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क्या अब नहीं लगेगी सिलिंडर के लिए लाइन? 93 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहे दो टैंकर

Published: Tue, 24 Mar 2026 08:30 PM (GMT+05:30)

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य से 93,000 टन एलपीजी लेकर दो भारतीय जहाज भारत पहुंच रहे हैं। ...और पढ़ें

प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि इससे एलपीजी की आपूर्ति को सुचारू बनाने में बड़ी मदद मिलेगी (फोटो: रॉयटर्स)

प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि इससे एलपीजी की आपूर्ति को सुचारू बनाने में बड़ी मदद मिलेगी (फोटो: रॉयटर्स)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से दो भारतीय एलपीजी (रसोई गैस) से लदे जहाज सुरक्षित निकलकर भारत पहुंच रहे हैं। इनमें कुल 93 हजार टन एलपीजी है, जो शुक्रवार तक देश के बंदरगाहों पर पहुंच जाएगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि इससे एलपीजी की आपूर्ति को सुचारू बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।

इसके साथ ही दैनिक जागरण को सूचना मिली है कि पश्चिम एशिया विवाद शुरू होने के बाद हाल ही में भारत ने अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया से खरीदे गये एलपीजी जहाज भी सात से दस दिनों के भीतर भारतीय तटों पर पहुंचेंगे। घरेलू उत्पादन में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ इन जहाजों का आगमन मिलकर देश की रोजाना जरूरत को काफी हद तक पूरा करेगा।

कई हजार मीट्रिक टन एलपीजी

मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि 47,600 मैट्रिक टन एलपीजी से लदा जहाज जग वसंत 26 मार्च (गुरुवार) शाम तक कांडला बंदरगाह पहुंच जाएगा, जबकि 45,000 मैट्रिक टन से लदा पाइन गैस जहाज 27 मार्च (शुक्रवार) सुबह मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचेगा। इन दोनों जहाजों ने होर्मुज से निकलते समय ईरानी तट के करीब से नया रूट अपनाया था और भारतीय नौसेना की निगरानी में सुरक्षित निकले।

शर्मा ने स्पष्ट किया, “एलपीजी की स्थिति चिंताजनक जरूर है, लेकिन घरेलू उत्पादन बढ़ा दिया गया है। पेट्रोकेमिकल्स और दूसरे उत्पादों का उत्पादन रोककर रिफाइनरियों को एलपीजी पर फोकस करने के आदेश दिए गए थे।''

एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने को कहा

भारत में औसतन रोजाना 80 हजार से 90 हजार टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से सामान्य तौर पर 55-60 प्रतिशत (करीब 55 हजार टन) आयात से आता है, जबकि बाकी घरेलू उत्पादन से। लेकिन पश्चिम एशिया तनाव के कारण आयात प्रभावित होने पर सरकार ने 8 मार्च को आपातकालीन आदेश जारी कर सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने को कहा।

इससे घरेलू उत्पादन में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। अब रोजाना घरेलू उत्पादन 48 हजार टन से ज्यादा हो गया है, जो पहले करीब 35 हजार टन था। पूरी बढ़ी हुई मात्रा घरेलू उपभोक्ताओं (यानी रसोई गैस सिलेंडर) के लिए ही जा रही है।इन दो जहाजों से आने वाले 93 हजार टन एलपीजी लगभग एक दिन की पूरी खपत के बराबर है। यह स्टॉक सीधे रिफाइनरियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स तक पहुंचेगा, जिससे बाजार में दबाव कम होगा।

'पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं'

साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी (होटल, रेस्टोरेंट आदि) की आपूर्ति भी धीरे-धीरे बहाल की जा रही है। सरकार ने पहले वाणिज्यिक उपयोग पर रोक लगाई थी, अब उसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया है। शर्मा ने अफवाहों पर रोक लगाते हुए कहा, “कोई पेट्रोल पंप बंद नहीं है। पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं। आम जनता घबराकर सिलेंडर बुकिंग न करे। होर्डिंग और ब्लैक मार्केटिंग पर नजर रखी जा रही है।''

जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि, “होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में अभी भी 20 भारतीय जहाज फंसे हैं, जिनमें 540 नाविक हैं। ये सभी सुरक्षित हैं और दूतावास उनके संपर्क में है। होर्मुज में पांच और एलपीजी जहाज हैं, जिनमें से एक के जल्द निकलने की संभावना है।''

सूत्रों का कहना है कि बहुत जल्द शेष बचे जहाजों के भी होर्मुज मार्ग से निकलने की पूरी संभावना है। सरकार का जोर इस बात पर है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे वैकल्पिक बाजारों से नई खरीद करने से आपूर्ति तेजी से बढ़े। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि जरूरत के अनुसार ही बु¨कग करें। 25 दिन का बुकिंग गैप बनाए रखा गया है ताकि होर्डिंग रुके।

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