जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। एक दिन पहले समाप्त हुए जी-7 की बैठक में भी अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों ने रूस के साथ भारत के कारोबारी रिश्तों पर नजरें टेढ़ी की हैं, लेकिन इसका असर होता नहीं दिख रहा है। मार्च, 2022 की शुरुआत में रूस को यूक्रेन पर हमले का दोषी मानते हुए प्रतिबंध लगाने का एलान किया गया था और इस प्रतिबंध को लगातार सख्त बनाने की कोशिश हो रही है। हालांकि भारत और रूस के कारोबारी अभी तक इन प्रतिबंधों की काट निकालने में सफल रहे हैं।

बखूबी चल रहा आयात-निर्यात

वैसे भारत के कारोबारी रूस को निर्यात करने को लेकर ज्यादा उत्साह में नहीं है लेकिन खाद्यान्न, ईंधन और फार्मास्यूटिकल्स का आयात-निर्यात बखूबी चल रहा है। भारतीय बैंकिंग उद्योग और निर्यातक समुदाय से बात करने पर यह बात सामने आई है कि कारोबार को सामान्य बनाने को लेकर कई तरह के उपाय काम आ रहे हैं। असलियत में अप्रैल, 2021 के मुकाबले अप्रैल, 2022 में रूस से भारत को होने वाले आयात में सात से आठ गुना वृद्धि हुई है।

कम हुआ विदेशी मुद्रा भंडार

बैंकिंग उद्योग के सूत्रों ने बताया कि तकरीबन तीन दशक पहले भारत और रूस के बीच रूबल कर्ज की अदाएगी को लेकर किया गया एक समझौता अभी काफी काम आ रहा है। वर्ष 1992 में यह समझौता तब किया गया था कि जब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार काफी कम हो गया था और रूस के रूबल में लिए गए कर्ज को चुकाने की चुनौती थी।

बैंक में खाता खोलने का समझौता

तब रूस के साथ भारत के केंद्रीय बैंक में खाता खोलने का समझौता हुआ था और इस खाते में रूस की कंपनियों को भारतीय रुपये में भुगतान करने का विकल्प दिया गया था। अभी यह तरीका अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के माहौल में भारत-रूस कारोबारी रिश्तों को कायम रखने में मददगार साबित हो रहा है। उक्त सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों की बैंकिंग व्यवस्था के बीच बातचीत जारी है ताकि आने वाले दिनों में मौजूदा व्यवस्था को और ज्यादा विस्तार दिया जा सके।

अगस्त 2022 के बाद क्या होगा

निर्यातकों के संगठन फियो के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय का कहना है कि अभी रूस के साथ कारोबार मे कोई समस्या नहीं है लेकिन एक बड़ी ¨चता यह है कि अगस्त, 2022 के बाद क्या होगा। क्योंकि जो प्रतिबंध अभी लगाया गया है कि उससे खाद्य, फार्मास्यूटिकल्स और ईंधन को अलग रखा गया है। इन सभी सेक्टर को छह महीने की छूट मिली है। अगस्त माह के बाद यह छूट समाप्त हो सकती है।

निर्यातकों में फिलहाल अनिश्चितता का माहौल

अप्रैल, 2022 में रूस से 1.9 अरब डालर का ईंधन (तेल और गैस) भारत लाया गया है जबकि अप्रैल, 2021 में यह आंकड़ा मात्र 25 करोड़ डालर था। मई में यह मात्रा और ज्यादा होने की संभावना है। वर्तमान स्थिति में रूस भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता हो गया है।

निर्यातक समुदाय में अनिश्चितता

अजय सहाय ने बताया कि निर्यातक समुदाय में निश्चित तौर पर अनिश्चितता है और इस वजह से भारत से रूस को होने वाले निर्यात में ज्यादा तेजी नहीं देखी जा रही है। खास तौर पर जो छोटे और मझोले स्तर के कारोबारी हैं उनके लिए रूस के साथ कारोबार करने में दिक्कत आ सकती है।

कारोबार सामान्य करने पर चल रही बातचीत

अभी भारत और रूस के बीच कारोबार को अगस्त, 2022 के बाद सामान्य करने को लेकर कई स्तरों पर बातचीत भी चल रही है। यह बातचीत बैंकिंग स्तर, उद्योग जगत और सरकार के स्तर पर हो रही है। सूत्रों ने बताया है कि रूसी पक्ष ने भारत के छोटे व मझोले निर्यातकों की दिक्कतों को दूर करने के लिए कई तरह के विकल्प सुझाए हैं।

शिपिंग कंपनी नहीं मिलने से समस्‍या

रूस को भेजे जाने वाले निर्यात के लिए शिपिंग कंपनी नहीं मिलने की समस्या का समाधान रूस और ईरान की कुछ शिपिंग कंपनियों के जरिये निकालने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं छोटे व मझोले निर्यातकों की लागत को घटाने के लिए यह प्रस्ताव किया गया है कि रूस को उत्पाद निर्यात करने वाले इन निर्यातकों के माल को संयुक्त तौर पर भेजा जाए ताकि लागत कम हो सके।

Edited By: Krishna Bihari Singh