 100 फीसद तक टैरिफ लगाने संबंधी कदम पर होगा।

इस बारे में कानून बन चुका है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 17 अक्टूबर, 2026 तक फैसला करना है। पिछले वर्ष भी रूसी तेल आयात पर भारत पर अतिरिक्त 25 फीसद का टैरिफ लगाया था।

इसके बाद एच1-बी शुल्क बढ़ाए गये और राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से लगातार भारत-पाकिस्तान तनाव में अपनी भूमिका को लेकर दावे किये गए हैं, जिनको भारत खारिज भी करता है।