विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'हमें सेनाओं के लिए विकसित करनी होगी अपनी एआई लेयर', रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का बड़ा बयान

Published: Fri, 23 Oct 2026 11:22 PM (IST)

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि भारत आधुनिक साइबर खतरों और ड्रोन युद्ध से निपटने के लिए अपने ...और पढ़ें

भारतीय सेना के लिए खुद विकसित करनी होगी AI लेयर (फाइल फोटो)

भारतीय सेना के लिए खुद विकसित करनी होगी AI लेयर (फाइल फोटो)

HighLights

  1. भारत रक्षा ढांचे का पुनर्गठन कर रहा है।

  2. सैन्य सेवाओं के लिए अपनी एआई लेयर विकसित होगी।

  3. रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को कहा कि आधुनिक साइबर खतरों और ड्रोन युद्ध से निपटने के लिए भारत अपने रक्षा ढांचे का पुनर्गठन कर रहा है। इसके तहत घरेलू स्तर पर मिसाइल उत्पादन बढ़ाने और सैन्य सेवाओं के लिए अपनी एआइ लेयर विकसित करने पर काम हो रहा है।

साथ ही बताया कि भारत ने व्यापक बहुस्तरीय वायु रक्षा ग्रिड स्थापित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। देश का रक्षा निर्यात भी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है और यूरोप को हथियारों का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है।

अग्रसर भारत मंच के कार्यक्रम में रक्षा सचिव ने कहा कि निर्णय लेने में सहायता, लक्ष्य का पता लगाने और डाटा को एक साथ जोड़कर सेंसर से निशाना साधने तक का चक्र पूरा करने के लिए एआइ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें जिस तरह के डाटा की जरूरत होती है, उसे देखते हुए हमें अपनी सेना के लिए एआइ की अपनी लेयर विकसित करनी होगी।

चूंकि यह तकनीक कोई और आपको देगा नहीं, या यह इतनी अहम तकनीक है कि इसके लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसलिए जहां तक संभव होगा, इसे हम खुद विकसित करेंगे। लेकिन मित्र देशों के साथ सहयोग की संभावना से इन्कार नहीं किया जाएगा। नेशनल एयर डिफेंस के संरचनात्मक विकास पर बात करते हुए रक्षा सचिव ने बताया कि 'इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम' (आइएसीसीएस) एक एकीकृत डिजिटल आधार के रूप में काम करता है।

उन्होंने कहा, 'भारत ने इस दिशा में शुरुआती कदम उठा लिए हैं। हमारा इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, जो हमारा एयरस्पेस कंट्रोल सिस्टम है, पूरी तरह से नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इसमें जमीनी रडार, हवाई प्लेटफार्म और वायु रक्षा प्रणालियां शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने जब भारत के लिए आयरन डोम जैसी किसी परियोजना की घोषणा की थी, तो उनके मन में यही परिकल्पना थी।'

राजेश सिंह ने कहा कि यद्यपि दीर्घकालिक आधुनिकीकरण योजनाओं में पुराने हथियारों व साजोसामान को व्यवस्थित रूप से अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों से बदलना शामिल है, इसके बावजूद सैन्य योजनाकारों ने पुराने हथियारों व साजोसामान का भी सामरिक महत्व खोज लिया है।

उदाहरण के लिए रडार के साथ रेट्रोफिट करके एयर डिफेंस गन फिर से बहुत उपयोगी हैं क्योंकि मिसाइलों का उपयोग करने की तुलना में ड्रोन के विरुद्ध उनका उपयोग बहुत सस्ता है। बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाना भी बहुत जरूरी है क्योंकि इससे लागत कम हो जाती है, जो ईरान ने करके दिखाया है।

सोर्स- न्यूज एजेंसी ANI के इनपुट के अनुसार