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अब भारत में नहीं होगी यूरिया की कमी, देशभर में लगेंगे नए प्लांट; सरकार का मास्टर प्लान तैयार

Published: Wed, 15 Jul 2026 08:36 PM (IST)Updated: Wed, 15 Jul 2026 08:38 PM (IST)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूरिया में आत्मनिर्भरता के लिए नई निवेश नीति को मंजूरी दी है। इसका लक्ष्य 8-9 नए गैस ...और पढ़ें

यूरिया प्रोडक्शन में आत्मनिर्भर बनने के लिए तैयार भारत

यूरिया प्रोडक्शन में आत्मनिर्भर बनने के लिए तैयार भारत

HighLights

  1. नई नीति से 8-9 गैस आधारित यूरिया प्लांट लगेंगे।

  2. एक करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।

  3. भारत यूरिया आयात पर निर्भरता कम करेगा।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश को यूरिया में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूरिया में राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दे दी है।

नई नीति का लक्ष्य देश में 8 से 9 नए गैस आधारित यूरिया प्लांट स्थापित कर करीब एक करोड़ टन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता तैयार करना है। इससे देश के भीतर ही यूरिया की जरूरत पूरा करने का रास्ता खुलेगा। नई नीति में निजी, सरकारी एवं सहकारी क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा।

यूरिया प्रोडक्शन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को बताया कि पिछले कुछ वर्षों में खेती का रकबा बढ़ा है। फसल चक्र में बदलाव आया है और पैदावार भी लगातार बढ़ रही है। इसके कारण यूरिया की मांग भी हर साल लगभग पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रही है।

फिलहाल देश में यूरिया की सालाना मांग करीब चार करोड़ टन है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग तीन करोड़ टन है। इस तरह मांग और उत्पादन के बीच करीब एक करोड़ टन का अंतर आयात से पूरा किया जाता है। नई नीति का उद्देश्य इसी अंतर को खत्म करना है।

यह नीति वर्ष 2012 में लागू निवेश नीति का विस्तारित है। पुरानी नीति के तहत छह नए यूरिया प्लांट लगाए गए थे। इनमें चार सार्वजनिक क्षेत्र की संयुक्त उद्यम कंपनियां हैं और दो निजी क्षेत्र की।

पुरानी नीति की अवधि अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद उर्वरक विभाग को नए संयंत्र लगाने के कई प्रस्ताव मिले हैं। इन्हें देखते हुए नई निवेश नीति लाने का फैसला किया गया।

अभी देश में 33 यूरिया निर्माण इकाइयां हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 269.42 लाख टन है। पिछले एक दशक में छह नए संयंत्र जुड़ने से उत्पादन बढ़ा है और आयात पर निर्भरता कुछ कम हुई है। लेकिन मांग में लगातार वृद्धि के कारण अभी भी बड़ी मात्रा में यूरिया विदेशों से खरीदना पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और आपूर्ति में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत पर पड़ता है। नई नीति से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उर्वरक क्षेत्र में स्थिरता आएगी। अगर सारे प्लांट समय पर तैयार हो जाते हैं तो यूरिया के मामले में भारत आत्मनिर्भर बन सकता है।

नई नीति का सबसे बड़ा फोकस गैस आधारित आधुनिक यूरिया संयंत्रों पर है। इससे उत्पादन बढ़ेगा, ऊर्जा दक्षता बेहतर होगी और पर्यावरणीय दृष्टि से भी अधिक उपयुक्त होगा।

निवेशकों के लिए पहले से अधिक आकर्षक बनाया गया है। अब फिक्स्ड और वेरिएबल कास्ट को अलग-अलग रखा जाएगा। इससे सब्सिडी और लागत का आकलन अधिक पारदर्शी होगा। इसके अलावा निवेशकों को रिटर्न ऑन इक्विटी के लिए 12 प्रतिशत की न्यूनतम और 16 प्रतिशत की अधिकतम सीमा तय की गई है।

विदेशी मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से होने वाले जोखिम को भी नई नीति में कम करने का प्रयास किया गया है। इसके तहत परियोजना शुरू होने के चार वर्ष बाद फिक्स्ड कॉस्ट को उस समय की विनिमय दर के आधार पर रुपये में परिवर्तित कर दिया जाएगा। इससे कंपनियों और सरकार दोनों पर विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ेगा।

नई नीति के तहत स्थापित होने वाले प्रत्येक नए संयंत्र पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी। इससे परियोजनाओं की लागत घटेगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

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