नई दिल्ली। भारत ने अफ्रीकी देश दक्षिण सूडान में बढ़ती हिंसा के बीच सोमवार को वहां के तेल क्षेत्र से अपने सभी अधिकारियों को निकाल लिया और तेल संयंत्रों को बंद कर दिया। इसके साथ ही भारतीय नागरिकों को उस सर्वाधिक नए देश को छोड़ने की सलाह दी।

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अद्यतन गतिविधियों के जानकार एक शीर्ष सूत्र ने बताया कि 40 हजार बैरल प्रति दिन तेल उत्पादन वाले ग्रेटर नील ऑयल प्रोजेक्ट और ब्लॉक 5 ए से सभी 11 अधिकारियों को हवाई मार्ग से बाहर निकाल लिया गया है। इस काम को दो बार में अंजाम दिया गया। सभी अधिकारी सकुशल भारत पहुंच गए हैं। वहां से रवाना होने से पहले रविवार को आखिरी काम इन अधिकारियों ने तेल संयंत्रों को बंद करने का किया। भारत सरकार की कंपनी ओएनजीसी का विदेश में काम देखने वाली कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड [ओवीएल] ने अपने 11 अधिकारियों को सूडान की उस तेल परियोजना के लिए तैनात किया था। कंपनी की ओर से उन्हें वहां से निकालने का सारा इंतजाम किया गया क्योंकि सत्ता से हटाए गए सूडान के उप राष्ट्रपति रीक मेचर की वफादार विद्रोही सेना ने यूनिटी राज्य पर कब्जा कर लिया है जहां सबसे अधिक तेल क्षेत्रों में काम हो रहा है।

ओवीएल का ग्रेटर नील आयल प्रोजेक्ट में ओवीएल की 25 फीसद हिस्सेदारी है जबकि ब्लॉक 5ए में 24.125 फीसद है जहां से पांच हजार बैरल प्रतिदिन तेल निकलता है। इस परियोजना में 40 फीसद हिस्सेदार चीन, और 30 फीसद हिस्सेदार मलेशिया ने भी दक्षिण सूडान से अपने अधिकारियों को खाली कराने का फैसला लिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अधिकांश भारतीय पहले ही वह देश छोड़ चुके हैं या जूबा स्थित भारतीय दूतावास की सलाह पर अमल करते हुए छोड़ने की प्रक्रिया में हैं।

सूत्रों के अनुसार दुनिया के सबसे नये देश दक्षिण सूडान में 250-300 भारतीय नागरिक हैं। यह देश 9 जुलाई 2011 को सूडान से आजाद हुआ था। 15 दिसंबर से शुरू हुए संघर्ष में अब तक संयुक्त राष्ट्र में शांति सैनिक के रूप में काम कर रहे भारतीयों समेत 500 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

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